कौन है सुवेंदु अधिकारी को भवानीपुर में जिताने वाला चाणक्य? राजस्थान से आकर ढहा दिया ममता का किला
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रण में इस बार केवल स्थानीय मुद्दे ही नहीं, बल्कि बाहरी राज्यों के दिग्गज रणनीतिकारों की सूझबूझ भी चर्चा का विषय बनी रही। भबानीपुर में ममता बनर्जी को हराकर 2-2 सीटों से जीत दर्ज कर के सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने भबानीपुर और नंदीग्राम सीट जीती है। भबानीपुर की जीत में राजस्थान की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ (Rajendra Rathore) ने इस बार अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
बंगाल की धरती पर भगवा परचम लहराने के लिए राजेंद्र राठौर ने कोई कसर नहीं छोड़ी। पार्टी आलाकमान ने उन्हें एक ऐसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी, जिसने राज्य के सबसे हाई-प्रोफाइल चुनावी मुकाबले के समीकरणों को प्रभावित किया। आमतौर पर राजस्थान के मरुधरा में सक्रिय रहने वाले राठौड़ ने बंगाल के चुनावी समर में न केवल अपनी सांगठनिक क्षमता का परिचय दिया, बल्कि मारवाड़ी समुदाय के बीच भाजपा की पैठ को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान की।

मारवाड़ी वोटरों के बीच 'घर-घर' पैठ
भवानीपुर विधानसभा सीट को बंगाल चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जा रहा था। इस क्षेत्र की खासियत यहां रहने वाली मारवाड़ी और हिंदी भाषी समुदाय की बड़ी आबादी है। भाजपा ने इसी सामाजिक समीकरण को साधने के लिए राजेंद्र राठौड़ (Rajendra Rathore) को मोर्चे पर लगाया। राठौड़ ने करीब दो महीने तक इस इलाके में डेरा डाले रखा और एक परिपक्व रणनीतिकार की तरह काम किया। उन्होंने बड़ी जनसभाओं के बजाय 'माइक्रो-मैनेजमेंट' पर ध्यान केंद्रित किया और छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाओं के जरिए लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया।
जमीनी रणनीति और व्यक्तिगत संपर्क
राठौड़ की कार्यशैली ने भवानीपुर के मतदाताओं को खासा प्रभावित किया। उन्होंने केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित न रहकर घर-घर जाकर लोगों की स्थानीय समस्याएं सुनीं और उन्हें मतदान के लिए प्रेरित किया। मारवाड़ी समुदाय के बीच उनकी साख और राजस्थान से जुड़ाव ने भाजपा के लिए 'भरोसे का सेतु' बनाने का काम किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भवानीपुर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में भाजपा की ओर जो झुकाव बढ़ा, उसके पीछे राठौड़ की यही शांत लेकिन प्रभावी जमीनी मेहनत थी।
सुवेंदु अधिकारी की जीत में निभाया 'सारथी' का रोल
भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी के लिए यह चुनाव साख की लड़ाई थी। ऐसे में राजेंद्र राठौड़ द्वारा तैयार किया गया मजबूत समर्थन आधार उनके लिए संजीवनी साबित हुआ। मारवाड़ी वोट बैंक को एकजुट कर भाजपा के पक्ष में लाने की रणनीति ने मुकाबले को और भी कड़ा बना दिया।
चुनाव के बाद खुद सुवेंदु अधिकारी ने सार्वजनिक मंच से राठौड़ के योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मारवाड़ी मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने और उन्हें मुख्यधारा के चुनावी विमर्श में लाने में राठौड़ की भूमिका निर्णायक रही।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि राजेंद्र राठौड़ अब केवल राजस्थान की प्रादेशिक राजनीति तक सीमित नहीं हैं। एक राष्ट्रीय स्तर के रणनीतिकार के रूप में उभरे राठौड़ ने यह दिखा दिया कि वह कठिन भौगोलिक और भाषाई चुनौतियों के बावजूद पार्टी के लिए किसी भी राज्य में जीत का आधार तैयार करने में सक्षम हैं।












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