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Pradeep Mishra: कौन हैं प्रदीप मिश्रा? जिन्होंने लड़कियों की नाभि को सुरक्षा से जोड़ा, ढकने की दे डाली सलाह

Khatavachak Pradeep Mishra: राजस्थान की राजधानी जयपुर में चल रही शिव महापुराण कथा के दौरान देश के प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा (Pradeep Mishra) ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसे बाद बवाल मच गया है। सोशल मीडिया पर लोग उनके बयान पर अपने-अपने तरह से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। शिव महापुराण की कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को उनकी नाभि से जोड़ा दिया। साथ ही उसे ढकने की सलाह दी है।

कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा इन दिनों जयपुर में शिव महापुराण की कथा का पाठ कर रहे हैं। यहां आने वाले 7 मई तक उनकी कथा चलेगी। ​कथा के दौरान प्रदीप मिश्रा शास्त्र के साथ-साथ सामाजिक सुधार के लिए ज्ञान देते हैं। ऐसे में देश में तेजी से बढ़ रहे दुष्कर्म और महिला के खिलाफ हो रहे अपराध पर पहनावे से जुड़ा विवादित बयान दिया है।

Pradeep Mishra

महिलाओं को लेकर क्या बोले पंडित प्रदीप मिश्रा?

पंडित मिश्रा ने कथा के दौरान कहा, "लड़कियों के पेट की नाभि ढकी रहेगी, तभी वह सुरक्षित रह सकती हैं। आज के समय में पहनावे की वजह से ही अपराध बढ़ रहे हैं। नाभि शरीर की जड़ है, जितना ढका रहेगा, उतनी सुरक्षा बनी रहेगी।"

उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों ने इसे पीड़ित पर दोषारोपण की मानसिकता बताया, तो कुछ ने इसे संस्कृति और सुरक्षा के नाम पर महिला स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। ऐसे में जानिए कौन हैं पंडित मिश्रा?

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब पंडित मिश्रा अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी उनकी धार्मिक कथाओं में दिए गए उपायों और विचारों को लेकर बहस होती रही है। यहां तक स्वयं प्रेमानंद जी महाराज भी कुछ मौकों पर उनके तरीकों से असहमति जता चुके हैं।

'सीहोर वाले बाबा' के नाम से विख्यात

देशभर में लाखों श्रद्धालुओं के बीच 'सीहोर वाले बाबा' के नाम से पहचाने जाने वाले पंडित प्रदीप मिश्रा मौजूदा वक्त में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। अपनी कथावों की वजह से मशहूर प्रदीप मिश्रा ने गांव के एक सामान्य शिक्षक से अंतरराष्ट्रीय स्तर के कथावाचक बनने तक का सफर तय किया है।

एक शिक्षक के रूप में शुरुआत

पंडित प्रदीप मिश्रा का जन्म 1977 में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में हुआ था। बचपन से ही वे धार्मिक माहौल में पले-बढ़े। उनके पिता रामेश्वर दयाल मिश्रा धार्मिक प्रवृत्ति के थे, और उनका प्रभाव प्रदीप के व्यक्तित्व पर भी पड़ा। प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा सीहोर से ही पूरी की और ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने स्कूल में शिक्षक के रूप में अपनी पहली नौकरी शुरू की।

धर्म के प्रति बचपन से झुकाव

प्रदीप मिश्रा स्कूल के समय से ही भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। वे खुद बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान भी उनका मन अक्सर भक्ति भाव और शास्त्रों के अध्ययन में रम जाता था। यही रुचि उन्हें आगे ले गई कथावाचन की दिशा में।

गुरु दीक्षा और कथा की शुरुआत

उनके जीवन में बड़ा मोड़ तब आया जब एक परिचित ब्राह्मण महिला गीताबाई पाराशर ने उन्हें गुरु दीक्षा के लिए इंदौर भेजा। वहां उन्होंने विठलेश राय काका को अपना गुरु बनाया। गुरु दीक्षा के बाद उन्होंने अपने गृह जिले सीहोर से कथा वाचन की शुरुआत की। धीरे-धीरे उनकी वाणी और शैली लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगी।

शिवमहापुराण से मिली पहचान

हालांकि उन्होंने कई धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया है, लेकिन उन्हें असली पहचान शिवमहापुराण की कथाओं से मिली। आज पंडित मिश्रा के यूट्यूब, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाखों फॉलोवर्स हैं। उनकी कथाओं का आयोजन देश के साथ-साथ विदेशों में भी होता है। वे एक कथावाचक ही नहीं, बल्कि एक भजन गायक और आध्यात्मिक गुरु के रूप में भी जाने जाते हैं।

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