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Electoral Bond: कौन हैं जया ठाकुर, जिन्होंने दी थी सुप्रीम कोर्ट में इलेक्टोरल बॉन्ड को चुनौती

चुनावी बॉन्ड योजना की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया। शीर्ष न्यायालय ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया है। इस याचिका पर सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने की थी।

इस मुद्दे पर याचिका कांग्रेस नेता जया ठाकुर द्वारा दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान जया ठाकुर का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि पूरी प्रक्रिया गुमनाम है, क्योंकि इन ब्याज मुक्त बॉन्डों की खरीद के लिए घोषणा की आवश्यकता नहीं होती है, और राजनीतिक दल धन के स्रोत का खुलासा करने के लिए बाध्य नहीं हैं।

Who Is Jaya Thakur Electoral Bond Petitioner

इलेक्टोरल बॉन्ड या कहें चुनावी बॉन्ड पर कांग्रेस नेता डॉ. जया ठाकुर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) समेत चार लोगों ने याचिकाएं दाखिल की हैं। इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को असंवैधानिक करार देते हुए शीर्ष अदालत ने इसे रद्द कर दिया है। साथ हीं, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले पांच सालों के चंदे का हिसाब-किताब भी मांग लिया है।

कौन हैं जया ठाकुर?
डॉ.जया ठाकुर पेशे से डॉक्टर हैं। राजनीतिक रूप से वो कांग्रेस से जुड़ी हुई हैं। समाज, क्षेत्र और दबे- कुचले गरीब लोगों के लिए सामाजिक कार्यों में वो काफी एक्टिव हैं। कई मामले जो समाज और लोक कल्याण से जुड़े हुए हैं उसे लेकर वो अदालत तक जा चुकी हैं। उनमें से चुनावी बॉन्ड का मामला सबसे हालिया है जिस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।

चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर याचिकाकर्ता जया ठाकुर का कहना है, "कार्यवाही चल रही है और अदालत ने अभी तक कोई फैसला नहीं दिया है। लेकिन अदालत ने कहा कि यह पारदर्शी होना चाहिए। आरटीआई हर नागरिक की है सही है। कितना पैसा और कौन लोग देते हैं इसका खुलासा होना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा, "2018 में जब यह चुनावी बॉन्ड योजना प्रस्तावित की गई थी तो इस योजना में कहा गया था कि आप बैंक से बॉन्ड खरीद सकते हैं और पैसा पार्टी को दे सकते हैं जो आप देना चाहते हैं लेकिन आपका नाम उजागर नहीं किया जाएगा, जो कि सूचना के अधिकार के खिलाफ है और इसका खुलासा किया जाना चाहिए। इसलिए मैंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की जिसमें मैंने कहा कि यह पारदर्शी होना चाहिए और उन्हें नाम बताना चाहिए और राशि, जिसने पार्टी को राशि दान की।"

इस से पहले जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अडानी समूह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की थी और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के अडानी शेयरों में कथित तौर पर बढ़ी हुई कीमतों पर निवेश करने के फैसले पर सवाल उठाया था।

डॉ.जया ने पिछले साल संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाले कानून को इस साल (2024) के आम चुनावों से पहले लागू करने के लिए याचिका दायर कर के शीर्ष अदालत से केंद्र को यह निर्देश देने की मांग की थी।

कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा को दिए गए कार्यकाल के तीसरे विस्तार को चुनौती देते हुए भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और कहा था कि बार-बार विस्तार देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट कर रहा है। इसके अलावा भी जया ठाकुर कई मामलों में अदालत का रुख करते हुए याचिका दायर कर चुकी हैं।

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