Bombay HC की 'वाशिंग मशीन' वाली टिप्पणी को मिला उद्धव सेना का साथ, प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- थैंक यू जज साहब
Maharashtra Politics: बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा मुंबई पुलिस की 'तड़ीपारी' कार्रवाई और महाराष्ट्र की मौजूदा दलबदल की राजनीति पर की गई तीखी टिप्पणियों के बाद सूबे का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस माधव जामदार द्वारा सरकार की तथाकथित 'वाशिंग मशीन' और 'हॉर्स ट्रेडिंग' (विधायकों-सांसदों की खरीद-फरोख्त) को लेकर किए गए कटाक्ष पर अब उद्धव ठाकरे गुट Shiv Sena UBT खुलकर अदालत के समर्थन में उतर आया है।

हाल ही में अपने 6 लोकसभा सांसदों के पाला बदलने के झटके से जूझ रही शिवसेना (UBT) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर जज साहब की टिप्पणियों को शेयर करते हुए लिखा-"थैंक यू जस्टिस जामदार।"
Bombay HC Horse Trading And Washing Machine Remark: किस टिप्पणी पर मचा है बवाल?
यह पूरा मामला सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के नेता सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी को एक साल के लिए मुंबई से तड़ीपार करने के पुलिसिया आदेश को रद्द करने के दौरान का है। जस्टिस जामदार ने सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र विधानसभा की कार्यवाही और नेताओं के दलबदल पर बेहद कड़ा रुख अपनाया था।
जज साहब ने भरी अदालत में कहा था-"परसों ही एक एक्सीडेंट में 10 साल के मासूम बच्चे की मौत हो गई, लेकिन राज्य की विधानसभा इस बात पर चर्चा कर रही थी कि पीठासीन अधिकारी का चुनाव कैसे हो रहा है और कौन किस पार्टी से कहां भाग रहा है। यह क्या चल रहा है? आप (याचिकाकर्ता) भी क्यों नहीं अपनी राजनीतिक पार्टी बदल लेते... वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर हॉर्स-ट्रेडिंग चल रही है। आपके खिलाफ कुछ FIR दर्ज हैं, पाला बदलने के बारे में सोचिए, वहां एक वाशिंग मशीन है जिसमें सारे दाग धुल जाते हैं।"
उद्धव सेना को क्यों दर्द दे गई यह टिप्पणी? जानें अंदर की कहानी
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के लिए हाईकोर्ट की यह टिप्पणी सीधे उनके घावों पर मरहम लगाने जैसी साबित हुई। दरअसल, पिछले महीने ही उद्धव गुट को एक बहुत बड़ा झटका लगा है, जब उनके 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने अचानक पाला बदल लिया और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना में शामिल हो गए।
शिंदे गुट में शामिल होने वाले इन 6 सांसदों में बड़े नाम शामिल हैं:
- संजय दीना पाटिल
- संजय देशमुख
- संजय जाधव
- भाऊसाहेब वाकचौरे
- नागेश पाटिल अष्टीकर
- ओमप्रकाश राजे निंबालकर
पार्टी में हुई इस बड़ी बगावत के बाद उद्धव गुट लगातार शिंदे गुट और भाजपा पर 'ईडी-सीबीआई का डर' दिखाने और 'पैसों के दम पर' सांसदों को खरीदने (हॉर्स-ट्रेडिंग) का आरोप लगा रहा था। ऐसे में जब खुद हाईकोर्ट के जज ने 'वाशिंग मशीन' और 'खरीद-फरोख्त' का जिक्र किया, तो उद्धव सेना को सरकार को घेरने का एक बड़ा कानूनी हथियार मिल गया।
'जनता को गुलाम नहीं बना सकते': विरोध प्रदर्शन पर कोर्ट का कड़ा रुख
जस्टिस जामदार ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि देश के नागरिकों को केंद्र सरकार की नीतियों (जैसे CAA, NRC और वक्फ संशोधन बिल) के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने और 'अमित शाह मुर्दाबाद' या 'भाजपा सरकार मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाने का पूरा संवैधानिक अधिकार है।
कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ प्रदर्शनों में शामिल होने और नारे लगाने की वजह से किसी को तड़ीपार करना पूरी तरह से 'मलेफाइड' (दुर्भावनापूर्ण) है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 (गरिमा के साथ जीने का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।
अब इस फैसले और अदालत की टिप्पणियों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में बहस तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन के रूप में देख रहा है, जबकि आगे इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने की संभावना बनी हुई है।














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