Rajendra Choudhary Admitted: सपा के 'ट्रबलशूटर' राजेंद्र चौधरी वेंटिलेटर पर क्यों? Mulayam-Akhilesh के करीबी
Rajendra Choudhary Admitted ICU Reason: समाजवादी पार्टी (सपा) में जब भी तूफान आता है, राजेंद्र चौधरी मोर्चा संभालते नजर आते हैं। लेकिन, इस बार खुद उनकी तबीयत ने पार्टी को झकझोर दिया। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले, सपा के संकटमोचक वरिष्ठ नेता, मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता और एमएलसी राजेंद्र चौधरी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चार डॉक्टरों की टीम की निगरानी में इलाज चल रहा है।
पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में चिंता की लहर दौड़ गई। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद अस्पताल पहुंचे और उनके स्वास्थ्य का जायजा लिया। यह घटना सपा के लिए सिर्फ एक स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि एक अनुभवी योद्धा की अनुपस्थिति का भी संकेत है, जो दशकों से पार्टी की वैचारिक और राजनीतिक लड़ाई लड़ते आए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं और समझते हैं कि मुलायम-अखिलेश के लिए कितने खास?

कैसे अचानक तबीयत बिगड़ी? वेंटिलेटर पर?
राजेंद्र चौधरी की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि चौधरी को हार्ट अटैक ICU में भर्ती कराया गया है। अस्पताल प्रशासन और चार डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है। फिलहाल, उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन का इंतजार है।
Akhilesh Yadav भी देखने पहुंचे
अखिलेश यादव ने अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों से गहन जानकारी ली। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट कर चौधरी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। अस्पताल के बाहर सपा कार्यकर्ता जुटने लगे, जो उनके प्रति स्नेह और चिंता का प्रतीक है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चौधरी जल्द ही ठीक होकर सक्रिय हो जाएंगे।
यह घटना याद दिलाती है कि राजनीति कितनी भी व्यस्त हो, स्वास्थ्य सबसे अहम है। नेता जो दूसरों के संकट में डटकर खड़े रहते हैं, खुद जब संकट में पड़ते हैं तो पूरा संगठन उनके साथ खड़ा हो जाता है।
Who Is Rajendra Choudhary: कौन हैं राजेंद्र चौधरी? सपा का अचूक 'संकटमोचक'
राजेंद्र चौधरी सपा के उन चंद नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों पीढ़ियों का पूरा भरोसा हासिल रहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले यह नेता छात्र जीवन से समाजवादी विचारधारा से जुड़े। वे पार्टी के मुख्य प्रवक्ता, एमएलसी, पूर्व मंत्री और सबसे बढ़कर 'ट्रबलशूटर' के रूप में मशहूर हैं।
जब भी सपा पर कोई हमला होता है, चाहे परिवारिक विवाद हो, गठबंधन टूटने के दावे हों या चुनावी हार, राजेंद्र चौधरी टीवी डिबेट से लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस तक पार्टी का मजबूत बचाव करते नजर आते हैं। उन्हें अखिलेश यादव का 'डैमेज कंट्रोल स्पेशलिस्ट' भी कहा जाता है।
Rajendra Choudhary Political Career: कैसा रहा राजेंद्र चौधरी का सियासी सफर? मुलायम सिंह के बेहद खास
राजेंद्र चौधरी का जन्म पश्चिमी UP में हुआ। छात्रकाल से ही वे किसान, पिछड़े वर्ग और सामाजिक न्याय के मुद्दों से जुड़े। आपातकाल के बाद 1977 के विधानसभा चुनाव में वे पहली बार विधायक चुने गए। उस समय वे चौधरी चरण सिंह के भारतीय क्रांति दल से जुड़े थे।
1980-90 के दशक में वे समाजवादी आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता बने। 1992 में मुलायम सिंह यादव द्वारा सपा के गठन के बाद वे पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हो गए। मुलायम के करीबी होने के बावजूद उन्होंने अखिलेश के नेतृत्व में भी बिना रुके काम किया। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही, पुरानी और नई पीढ़ी के बीच मजबूत सेतु बनना।
मंत्री पद से लेकर मुख्य प्रवक्ता तक का सफर

राजेंद्र चौधरी का राजनीतिक करियर उपलब्धियों से भरा है:
- 1977: पहली बार विधायक।
- 2002: अखिलेश यादव सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री।
- 2013: जेल मंत्री और खाद्य एवं रसद मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी।
- वर्तमान में: सपा के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता, उत्तराखंड प्रभारी और विधान परिषद सदस्य (MLC)।
मंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया। लेकिन उनकी असली पहचान मीडिया और संगठनात्मक स्तर पर बनी। टीवी डिबेट में सपा का पक्ष रखते हुए वे आक्रामक लेकिन तथ्यपरक रहते हैं।













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