CISF की सब-इंस्पेक्टर गीता सामोता ने फतह किया माउंट एवरेस्ट, जानिए उनके अब तक के हैरतअंगेज अभियान
Geeta Samota Mount Everest: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की सब-इंस्पेक्टर गीता सामोता ने 19 मई को विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) पर सफल चढ़ाई कर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। उनके इस अदम्य साहस और बुलंद हौसले ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है।
गीता सामोता इससे पहले भी कई कठिन पर्वत चोटियों को फतह कर चुकी हैं। वर्ष 2019 में उन्होंने उत्तराखंड की माउंट सतोपंथ (7,075 मीटर) और नेपाल की माउंट लोबुचे (6,119 मीटर) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) से ऐसा करने वाली पहली महिला होने का गौरव प्राप्त किया था।

साल 2021 से लेकर 2022 की शुरुआत तक, गीता ने महज छह महीने और 27 दिनों में 'सेवन समिट्स' की चार प्रमुख चोटियों को फतह कर एक नया रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की माउंट कोसिअस्को (2,228 मीटर), रूस की माउंट एल्ब्रस (5,642 मीटर), तंजानिया की माउंट किलीमंजारो (5,895 मीटर), और अर्जेंटीना की माउंट अकोंकागुआ (6,961 मीटर) पर सफल चढ़ाई की। इस अद्भुत उपलब्धि के साथ वह इतनी कम अवधि में ऐसा करने वाली भारत की सबसे तेज महिला पर्वतारोही बनीं।

इसके अलावा, लद्दाख के रूपशु क्षेत्र में गीता सामोता ने महज तीन दिनों में पांच पर्वत चोटियों पर चढ़ाई की। इनमें तीन चोटियाँ 6,000 मीटर से अधिक और दो चोटियाँ 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर थीं, जो उनके असाधारण शारीरिक और मानसिक साहस का प्रमाण है।
उनकी इन उपलब्धियों के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया है। दिल्ली महिला आयोग ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2023 सम्मान से सम्मानित किया, वहीं नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उन्हें "गिविंग विंग्स टू ड्रीम्स अवार्ड 2023" प्रदान किया।
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गीता सामोता आज देश की उन बेटियों की मिसाल बन चुकी हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बुलंद इरादों से असंभव को भी संभव बना रही हैं।

माउंट एवरेस्ट पर चढना कितना मुश्किल?
बता दें कि माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना बिल्कुल भी आसान नहीं है - यह दुनिया की सबसे ऊँची चोटी (8,848.86 मीटर) है, और यहां तक पहुँचना शारीरिक, मानसिक और तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।
1. बेहद ऊँचाई और ऑक्सीजन की कमी
8,000 मीटर से ऊपर की ऊँचाई को "डेथ ज़ोन" कहा जाता है, जहाँ ऑक्सीजन की मात्रा समुद्र तल के मुकाबले एक-तिहाई से भी कम होती है। शरीर को इस ऊँचाई पर लंबे समय तक टिके रहना लगभग असंभव है - नींद लेना, खाना पचाना, सोच पाना तक कठिन हो जाता है।

2. कठोर मौसम और अचानक बदलता तापमान
माउंट एवरेस्ट पर तापमान -40°C तक गिर सकता है। तेज़ हवाएँ, हिमस्खलन और अचानक बर्फ़बारी जानलेवा साबित हो सकती है। मानसिक दबाव और थकान हफ्तों तक चलने वाले अभियान में लगातार जोखिम बना रहता है। मानसिक थकावट, अकेलापन, ऊँचाई से डर, और दबाव में फैसले लेना - ये सभी मानसिक ताकत की परीक्षा लेते हैं।
3. तकनीकी कठिनाइयाँ और जोखिम भरे रास्ते
खुंबू आइसफॉल, लोहत्से फेस, और हिलेरी स्टेप जैसे रास्ते बेहद खतरनाक और तकनीकी रूप से मुश्किल हैं। एक छोटी सी चूक भी जान ले सकती है। महंगा और संसाधन-निर्भर अभियान। एवरेस्ट चढ़ाई पर ₹20-₹50 लाख तक का खर्च आ सकता है। इसमें गाइड, परमिट, गियर, ऑक्सीजन सिलिंडर, और बेस कैंप सुविधाएं शामिल हैं।
4. शारीरिक फिटनेस और प्रशिक्षण की सख्त जरूरत
एवरेस्ट फतह करने से पहले कई ऊँची चोटियों पर अभ्यास जरूरी होता है। महीनों की ट्रेनिंग और हाई-एल्टीट्यूड अनुभव ज़रूरी होता है।
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