French Open 2026: 19 साल की मीरा एंड्रीवा ने फ्रेंच ओपन जीत रचा इतिहास, दोहराया 34 साल पुराना रिकॉर्ड
French Open 2026: टेनिस की दुनिया को महिला सिंगल्स में एक नया ग्रैंड स्लैम चैंपियन मिल गया है। रूस की 19 वर्षीय टेनिस स्टार मीरा एंड्रीवा (Mirra Andreeva) ने शनिवार को फ्रेंच ओपन 2026 (Roland Garros) का महिला सिंगल्स खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। फाइनल मुकाबले में दुनिया की आठवें नंबर की खिलाड़ी एंड्रीवा ने पोलैंड की माजा च्वॉलिंस्का (Maja Chwalinska) को एकतरफा मुकाबले में 6-3, 6-2 से शिकस्त दी। इसके साथ ही उन्होंने अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम कर लिया है।
34 साल बाद हुआ यह करिश्मा (French Open 2026)
मीरा एंड्रीवा साल 1992 में मोनिका सेलेस के ऐतिहासिक खिताब के बाद से पेरिस के क्ले कोर्ट पर सुज़ैन लेंगलेन कप (Coupe Suzanne Lenglen) उठाने वाली दुनिया की सबसे युवा महिला खिलाड़ी बन गई हैं। टेनिस इतिहास में यह 34 साल बाद हुआ है जब इतनी कम उम्र में किसी खिलाड़ी ने यह मुकाम हासिल किया हो।

डेढ़ घंटे में खत्म किया मैच, पूरे टूर्नामेंट में दिखाया दबदबा
पेरिस के प्रतिष्ठित रोलां गैरो कोर्ट पर खेले गए इस फाइनल मुकाबले में एंड्रीवा शुरुआत से ही भारी पसंदीदा के रूप में उतरी थीं। उन्होंने खिताबी मुकाबले में भी अपनी उसी लय को बरकरार रखा और महज 1 घंटे 30 मिनट के भीतर पोलैंड की प्रतिद्वंद्वी को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। एंड्रीवा का इस पूरे टूर्नामेंट में प्रदर्शन बेहद असाधारण रहा था। फाइनल से पहले खेले गए अपने पिछले तीन मुकाबलों में उन्होंने केवल 12 गेम गंवाए थे। बेहद शांत और परिपक्व खेल शैली का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की।
ऐसा रहा चैंपियन बनने तक का सफर
यह खिताबी जीत रूसी खिलाड़ी के अंतरराष्ट्रीय टेनिस पटल पर तेजी से हुए विस्तार को दिखाती है। इससे पहले साल 2024 में एंड्रीवा ने महज 17 साल की उम्र में फ्रेंच ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचकर सबको चौंका दिया था। पिछले दो वर्षों में उन्होंने अपने खेल में लगातार सुधार किया और आज वे डब्ल्यूटीए (WTA) टूर की सबसे खतरनाक खिलाड़ियों में से एक बन चुकी हैं।
माजा च्वॉलिंस्का का ऐतिहासिक सपना टूटा
दूसरी ओर पोलैंड की माजा च्वॉलिंस्का का इस टूर्नामेंट में चला आ रहा शानदार सफर उपविजेता के रूप में समाप्त हुआ। च्वॉलिंस्का इस फाइनल में पहुंचकर इतिहास की पहली ऐसी 'क्वालीफायर' खिलाड़ी बनने की दहलीज पर थीं, जो महिला सिंगल्स का ग्रैंड स्लैम खिताब जीत सकती थी, लेकिन वे इतिहास रचने से चूक गईं।















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