Yusuf Pathan: 'पूरी तरह बकवास, क्यों भड़के युसूफ पठान? बहरामपुर सीट से चुनाव लड़ना चाहती हैं ममता बनर्जी?
Yusuf Pathan: तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर युसूफ पठान ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के कहने पर सौरव गांगुली ने उनसे लोकसभा सीट से इस्तीफा देने को कहा था। पठान ने इन रिपोर्टों को "पूरी तरह झूठा" और "निराधार" बताया।
दरअसल एक अखबार की छपी खबर में दावा किया गया था कि ममता बनर्जी ने उनसे बहरामपुर लोकसभा छोड़ने को कहा है क्योंकि वो वहां से चुनाव लड़ना चाहती हैं, अब वो केंद्र की राजनीति में सक्रिय होना चाहती हैं। युसूफ पठान ने बहरामपुर लोकसभा सीट छोड़ने की खबरों को झूठ बताया।ममता बनर्जी ने उनसे सीट नहीं मांगी है।

उन्होंने खुद वीडियो जारी कर यह सफाई दी है। पठान ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है। रिपोर्ट में सौरव गांगुली का नाम भी आया था। कहा गया था कि उन्होंने पठान को मनाया है। गांगुली ने इन आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने किसी से कोई राजनीतिक बातचीत नहीं की है।
यूसुफ पठान ने बताई पूरी सच्चाई
यूसुफ पठान ने वीडियो संदेश में पूरी सच्चाई बताई। उन्होंने कहा कि ममता से ऐसी बात नहीं हुई। उनकी आखिरी मुलाकात में भी चर्चा नहीं हुई थी। बिना पुष्टि के यह खबर सोशल मीडिया पर फैली। उन्होंने कहा कि सीट छोड़ने की बात केवल झूठ है। यह सब कुछ सिर्फ एक अफवाह मात्र है।
कौन हैं यूसुफ पठान?
यूसुफ पठान भारत के पूर्व विस्फोटक ऑलराउंडर हैं। उनका जन्म 17 नवंबर 1982 को गुजरात के वडोदरा में हुआ था। वे अपने आक्रामक बल्लेबाजी अंदाज और उपयोगी ऑफ स्पिन गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। यूसुफ पठान ने 2001/02 में फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में दाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ-ब्रेक गेंदबाज के तौर पर डेब्यू किया था। उनके छोटे भाई, इरफान पठान भी भारतीय क्रिकेटर थे। पठान ने फरवरी 2021 में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लिया। वह उस भारतीय टीम का हिस्सा थे जिसने 2007 T20 वर्ल्ड कप और 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप, दोनों जीते थे।

बहरामपुर सीट से सांसद हैं यूसुफ पठान
यूसुफ पठान ने 2024 के भारतीय आम चुनाव में बहरामपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी को 85,022 वोटों के अंतर से हराया।
बहरामपुर लोकसभा सीट की खासियत
25 साल तक कांग्रेस का किला रही बहरामपुर सीट आज भी बंगाल की राजनीति का पावर सेंटर मानी जाती है। बहरामपुर लंबे समय तक अधीर रंजन चौधरी का अभेद्य किला मानी जाती थी। उन्होंने 1999 से लगातार पांच बार यहां से लोकसभा चुनाव जीता था। यही वजह है कि 2024 में यूसुफ पठान की जीत को बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा गया। यह सीट पूरी तरह मुर्शिदाबाद जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर बनी है। मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल का एक महत्वपूर्ण जिला है, जहां सामाजिक और धार्मिक समीकरण चुनावी नतीजों पर बड़ा असर डालते हैं।














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