कौन हैं फहमीदा हसन, जिन्होंने कहा- PM आवास के सामने पढ़ूंगी हनुमान चालीसा और नमाज, अगर...
फहमीदा हसन खान ने गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के सामने हर धर्म की प्रार्थना पढ़ने की इजाजत दी जाए।
मुंबई, 25 अप्रैल: महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा को लेकर गर्माई राजनीति के बीच अब एक नया मोड़ आ गया है। दरअसल फहमीदा हसन खान नाम की एनसीपी नेता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक चिट्ठी लिखी है और मांग की है कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के सामने हर धर्म की प्रार्थना पढ़ने की इजाजत दी जाए। फहमीदा हसन ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि अगर ऐसा करने से देश को महंगाई, बेरोजगारी और भुखमरी से मुक्ति मिलती है, तो वो ये सब करना चाहेंगी। आइए जानते हैं कि कौन हैं फहमीदा हसन खान, जिन्होंने ये मांग की है।
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कौन हैं फहमीदा हसन खान
फहमीदा हसन खान महाराष्ट्र में शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी की मुंबई के उत्तरी जिले की कार्यकारी अध्यक्ष हैं। मुंबई के कांदिवली इलाके में रहने वालीं फहमीदा हसन के फेसबुक पेज पर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले के साथ उनकी कई तस्वीरें हैं। गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखने के बाद फहमीदा हसन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि नवनीत राणा को एक सांसद होने के नाते महंगाई, बेरोजगारी और जनता से जुड़े दूसरे मुद्दों को उठाना चाहिए। फहमीदा ने कहा कि अगर धार्मिक एजेंडे से देश के विकास में मदद मिलती है तो वो हर धर्म की प्रार्थना का पाठ पीएम आवास के बाहर करना चाहेंगी।

कैसे शुरू हुआ हनुमान चालीसा विवाद
महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ, जब अमरावती सीट से लोकसभा सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा ने ऐलान किया कि वो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के घर के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। इसके बाद बड़ी संख्या में पहुंचे शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने उनके घर के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया और शाम को नवनीत राणा ने कहा कि पीएम मोदी के कार्यक्रम की वजह से वो सीएम उद्धव के घर के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने के अपने ऐलान को वापस ले रही हैं। हालांकि शाम को ही पुलिस ने नवनीत राणा और उनके पति को धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और रविवार को कोर्ट ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

विवाद पर शिवसेना ने क्या कहा?
हनुमान चालीसा पर उठे विवाद को लेकर शिवसेना के मुखपत्र सामना में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा गया। अपने संपादकीय में सामना ने लिखा, 'नवनीत राणा और उनके पति राष्ट्रीय स्तर पर हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें सीएम उद्धव के आवास के बजाय, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर हनुमान चालीसा पढ़नी चाहिए। हमारे राज्य में हनुमान चालीसा पढ़ने पर कोई बैन नहीं लगा है, तो फिर क्यों नवनीत राणा और उनके पति मातोश्री के सामने ही हनुमान चालीसा पढ़ना चाहते हैं। इस सबके पीछे भारतीय जनता पार्टी का हताशा से भरा हुआ दिमाग है।'

नवनीत राणा ने लगाए गंभीर आरोप
वहीं, नवनीत राणा ने सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखते हुए कहा कि एक दलित होने की वजह से उन्हें पुलिस थाने में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं दी गईं। नवनीत राणा ने अपनी चिट्ठी में लिखा, 'पुलिस हिरासत में मैंने पीने के लिए पानी मांगा, लेकिन मुझसे कहा गया कि आप दलित हैं, इसलिए हम अपने ग्लास में पानी नहीं पीने देंगे। इसके अलावा इसी वजह से मुझे बाथरूम तक इस्तेमाल नहीं करने दिया गया।'
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मामले पर भाजपा ने उद्धव सरकार को घेरा
हनुमान चालीसा को लेकर उठे विवाद के बीच सोमवार को उद्धव सरकार की तरफ से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विधानसभा में नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस शामिल नहीं हुए। देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, 'राज्य की उद्धव ठाकरे सरकार का बर्ताव हिटलर की तरह है और ऐसे हालात में हमने संवाद के बजाय सड़क पर अपनी लड़ाई लड़ने का फैसला लिया है। अगर हनुमान चालीसा महाराष्ट्र में नहीं पढ़ी जाएगी तो क्या पाकिस्तान में पढ़ी जाएगी? अगर हनुमान चालीसा पढ़ने पर नवनीत राणा और उनके पति पर देशद्रोह का चार्ज लगाया जाएगा तो फिर हम सभी हनुमान चालीसा पढ़ेंगे और सरकार में अगर हिम्मत है तो हमारे ऊपर देशद्रोह का चार्ज लगाएं।'












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