राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के तीन जज कौन-कौन हैं?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए शुक्रवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। मोदी सरनेम मामले में सुनाई गई दो साल की सजा पर आज सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी।कोर्ट ने कहा कि जब तक अपील लंबित है, तब तक सजा पर अंतरिम रोक रहेगी।
राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस संजय कुमार की बेंच सुनवाई कर रही थी। राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने वाले इन तीनों जजों को लेकर लोगों में काफी दिलचस्पी देखी जा रही है।

जस्टिस बीआर गवई
62 साल के जस्टिस गवई का पूरा नाम भूषण रामकृष्ण गवई है। मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज हैं। जस्टिस गवई बॉम्बे हाईकोर्ट से पदोन्नत होकर सुप्रीम कोर्ट आए हैं। उन्होंने 24 मई, 2019 को कार्यभार संभाला था, जबकि वह 23 नवंबर, 2025 को रिटायर होंगे।
जस्टिस गवई ने 1985 में एक वकील के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराया और मुख्य रूप से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने एक सरकारी वकील और फिर महाराष्ट्र सरकार के लिए सरकारी अभियोजक के रूप में कार्य किया।
वह 14 नवंबर, 2003 में बॉम्बे हाईकोर्ट में नियुक्त किए गए थे और उन्होंने वहां पर 16 सालों तक काम किया।न्यायमूर्ति बी.आर. गवई को तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के नामांकन के बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया।
जस्टिस संजय कुमार
सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज संजय सिंह का पूरा नाम पुलिगोरु वेंकट संजय कुमार है। वह मणिपुर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। उन्होंने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय और तेलंगाना उच्च न्यायालय में भी न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है।
हैदराबाद में जन्मे संजय कुमार ने 1988 में हैदराबाद के निज़ाम कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक और दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई की और अगस्त 1988 में बार काउंसिल ऑफ आंध्र प्रदेश में रजिस्ट्रेशन कराया। संजय कुमार के पिता पी.रामचंद्र रेड्डी आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व महाधिवक्ता थे।
उन्होंने 2000 से 2003 तक आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में सरकारी वकील के रूप में कार्य किया है। उन्हें 8 अगस्त 2008 को तेलंगाना उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था और 20 जनवरी 2010 को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया था। जिसके बाद उन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया। उन्हें 12 फरवरी 2021 को मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा
जस्टिस पीएस नरसिम्हा सुप्रीम कोर्ट के ऐसे जज के तौर पर जाना जाता है, जिन्हें सीधे बार से नियुक्त किया गया है। पीएस नरसिम्हा तीसरे ऐसे शख्स होंगे जो बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट के जज बने और फिर चीफ जस्टिस बनेंगे। उनका सुप्रीम कोर्ट में कार्यकाल 2027 तक है।
जस्टिस नरसिम्हा का पालन-पोषण हैदराबाद में हुआ। उन्होंने हैदराबाद के निज़ाम कॉलेज से स्नातक किया।1988 में लॉ में ग्रेजुएट होने के बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में प्रेक्टिस शुरू की। इसके बाद नरसिम्हा सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने के लिए नई दिल्ली चले आए। उनके पिता के रामय्या भी एक न्यायाधीश थे।
अगस्त 2021 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी। इन्हीं जजों में एक हैं जस्टिस पीएस नरसिम्हा। पीएस नरसिम्हा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनने से पहले भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं। वरिष्ठ वकील होने के चलते पीएस नरसिम्हा ने सुप्रीम कोर्ट में कई अहम मामलों की वकालत की है। इनमें अयोध्या केस और बीसीसीआई केस भी शामिल है।
पीएस नरसिम्हा को सुप्रीम कोर्ट की ओर से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में रिफॉर्म लागू करने के लिए गठत एमिकस क्यूरी का सदस्य भी बनाया गया था। पीएस नरसिम्हा ने इतालवी मरीन केस में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की वकालत की थी। उन्हें 2014 में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था। 2018 में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया था।












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