दिल्ली के बाद कहां जाएगा चिपको, चूमो अभियान?
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। राजधानी दिल्ली तक चुम्बन अभियान पहुंच गया। इसकी शुरूआत कोच्चि से हुई थी। यह कोलकाता में भी देखा गया। अब हर कोई सोच रहा है कि हमारे शहर में चिपको, चूमो अभयान कब चलाया जायेगा? इस सोच के पीछे दो प्रकार की मंशाएं भी हैं। पहली- चलो हमें भी खुलेआम किसी को चूमने का मौका मिलेगा, दूसरी कहीं यह अभियान मेरे शहर की संस्कृति को खराब न कर दे...

कोच्चि के एक कैफे में युवक युवतियों को चुम्बन के साथ सेक्स के पूर्व की सारी क्रियाओं को अंजाम देते एक स्थानीय टीवी चैनल ने दिखाया। उसकी प्रतिक्रिया में कुछ लोगों ने कैफे में विरोध प्रकट किया। कहा जाता है कि विरोध करने वाले उग्र थे। इसे कुछ लोगों ने एक संगठन परिवार की करतूत बताकर इसके विरोध में किसींग अभियान का ऐलान कर दिया। जिस संगठन का नाम लिया जा रहा है उसके कुछ घटकों ने बयान देकर साफ कर दिया कि वे किसींग अभियान का विरोध नहीं करेंगे। बावजूद इसके यदि ऐसा करने वाले उस संगठन का नाम लेकर सड़कों पर गले मिलो, चिपको, चूमो....आयोजित कर रहे हैं तो इसका तार्किक कारण तलाशना मुश्किल है।
पार्को में अश्लीलता
चुम्बन अभियान पर वरिष्ठ लेखक अवधेश कुमार कहते हैं कि चुम्बन या प्रेमालाप की परस्पर अभिव्यक्ति के विरुद्ध होने का कोई तार्किक कारण नहीं होना चाहिए, पर क्या इस तरह सड़कों पर सही है? अवधेश कुमार ने कहा कि अगर कोई ऐसी स्थिति पर उतारु हो जाए तो आप क्या कर सकते हैं? ऐसे मामले आए हैं जब न्यायालय ने ही पार्कों में चुम्बन को अश्लीलता नहीं माना है। जो इसके विरोध में गाली गलौज पर उतर आए हैं, या जो इसका उग्र विरोध कर रहे हैं। उनका आक्रोश स्वाभाविक है, पर इससे कोई समाधान नहीं निकलने वाला। आज कौन सा पार्क होगा जहां ऐसा नहीं दिखता है?
मोटरसाइकिलों की आज की बनावट भी ऐसी है कि पीछे बैठी लड़कियां एकदम चिपकी बैठी रहती है, उसमें कुछ और भी होता रहता है। यह भी सड़क पर ही होता है। तो यह परिवेश का अंग होता जा रहा है।
अपने आप चुम्बन बिल्कुल निर्दोष, निष्पाप, क्रिया है। लेकिन चुम्बन का अर्थ उसके तरीके, स्थान, परिस्थितियां और अलग-अलग पात्रों के संदर्भ में बदल जाता है। चुम्बन के तरीके भी बदल गए हैं। इसलिए इसे रोकने की इच्छा रखने वाले समाज को गहराई से विचार करना होगा।












Click it and Unblock the Notifications