मां सोनिया के लिए ड्राइवर बने राहुल को जीत का पूरा भरोसा
रायबरेली। अक्सर चुनावी सभाओं और रैलियों में भाषण देते नजर आते कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी को तो सभी लोगों ने देखा है लेकिन जब 43 वर्षीय राहुल अपनी मां सोनिया गांधी के ड्राइवर बनकर उनके साथ रायबरेली पहुंचे तो शायद यह पहला मौका था जब उनका यह रूप जनता को नजर आया।
रायबरेली और अमेठी दोनों ही गांधी परिवार के अहम गढ़ रहे हैं और सोनिया गांधी चौथी बार लोकसभा का चुनाव लड़ने जा रही हैं। सभी को उम्मीद है कि गांधी परिवार के रायबरेली और अमेठी के किलों को गिराना किसी के लिए भी एक कठिन चुनौती है।
सोनिया गांधी सुबह करीब 11:30 बजे राहुल के साथ रायबरेली पहुंची। यहां पर नामांकन से पहले उन्होंने पूजा की और फिर आगे बढ़ीं। सफेद एसयूवी जिसका स्टेयरिंग राहुल गांधी के हाथ में था और कहीं न कहीं यह कांग्रेस में आने वाले दिनों में राहुल की भूमिका को भी बयां कर रहा था।
रायबरेली की गलियों से होती हुई यह एसयूवी कलेक्टर के ऑफिस पहुंची जहां पर सोनिया गांधी ने अपना नामांकन दाखिल किया। जहां कहीं भी यह गाड़ी रुकती वहां पर फूलों से सोनिया गांधी का स्वागत किया और साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा गया कि सुरक्षा में कोई चूक न होने पाए।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वर्ष 1960 और वर्ष 1980 में लोकसभा का चुनाव जीता था तो वहीं उनके पति फिरोज गांधी वर्ष 1950 में इस सीट पर विजयी होकर संसद पहुंचे थे। सोनिया गांधी ने वर्ष 1999 में अमेठी से पहली बार चुनाव लड़ा था और उसके बाद अपने बेटे राहुल गांधी के लिए वर्ष 2004 में यह सीट छोड़ दी थी। साल 2004 में वह रायबरेली आ गईं रही हैं और यह तीसरा मौका है जब वह रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी।
जहां राहुल गांधी नामांकन के दौरान अपनी मां के साथ मौजूद रहे तो वहीं लोगों को यह देखकर हैरानी हुई कि प्रियंका अपनी मां के साथ नहीं थीं लेकिन सूत्रों की मानें तो रायबरेली में अपनी मां के लिए चुनाव प्रचार का जिम्मा प्रियंका के कंधों पर होगा। रायबरेली से बीजेपी ने अजय अग्रवाल को लोकसभा का टिकट दिया है। पहले चर्चा थी कि यहां से उमा भारती सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव में खड़ी हो सकती हैं।

तुझे सब है पता मेरी मां
जिस समय राहुल गांधी को कांग्रेस के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गर्इ थी उस समय उनका बयान, 'मेरी मां मेरे पास आई और रोई,' चर्चा का विषय बन गया था।

राहुल को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी
जानकार मानते हैं कि अगर चुनावों के बाद कांग्रेस पार्टी सत्ता में आई तो निर्विवाद रूप से राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी दी जाएगी। जिस तरह से राहुल का कद पिछले एक साल में बढ़ा है उससे इशारा साफ है।

सुरक्षा के साये में गांधी परिवार
राहुल और सोनिया के साथ रायबरेली सुरक्षा का घेरा हर पल मौजूद था। सुरक्षाकर्मियों और कुछ नेताओं के अलावा किसी को भी उनके आस-पास फटकने की इजाजत नहीं थी।

बढ़ती जा रही लोकप्रियता
भले ही बीजेपी को उत्तर प्रदेश में इस बार फायदा मिले लेकिन रायबरेली में गांधी परिवार की लोकप्रियता पर कोई आंच नहीं आएगी। विशेषज्ञों के मुताबिक चुनावों में इस बार भी सोनिया गांधी का पलड़ा भारी है।

उमड़ा लोगों का हुजूम
सोनिया गांधी जब रायबरेली पहुंची तो नामांकन दाखिल करने तक के रास्ते में लोगों का हुजूम उनका स्वागत करने के लिए मौजूद था।

फूलों से किया लोगों ने स्वागत
सोनिया गांधी जहां भी गई लोगों ने फूल बरसाकर सोनिया गांधी का स्वागत किया।

राहुल, सोनिया के चेहरे पर जीत की उम्मीद
नामांकन के बाद जब सोनिया और राहुल मीडिया को संबोधित करने के लिए आए तो उनके चेहरे की मुस्कान देखकर साफ पता चल रहा था कि इस बार भी चुनावों में वह अपनी जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं।












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