MP News: टीईटी अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार की पुनर्विचार याचिका, शिक्षकों को राहत की उम्मीद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार ने सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य बनाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है। इस कदम का उद्देश्य शिक्षकों के हितों की रक्षा करना और आगे की कानूनी स्पष्टता की प्रतीक्षा करते हुए राहत प्रदान करना है।
मध्यप्रदेश के शिक्षकों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य बनाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ 17 अप्रैल को पुनर्विचार याचिका दायर की है। इस फैसले से प्रदेश के लाखों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को अपने एक निर्णय में सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य बताया था। आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 1 सितंबर 2025 को पांच वर्ष से अधिक शेष है और जिन्होंने पात्रता परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें परीक्षा में शामिल होना होगा। वहीं, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से कम शेष है, उन्हें पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा, अन्यथा वे प्रमोशन के पात्र नहीं होंगे।
इस निर्णय के बाद प्रदेश में शिक्षक संगठनों ने अपनी चिंता जाहिर की थी और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तब शिक्षकों को आश्वासन दिया था कि सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
राज्य सरकार के इस कदम का शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है। माना जा रहा है कि पुनर्विचार याचिका के माध्यम से सरकार शिक्षकों को राहत दिलाने की दिशा में प्रयास कर रही है।












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