अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारों का क्या है सच?

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी
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  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 'जनाज़े की नमाज़' पर छात्रों के बीच झगड़े
  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मोहम्मद अली की जिन्ना की तस्वीर पर बवाल
  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर रखने की मांग
  • क्या एएमयू की मुस्लिम पहचान ख़त्म हो जाएगी?

बीते कुछ महीनों में बीबीसी की वेबसाइट पर ही आपने ये ख़बरें पढ़ी होंगी. सारी ख़बरें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जुड़ी हुई थीं. ख़बरों के विषय अलग-अलग थे लेकिन इन सारी ख़बरों में कुछ कॉमन था- 'झगड़ा-बवाल-अस्तित्व पर सवाल'.

ख़बर एकबार फिर बवाल की ही है लेकिन हर बार की तरह मसला थोड़ा अलग है.

मंगलवार को किस बात पर भड़क उठी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी?

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के 14 छात्रों पर राष्ट्रद्रोह का आरोप है. स्थानीय बीजेपी नेता ने सिविल लाइन पुलिस स्टेशन में तहरीर दी है कि इन 14 छात्रों ने हिंसा भड़काई, जान से मारने की कोशिश की और देश विरोधी नारे लगाए.

पुलिस के मुताबिक़ इन छात्रों ने रिपब्लिक टीवी के दो पत्रकारों के साथ भी हाथापाई की. बीजेपी नेता के अलावा संबंधित टीवी चैनल की महिला पत्रकारों ने भी छात्रों पर डराने-धमकाने के आरोप लगाए हैं और शिकायत दर्ज कराई है.

एसएसपी अलीगढ़ की ओर से भी राष्ट्रद्रोह और हत्या के प्रयास में यूनिवर्सिटी के छात्रों पर आरोप की बात स्वीकार की है. हालांकि अभी तक कोई आरोप साबित नहीं हुआ है और पुलिस जांच कर रही है.

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जबकि यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष सलमान इम्तियाज़ इन सारी बातों से उलट पूरे वाकये का एक दूसरा ही 'एंगल' बताते हैं.

सलमान बताते हैं "12 फ़रवरी यानी मंगलवार को यूनिवर्सिटी में एक सामान्य परिचर्चा का कार्यक्रम था. जिसमें कुछ राष्ट्रीय स्तर के नेता भी आने वाले थे. उसी दौरान रिपब्लिक चैनल की एक महिला पत्रकार का फ़ोन आया कि हम इस इवेंट को कवर करना चाहते हैं और आप लोगों से बात करना चाहते हैं."

सलमान के मुताबिक़ हालाँकि पत्रकारों के पास प्रॉक्टर से कोई लिखित अनुमति नहीं थी, लेकिन "हमने उन्हें कहा कि आप आ जाएं, हम लोग बात कर लेंगे."

"आतंकवादियों को जन्म देने वाली यूनिवर्सिटी"

सलमान कहते हैं, "हम लोगों ने बात कर ली लेकिन इसके बाद भी वो वापस नहीं गईं और जहां हमारा कार्यक्रम होने वाला था वहां खड़े होकर कहने लगे कि आज हम उस सरज़मीन पर खड़े हैं जहां आतंकवादी पलते हैं."

वो कहते हैं उनके ऐसा कहने पर छात्र नाराज़ हो गए और उन्होंने इसके बाद सिक्योरिटी ऑफ़िसर को बुला लिया. जिसके बाद उन महिला पत्रकारों को सिक्योरिटी ऑफ़िसर ने बाहर चले जाने को कहा. जिसके बाद पत्रकारों ने धमकियां देना शुरू कर दिया और थोड़ी देर बाद भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के अध्यक्ष मुकेश लोधी आ गए.

बीबीसी हिंदी ने रिपब्लिक टीवी की इन दो महिला पत्रकारों से संपर्क करके उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका. हालांकि रिपब्लिक भारत पर प्रकाशित एक ख़बर ये दावा करती है कि एएमयू कैंपस में रिपब्लिक टीवी की महिला रिपोर्टर के साथ बदसलूकी हुई. उन पर हमला किया गया और उनके कैमरे तोड़ दिये गए.

मुकेश लोधी का पक्ष

सलमान के लगाए आरोपों पर मुकेश लोधी कहते हैं, "मैं जानबूझकर वहां नहीं पहुंचा था, मैं तो जोधपुर से लौट रहा था, रास्ते में कलेक्ट्रेट पड़ता है और एएमयू सर्किल बीच में है."

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वो बताते हैं, "वहां कुछ पत्रकार लहू-लुहान हालत में खड़े थे. उनके कैमरे टूटे हुए थे और एएमयू के कुछ छात्र और छात्र संघ के पदाधिकारी पाकिस्तान ज़िंदाबाद और हिंदुस्तान मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे. वहां कुछ हिंदू छात्र भी थे, जिन्हें वो लोग मार रहे थे."

लोधी का कहना है कि जब वो वहां पहुंचे तो हज़ारों की संख्या में एएमयू के छात्रों ने उन पर हमला बोल दिया और उन पर फ़ायरिंग भी की. उनका दावा है कि उनके पास पूरी घटना का वीडियो भी है, जिसमें साफ़ दिखाई दे रहा है कि उनकी गाड़ी पर एक गोली लगी और एक उनके क़रीब से गुज़र गई.

लेकिन अलीगढ़ के एसएसपी आकाश कुलहरि फ़िलहाल किसी भी तरह के सबूत से इनकार कर रहे हैं.

इस पूरे मामले पर कुलहरि ने कहा, "यूनिवर्सिटी में छात्रों के बीच मारपीट हो गई थी जिसके बाद अजय सिंह नाम के एक छात्र शिकायत करने प्रॉक्टर के पास गए लेकिन प्रॉक्टर से मुलाक़ात नहीं हो सकी. जिसके बाद दूसरा पक्ष भी आ गया और वहां दोनों पक्षों के बीच वाद-विवाद बढ़ गया."

जिसके बाद अजय सिंह ने यूनिवर्सिटी के बाबा सैय्यद गेट पर धरना देना शुरू कर दिया, लेकिन बाद में गेट के पास ही मौजूद पुलिस के समझाने पर वो वहां से जाने लगे तो क़रीब 200-300 यूनियन के छात्रों ने वहां हमला कर दिया.

हालांकि एसएसपी कार्यालय की ओर से मुकेश लोधी के वहां मौजूद होने की बात भी स्वीकार की गई है.

लेकिन राष्ट्रद्रोह का मुक़दमा क्यों ?

एसएसपी कहते हैं कि सबसे पहले तो ये समझना ज़रूरी है कि फ़िलहाल तहरीर के आधार पर एफ़आईर दर्ज कर ली गई है, लेकिन तहरीर में जो राष्ट्रद्रोह के आरोप लगाए गए हैं, उनकी जाँच चल रही है और तभी उन धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा.

एसएसपी कहते हैं, "हम अभी सुबूतों की जांच कर रहे हैं लेकिन अभी तक ऐसा कोई सुबूत सामने नहीं आया है जिससे राष्ट्रद्रोह की पुष्टि हो सके. हम अभी आगे जांच कर रहे हैं और जिन आरोपों के सबूत मिलेगें उन्हें रखा जाएगा और जिनके सबूत नहीं मिलेंगे उन्हें हटा दिया जाएगा."

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एसएसपी अलीगढ़ ने इस बात की भी पुष्टि की है कि रिपब्लिक टीवी की महिला पत्रकारों ने भी इन छात्रों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है. इसके अलावा सिक्योरिटी ऑफिसर पर अभद्रता करने का भी आरोप है.

'हम भारत मुर्दाबाद के नारे क्यों लगाएंगे'?

विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष फैज़ुल हसन का नाम भी 'राष्ट्रद्रोह करने वालों' की लिस्ट में है.

बीबीसी ने जब उनसे राष्ट्रद्रोह के नारे का सच जानना चाहा तो फ़ैज़ुल का जवाब था, "हम भारत में रहते हैं, हम ऐसे नारे क्यों लगाएंगे."

वो कहते हैं "हम हिंदोस्तान में रहते हैं हमें पाकिस्तान से क्या मतलब. हमें पाकिस्तान से कोई मुहब्बत नहीं है. हम जय हिंद के नारे के साथ बात शुरू करते हैं और जय हिंद के नारे के साथ ही बात ख़त्म करते हैं. हमारी देशभक्ति पर कोई सवाल ही नहीं खड़ा कर सकता."

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