क्या है Patra Chawl मामला ? संजय राउत से 1,000 करोड़ से ज्यादा के घोटाले में पूछताछ करेगी ED

मुंबई, 27 जून: शिवसेना के मुखर प्रवक्ता और सांसद संजय राउत को कल मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होना है। यह मामला एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के जमीन घोटाले का है, जिसमें उनसे जुड़ी कुछ संपत्तियों को पहले ही ईडी जब्त भी कर चुकी है। मामला 14 साल पुराना है, जिसके चलते सैकड़ों परिवार अबतक भटकने को मजबूर हैं क्योंकि नया बनाकर देने के वादे के साथ जो घर खाली कराया गया था, वह उन्हें अभी तक नहीं मिल पाया है। आइए जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है ? और संजय राउत इसमें कैसे फंस चुके हैं ?

संजय राउत को पात्रा चॉल मामले में देना है जवाब

संजय राउत को पात्रा चॉल मामले में देना है जवाब

28 जून यानी मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय ने शिवसेना सांसद संजय राउत को मुंबई के गोरेगांव इलाके में एक चॉल के पुनर्विकास परियोजना से संबंधित अनियमितताओं के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया है। यह प्रोजेक्ट क्या था? इसमें क्या घोटाला हुआ और इसमें संजय राउत का नाम क्यों आया? यह जानना जरूरी है। यह घोटाला मुंबई के उपनगरीय इलाके गोरेगांव के सिद्धार्थ नगर का है जो पात्रा चॉल के नाम से लोकप्रिय है। यह 47 एकड़ में फैला है, जिसमें कुल 672 घर हैं। इसी के पुनर्विकास परियोजना में धांधली के मामले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय के हाथों में है।

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    Maharashtra: Money Laundering Case में Sanjay Raut को ED का समन, कल पेशी | वनइंडिया हिंदी | *News
    14 साल भी 672 परिवारों को नहीं मिला उनका घर

    14 साल भी 672 परिवारों को नहीं मिला उनका घर

    2008 में महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएचएडीए) ने इस पुनर्विकास परियोजना को अपने हाथों में लिया था और यहां रहने वाले 672 किरायेदारों के पुनर्वास का ठेका गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (जीएसीपीएल) नाम की एक निजी कंपनी को दे दिया था। इसे इलाके को भी फिर से विकसित करना था। पात्रा चॉल के पुनर्विकास के लिए कंपनी, एमएचएडीए और किरायेदारों की सोसाइटी के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ था। लेकिन, 14 साल बाद भी लोग अपने घरों के वापस मिलने का इंतजार ही कर रहे हैं।

    1,000 करोड रुपए का पात्रा चॉल घोटाला क्या है ?

    1,000 करोड रुपए का पात्रा चॉल घोटाला क्या है ?

    त्रिपक्षीय समझौते के तहत जीएसीपीएल को पात्रा चॉल के 672 किरायेदारों को फ्लैट उपलब्ध करवाने थे, एमएचएडीए को भी फ्लैट विकसित करके देने थे और बाकी बची जमीन को प्राइवेट डेवलपर्स को बेचना था। प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि संजय राउत के करीबी प्रवीण राउत और गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के बाकी डायरेक्टरों ने एमएचएडीए को झांसा देकर 9 प्राइवेट डेलवपरों से 901.79 करोड़ रुपये लेकर उन्हें फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) बेच दिया। यह उतनी जमीन होती है, जिसमें बिल्डर निर्माण कर सकते हैं। जबकि, उसने ना तो 672 विस्थापित किरायेदारों के लिए निर्माण का काम पूरा किया और ना ही एमएचएडीए का ही हिस्सा तैयार करके दिया। इतना ही नहीं जीएसीपीएल ने मीडोज के नाम से एक प्रोजेक्ट लॉन्च किया और फ्लैट खरीदारों से बुकिंग की रकम के तौर पर 138 करोड़ रुपये अलग से भी जुटा लिए। ईडी का आरोप है कि इस तरह से इस घोटाले के जरिए गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन लिमिटेड ने गैर-कानूनी तरीके से 1,039.79 करोड़ रुपए जमा किए।

    ईडी को जांच में क्या मिला है ?

    ईडी को जांच में क्या मिला है ?

    प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि प्रवीण राउत को रियल एस्टेट कंपनी एचडीआईएल (यह जीएसीपीएल की ही सिस्टर कंपनी है) से 100 करोड़ रुपए मिले, जिसे उन्होंने अपने 'नजदीकियों, परिवार के सदस्यों, बिजनेस सहयोगियों' को विभिन्न अकाउंट में बांट दिए, जिसमें शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत का परिवार भी शामिल है। ईडी का कहना है कि 2010 में इस गोरखधंधे से 83 लाख रुपये संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के खाते में ट्रांसफर किए गए, जिसका इस्तेमाल उन्होंने दादर में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया। ईडी का दावा है कि इसके अलावा महाराष्ट्र के अलीबाग स्थित किहिम बीच पर कम से कम 8 प्लॉट वर्षा राउत और स्वपना पाटकर के नाम से खरीदे गए।

    संजय राउत के परिवार ने घोटाले के पैसे से जुटाई संपत्ति ?

    संजय राउत के परिवार ने घोटाले के पैसे से जुटाई संपत्ति ?

    मार्च 2018 में एमएचएडीए गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इस मामले में 2020 के फरवरी में आर्थिक अपराध शाखा ने प्रवीण राउत को धर दबोचा। उसे जमानत भी मिली, लेकिन इस साल 2 फरवरी को वह प्रवर्तन निदेशालय के हत्थे फिर से चढ़ गया। ईडी ने उसके और उसके साथ सुजीत पाटकर के ठिकानों पर भी छापेमारी की थी। संजय राउत का कथित तौर पर खासमखास प्रवीण राउत का नाम पीएमसी बैंक घोटाले में भी आ चुका है। ईडी की जांच में पता चला था कि प्रवीण की पत्नी माधुरी राउत ने संजय राउत की बीवी वर्षा राउत को बिना ब्याज पर 55 लाख रुपए का लोन दिया था। राउत परिवार ने दादर में जो फ्लैट खरीदा था, उसमें भी यह पैसा इस्तेमाल होने का आरोप है।

    राउत की पत्नी से भी हो चुकी है पूछताछ

    राउत की पत्नी से भी हो चुकी है पूछताछ

    उधर सुजीत पाटकर के भी संजय राउत के साथ ताल्लुकात बताए जाते हैं। वह राउत की बेटी के साथ एक शराब ट्रेडिंग कंपनी में भी पार्टनर है। अलीबाग वाली लैंड डील को लेकर भी आशंका है कि यह उसी पात्रा चॉल घोटाले की नाजायज धन से खरीदी गई। सुजीत के खिलाफ कोविड सेंटर के ठेके को लेकर भी गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप हैं। संजय राउत को इन्हीं मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय के सामने जवाब देना है। इस मामले में ईडी उनकी पत्नी वर्षा राउत से पहले ही पूछताछ कर चुकी है। अप्रैल में उनकी और उनके करीबियों की 11.15 करोड़ रुपए से अधिक का प्रॉपर्टी भी जब्त हो चुकी है। हालांकि, राउत का आरोप है कि भाजपा के खिलाफ अभियान चलाने की वजह से उन्हें परेशान किया जा रहा है।

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