Reels के आदी सावधान! बढ़ रही ये गंभीर बीमारी, क्या आपने में तो नहीं ऐसे कोई संकेत?
Reels Side Effects: सोशल मीडिया के इस दौर में लोग अपने दिन का बड़ा हिस्सा इसी पर खर्च करते हैं। मॉर्डन लाइफस्टाइल में सोशल मीडिया काफी जगह घेर चुकी है। बच्चे हो या फिर बड़े घंटों-घंटे रील्स और सोशल मीडिया पर गुजार देते हैं। रील्स देखने की आदत लोगों को इस कदर लग चुकी है कि अगर वो इसे ना देखें तो मानों उनका दिन ही नहीं कटता। ऐसे में इसका सीधा असर लोगों की मेंटल हेल्थ पर पड़ रहा है।
ऐसे में अगर आप भी टाइम पास करने के लिए रील देखने के आदी हैं या फिर रोज की दिनचर्या में रील्स को आप शामिल कर चुके हैं तो आपकी सेहत बिगड़ सकती है, क्योंकि शायद कम ही लोग जानते होंगे इससे का बहुत बड़ा प्रभाव आपकी आंखों और दिमाग पर पड़ सकता है।

Reels की लत, बिगाड़ रही सेहत
रील्स देखने वाले शायद ये बात हल्के में लें, लेकिन रील देखना और पूरे दिन सोशल मीडिया पर गुजार देना लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रही है। इसका सबसे ज्यादा इफैक्ट आंख और दिमाग पर हो रहा है। 'reel-induced eye damage' नाम की एक बीमारी है, जो कि रील देखने वालों में लगातार घर कर रही है। ऐसे में जानिए क्या है ये बीमारी और इसके संकेतों के बारे में भी पढ़िए।
ज्यादा स्क्रीन टाइम, खास तौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील देखने से सभी ऐज ग्रुप्स में खास तौर पर बच्चों और युवाओं में आंखों की बीमारियां बढ़ रही हैं। शॉर्ट-फॉर्म वीडियो यानी Reels के मेंटल हेल्थ पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में चिंताओं के बाद डॉक्टर अब एक नए बढ़ते संकट reel induced eye damage (रील से होने वाली आंखों की क्षति) के बारे में चेतावनी दे रहे हैं।
Reels देखने वालों को डॉक्टरों ने चेताया!
जिसकी जानकारी हाल ही में यशोभूमि - इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर में एशिया पैसिफिक एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी और ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की चल रही ज्वाइंट मीटिंग के दौरान प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञों (leading ophthalmologists ) ने साझा की।
एशिया पैसिफिक एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी (APAO) 2025 कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. ललित वर्मा ने ज्यादा स्क्रीन एक्सपोजर के कारण होने वाली 'डिजिटल आई स्ट्रेन की मूक महामारी' (silent epidemic of digital eye strain) के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा, "हम ड्राई आई सिंड्रोम, मायोपिया प्रोग्रेस, आई स्ट्रेन और यहां तक कि शुरुआती दौर में ही भेंगापन के मामलों में तेज वृद्धि देख रहे हैं, खासकर उन बच्चों में जो घंटों रील देखते रहते हैं।"
20-20-20 नियम का पालन करने की सलाह
डॉक्टर ने बताया कि हाल ही में एक छात्र लगातार आंखों में जलन और धुंधली दृष्टि की शिकायत लेकर हमारे पास आया था। जांच के बाद हमने पाया कि घर पर लंबे समय तक स्क्रीन पर रील देखने के कारण उसकी आंखों से पर्याप्त आंसू नहीं निकल रहे थे। उसे तुरंत आई ड्रॉप्स दी गईं और 20-20-20 नियम का पालन करने की सलाह दी गई - हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लेकर 20 फीट दूर किसी चीज को देखना।"
कमेटी के अध्यक्ष और ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. हरबंश लाल ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझाया। डॉ. लाल ने कहा कि छोटी, आकर्षक रील लंबे समय तक ध्यान खींचने और बनाए रखने के लिए डिजाइन की गई हैं। उन्होंने कहा, "स्क्रीन पर लगातार फोकस करने से पलकें झपकने की दर 50% कम हो जाती है, जिससे ड्राई-आई सिंड्रोम और एकोमोडेशन स्पाज्म (निकट और दूर की वस्तुओं के बीच फोकस बदलने में कठिनाई) की समस्या हो सकती है।"
ये हैं अंधेपन का सबसे आम कारण
डॉ. लाल ने आगे कहा कि जो बच्चे रोजाना घंटों रील से चिपके रहते हैं, उनमें शुरुआती मायोपिया विकसित होने का जोखिम होता है, जो पहले से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है। वयस्कों को भी नीली रोशनी (blue light) के संपर्क में आने से अक्सर सिरदर्द, माइग्रेन और नींद संबंधी विकार हो रहे हैं। हाल के अध्ययनों के अनुसार 2050 तक दुनिया की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी मायोपिक होगी, जो अपरिवर्तनीय अंधेपन का सबसे आम कारण है।
डॉ. लाल ने कहा कि अब स्क्रीन टाइम बढ़ने के साथ हम 30 वर्ष की आयु तक लेंस की संख्या में उतार-चढ़ाव देख रहे हैं, जो कुछ दशक पहले 21 वर्ष था। अध्ययनों से पता चलता है कि बढ़ती संख्या में लोग, विशेष रूप से छात्र और कामकाजी पेशेवर, उच्च गति, दृष्टि उत्तेजक सामग्री के लंबे समय तक संपर्क के कारण डिजिटल आंखों के तनाव, स्क्विंटिंग और खराब दृष्टि से जूझ रहे हैं।
जानिए Reels से होने वाली बीमारी के संकेत
आंखों में सुखापन, आंखों में जलन, आंखों में थकावट, धुंधली दृष्टि होना, सिरदर्द, सुबह के समय आंखों में सूजन इस बीमारी के संकेत हैं।
आंखों की इस बीमारी से कैसे करे बचाव?
ज्यादा रील देखने के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ 20-20-20 नियम का पालन करने की सलाह देते हैं। जिसका मतलब है कि हर 20 मिनट में 20 सेकेंड के लिए फोन से 20 फीट की दूरी बनानी हैं। इसके अलावा पलक झपकाने की दर बढ़ाना, स्क्रीन देखते समय अधिक बार पलक झपकाने का सचेत प्रयास करना, स्क्रीन टाइम कम करना और नियमित स्क्रीन ब्रेक जैसे डिजिटल डिटॉक्स लेना निर्भरता को कम करने और दीर्घकालिक क्षति को रोकने में मदद कर सकता है।
कैसे करें खुद का बचाव
फोन स्क्रीन टाइम कम करें। रात के समय सोशल मीडिया से दूरी बना लें, अपनी नींद पूरी करें। आंखों को ठंडे पानी से साफ करें।
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