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GST की पूरी ABC..., महंगाई से लेकर टैक्स तक, समझें पूरा गणित

जीएसटी के तीन भाग होंगे, केंद्रीय जीएसटी ( CGST),राज्य जीएसटी (SGST) और इंटीग्रेटेड जीएसटी (IGST)

नई दिल्ली। अब आपको तमाम तरह के टैक्सों से मुक्ति मिलने वाली है, एक देश , एक टैक्स का सपना पूरा होने जा रहा है, 1 जुलाई से पूरे देश में जीएसटी लागू हो जाएगा। इन सब के बीच आपके मन में तमाम तरह के सवाल है आखिर जीएसटी है क्या? अब किस तरीके से टैक्स का निर्धारण होगा? जीएसटी से क्या फायदा और क्या नुकसान होगा। हम आपको ऐसे तमाम सवालों के जवाब देने की कोशिश करते हैं।

 क्या है जीएसटी?

क्या है जीएसटी?

जीएसटी एक अप्रत्यक्ष कर यानी इनडायरेक्ट टैक्स है। जीएसटी के तहत वस्तुओं और उत्पादों पर एक प्रकार का समान टैक्स लगाया जाता है। अगर कोई भी कंपनी हो या कारखाना । अगर अपने उत्पाद बनाकर एक राज्य से दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स चुकाने होते हैं जिससे उत्पाद की कीमत ज्यादा बढ़ जाती है। जीएसटी लागू होने से उन उत्पादों की कीमत कम हो जाएगी। एक देश, एक टैक्स का सपना पूरा होगा।

जीएसटी कैसे काम करेगा?

जीएसटी कैसे काम करेगा?

जीएसटी के तीन भाग होंगे, केंद्रीय जीएसटी ( CGST),राज्य जीएसटी (SGST) और इंटीग्रेटेड जीएसटी (IGST) केंद्रीय और इंटीग्रेटेड जीएसटी केंद्र सरकार लागू करेगी जबकि एसजीएसटी को लागू करने का अधिकार राज्य को है।

CGST, SGST और IGST कैसे लगेगा?

CGST, SGST और IGST कैसे लगेगा?

राज्य के भीतर माल बेचने पर सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स और स्टेट गूड्स एंड सर्विस टैक्स लगेगा। उदाहण के तौर पर अगर कोई बिहार का व्यक्ति बिहार में ही किसी को माल बेचता है तो उस वस्तु पर जीएसटी की रेट 18 प्रतिशत है । उस पर 9 प्रतिशत सीजीएसटी और 9 प्रतिशत एसजीएसटी लगेगा। वहीं अगर माल राज्य के बाहर के व्यक्ति को बेचा जाता है तो 18 प्रतिशत की दर से IGST भी लगेगा। एक्साइज, ड्यूटी, सर्विस टैक्स, कस्टम ड्यूटी और अन्य केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर की जगह सीजीएसटी ले लेगा। इंटरटेनमेंट टैक्स, इंट्री टैक्स, वैल्यू एडेड टैक्स की जगह एसजीएसटी ले लेगा।

 क्या है इनपुट टैक्स क्रेडिट?

क्या है इनपुट टैक्स क्रेडिट?

जीएसटी लागू होने के बाद एक स्तर पर चुकाया गया टैक्स, दूसरे स्तर पर चुकाये जाने वाले टैक्स से घटा दिया जाएगा और बिल्कुल अंत में उपभोक्ता पर ही टैक्स लगेगा। उपभोग के पहले के स्तर के टैक्स को इनपुट टैक्स कहा जाएगा और ये आगे के स्तर के लिए क्रेडिट का काम करेगा। इसको ऐसे समझा जा सकता है।कच्चे माल की कीमत है 100 रुपये है और उस पर जीएसटी की दर है 12 फीसदी, यानी उत्पादक कुल कीमत 112 रुपये अदा करना होगा।अब उत्पादक जो सामान तैयार करता है, उसकी कीमत हो जाती है 120 रुपये और इस पर जीएसटी की दर है 18 फीसदी तो ऐसे में उसे वास्तव में छह फीसदी ही टैक्स चुकाना होगा. यानी सामान की कीमत होगी 127 रुपये 20 पैसे। जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा लेने के लिए सभी का रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है।

किसको देना होगा जीएसटी?

किसको देना होगा जीएसटी?

20 लाख से ऊपर वार्षिक बिक्री वाले व्यवसाय और व्यापारियों को जीएसटी का भुगतान करना होगा। पूर्वोत्तर और विशेष श्रेणी के राज्यों के मामले में जीएसटी का भुगतान करने की सीमा 10 लाख रुपये है। वहीं अतर्राज्यीय व्यापार पर जीएसटी देना होगा।

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