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फाइनेंस बिल क्या है, लोकसभा से हुआ पास, इसके बारे में सबकुछ जानिए

लोकसभा ने वित्त विधेयक 2023 को भी हरी झंडी दे दी है। वित्त विधेयक पास होने के बाद यह कानून में तब्दील हो चुका है। वित्त विधेयक में कर प्रावधानों का पूरा ब्योरा होता है।

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लोकसभा ने शुक्रवार को वित्त विधेयक (Finance Bill) 2023 को बिना किसी चर्चा के पास कर दिया है। सदन में हंगामें के बीच वित्त विधेयक 2023 पर मुहर लगने का मतलब ये है कि सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए जो इस साल के बजट में कर प्रावधानों को सदन के सामने रखा था, वह 1 अप्रैल, 2023 से लागू हो जाएगा। गौरतलब है कि गुरुवार को ही लोकसभा ने विनियोग विधेयक को भी मंजूरी दे दी थी। आइए जानते हैं कि वित्त विधेयक का मतलब क्या है? किसी भी सरकार के लिए इसे संसद खासकर लोकसभा से पास कराना क्यों अनिवार्य है और इसमें किसी तरह की रुकावट आने के क्या परिणाम हो सकते हैं? वित्त विधेयक पारित होने का मतलब है कि अब यह वित्तीय कानून बन चुका है।

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वित्त विधेयक क्या है ?
अगर परिभाषा पर जाएं तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 110 के मुताबिक एक वित्त विधेयक एक धन विधेयक भी होता है। कौन सा विधेयक धन विधेयक है और कौन नहीं, यह फैसला करने का एकाधिकार लोकसभा स्पीकर के पास सुरक्षित होता है। जहां तक वित्त विधेयक के अर्थ की बात है तो इसका मतलब सरकार की ओर से लगाए जाने वाले नए करों, मौजूदा कर ढांचे में बदलाव या किसी कर की अवधि समाप्त होने के बाद उसे आगे भी जारी रखने के लिए संसद में प्रस्ताव के रूप में जो मसौदा पेश किया जाता है, वह वित्त विधेयक है।

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    वित्त विधेयक में कर प्रस्तावों का विस्तृत ब्योरा होता है
    वित्त विधेयक में कर संबंधित प्रस्तावों का विस्तृत ब्योरा दिया जाता है। वित्त विधेयक को भी पहले लोकसभा या निचले सदन में ही पेश किया जाता है। राज्यसभा वित्त विधेयक में बदलाव के सुझाव दे सकता है, लेकिन उसे रोकने या उसे टालने का अधिकार उसके पास नहीं है। पेश किए जाने के बाद वित्त विधेयक को संसद से 75 दिनों के भीतर पास होना आवश्यक है। जहां तक लोकसभा में पेश किए जाने की बात है तो इसके पीछे यह कारण भी है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार इसी सदन के प्रति जिम्मेदार होती है। इसलिए वित्त विधेयक भी धन विधेयक की तरह सरकार के लिए विश्वास प्रस्ताव की तरह है।

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    संविधान के अनुच्छेद 110 में क्या प्रावधान है ?
    वित्त विधेयक में कर प्रावधानों के साथ-साथ सरकार के खर्चों का ब्योरा, सरकार के उधार और राजस्व आदि की भी जानकारी रहती है। वित्त विधेयक कई प्रकार के होते हैं। अनुच्छेद 110 के मुताबिक कोई विधेयक तब धन विधेयक माना जाता है, जब उसमें:-

    1) कोई टैक्स लगाने, हटाने, छूट देने, परिवर्तन करने या विनियमित करने का प्रस्ताव होता है,

    2) पैसे उधार लेने या भारत सरकार की ओर से कोई गारंटी देने या किसी वित्तीय जिम्मेदारी को लेकर कानून में बदलाव के मामले भी वित्त विधेयक के तहत धन विधेयक होते हैं,

    3) भारत की संचित निधि या आकस्मिक निधि से भुगतान करने या पैसे निकालने से संबंधित प्रस्ताव,

    4) भारत की संचित निधि से धन का उपयोग,

    5) किसी खर्च को भारत की संचित निधि पर निर्भर खर्च घोषित करना या ऐसे किसी खर्च की राशि को बढ़ाना;

    6) भारत की संचित निधि या भारत के पब्लिक अकाउंट में धन प्राप्त करने या ऐसे धन को कस्टडी में लेने या ऐसे धन जारी करने या संघ या किसी राज्य के खातों की लेखापरीक्षा आदि

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    संविधान का अनुच्छेद 109 क्या है ?
    संविधान के अनुच्छेद 109 के तहत धन विधेयक को राज्यसभा में भेजे जाने पर उसे अनुमोदित किया जाएगा। मतलब, धन विधेयक का नाम आते ही लोकसभा की सर्वोच्चता की झलक मिलती है। जब, अनुच्छेद 111 के तहत धन विधेयक को राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा तो उसके साथ लोकसभा स्पीकर के हस्ताक्षर से यह प्रमाण पत्र संलग्न होगा कि यह एक मनी बिल है।

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