क्या होता है डिमॉनेटाइजेशन और भारत से पहले किन देशों में हुआ ऐसा फैसला
भारत से पहले फिजी, जिम्बाब्वे, सिंगापुर और फिलीपींस भी उठा चुके हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा कदम और कर चुके हैं मुद्रा को बैन।
नई दिल्ली। आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि 500 और 1000 रुपए के नोट अब चलन में नहीं रहेंगे। काले धन के खिलाफ इसे पीएम मोदी की अब तक की सबसे बड़ी लड़ाई माना जा रहा है। पीएम मोदी ने जो ऐलान किया उसे 'डिमॉनेटाइजेशन' या विमुद्रीकरण या मुद्रा को चलन से बाहर करना कहते हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत ने ही यह कदम उठाया है इससे पहले भी कुछ देश ऐसा कर चुके हैं।

क्या होता है विमुद्रीकरण
- विमुद्रीकरण वह मौद्रिक फैसला होता है जिसके तहत मुद्रा की एक इकाई को कानून के तहत अमान्य घोषित कर दिया जाता है।
- यह साधारणतय उस समय होता है जब राष्ट्रीय मुद्रा में परिवर्तन किया जाता है और पुरानी मुद्रा को नई मुद्रा से बदला जाता है।
- इस तरह के कदम उस समय उठाए गए थे जब यूरोपियन मौद्रिक संघों वाले देशों ने यूरो को अपनी मुद्रा के तौर पर अपनाया था।
- उस समय पुरानी मुद्रा को हालांकि एक समय तक यूरो में बदलने की मंजूरी दी गई थी ताकि लेन-देन में सुविधा बनी रहे।
भारत ने क्यों अपनाया
- भारत ने ब्लैक मनी और फेक करेंसी को खत्म करने के लिए इस व्यवस्था को अपनाया है।
- यह भी काफी रोचक है कि यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस तरह का कोई कदम उठाया है।
- सबसे पहले वर्ष 1946 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने विमुद्रीकरण को अपनाया था।
- उस समय आरबीआई ने 1,000 और 10,000 के नोट जारी किए थे।
- वर्ष 1954 यानी आठ वर्ष बाद में भारत सरकार ने 1,000, 5,000 और 10,000 के नए नोट जारी किए।
- इसके बाद वर्ष 1978 में मोरारजी देसाई की सरकार ने इन नोटों को चलन से बाहर कर दिया था।
इसके बाद जून 2015 में यहां के रिजर्व बैंक ने फैसला किया कि देश ने अब कई मुद्राओं वाले सिस्टम को अपना लिया है।
वर्ष 2009 में जिम्बॉव्वे ने मुद्रा को डॉलर में बदल दिया था। ऐसे में जरूरी हो गया था कि जिम्बॉव्वे की डॉलर यूनिट को कई मुद्राओं में बदला जाए।
जिम्बॉव्वे के सेंट्रल बैंक ने कहा था कि ग्राहकों को प्रोत्साहित करने और व्यापार में भरोसा बढ़ाने के लिए यह काफी अहम है।
सिंगापुर
सिंगापुर में जापानी 'बनाना' नोटों को उस समय जारी किया गया जब जापान ने इसका अधिग्रहण किया था। जापानियों के सरेंडर के बाद वर्ष 1945 में इस मुद्रा को बाहर कर दिया गया और फिर सिंगापुर मिंट को अपनाया गया।
फिजी
फिजी में 13 जनवरी 1969 को विमुद्रीकरण को अपनाया गया। यहां के रिजर्व बैंक ने उस समय कहा कि पौंड और शिलिंग को विमुद्रीकरण काफी जरूरी है क्योंकि फिजी अब नई व्यवस्था को अपना रहा है और नई मुद्रा को जारी करेगा। बैंक ने कहा था कि कि पौंड और शिलिंग की एक सीमित मात्रा ही चलन में है।
फिलीपींस
फिलीपींस के सेंट्रल बैंक ने 12 जून 1985 को नई डिजाइन वाले बैंक नोटों को चलन से बाहर करने का फैसला लिया था। इसके बाद 10 वर्षों से चलन में मौजूद मुद्रा को बंद कर दिया गया।












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