क्या ममता बनर्जी को बंगाल में जीत पर शक होने लगा है? INDIA ब्लॉक को बाहर से समर्थन की क्यों कहने लगीं बात

West Bengal Lok Sabha Election: पश्चिम बंगाल में चार चरणों के चुनाव हो चुके हैं। लेकिन, इन चार चरणों में 42 सीटों में से सिर्फ 18 सीटों पर ही मतदान हुआ है। 24 सीटों पर चुनाव होना बाकी है, जो अगले तीन चरणों में होने वाला है। उससे पहले तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी का एक बयान सुर्खियों में है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने एक तरफ तो ये कहा है कि हम विपक्षी गठबंधन इंडिया की अगुवाई करेंगे। साथ ही यह भी कह दिया है कि गठबंधन की सरकार बनी तो उसे बाहर से समर्थन देंगे। सवाल है कि जब ममता की पार्टी टीएमसी प्रदेश में बड़ी जीत के दावे कर रही है तो उसने चुनावों से पहले अपनी ही गठबंधन सरकार को बाहर से समर्थन देने की बात कहना क्यों शुरू कर दिया है।

west bengal lok sabha chunav

चुनाव में बहुत ही सतर्कता से आगे बढ़ रही हैं ममता
एक तरफ वह यह भी कह रही हैं कि दिल्ली में ऐसी सरकार बनवाएंगी जिससे बंगाल के लोगों को किसी तरह की दिक्कत न हो। लेकिन, खुद से ही उस सरकार का हिस्सा नहीं बनने का भी पहले से ही ऐलान कर रही हैं। राजनीति के जानकार मानते हैं कि ममता इस चुनाव में बहुत ही फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं।

इसे भी पढ़ें- Kashmir Lok Sabha Chunav: कश्मीर में बीजेपी किसी सीट से नहीं लड़ रही है चुनाव, फिर कैसे निभा रही अहम रोल?

एंटी-बीजेपी वोट बंटने को लेकर सावधान हैं ममता
उन्होंने पहले राज्य में कांग्रेस और लेफ्ट को खुद से दूर किया, क्योंकि किसी भी सूरत में एंटी-बीजेपी वोट को अपने पीछे जुटाए रखना चाहती हैं। इसी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए वह मतदाताओं से साफ कह रही हैं कि सिर्फ बंगाल में लेफ्ट और कांग्रेस के चक्कर में न पड़ें। लेकिन, दिल्ली में वह इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व की बात भी कह रही हैं और उसे बाहर से समर्थन देने की बात भी कहती हैं।

दरअसल, तृणमूल चीफ को मालूम है कि अगर बीजेपी-विरोधी वोट कांग्रेस और लेफ्ट के पक्ष में गए तो उनकी सियासी जमीन खिसक सकती है। क्योंकि, उन्हें पता है कि बंगाल में प्रो-मोदी वोट टस से मस होने वाला नहीं है। इसलिए, वह मोदी-विरोधी मतदाताओं को बार-बार आगाह करना चाहती हैं कि राज्य में भाजपा को रोकने का विकल्प सिर्फ टीएमसी ही हो सकती है।

कम मार्जिन वाली सीटें हैं चिंता की वजह
अभी जिन 18 सीटों पर चुनाव हुए हैं, उनमें लगभग आधे उत्तर बंगाल की हैं, जो भाजपा के गढ़ माने जाने लगे हैं। अब चुनाव कोलकाता और दक्षिण बंगाल की ओर शिफ्ट हो रहा है। बंगाल में 2019 में कुल 18 सीटों पर हार और जीत का अंतर मात्र 0.1% से लेकर 8.5% के बीच था।

पिछली बार कांग्रेस जो दो सीटें जीती भी थी, वह यही कम मार्जिन वाली सीटें थीं। बाकी 16 में से 8-8 बीजेपी और टीएमसी को मिले थे। ममता को पूरा अंदाजा है कि भ्रष्टाचार, संदेशखाली और कानून-व्यवस्था के मसले पर बीजेपी बहुत ही ज्यादा आक्रामक है। ऐसे में अगर फ्लोटिंग वोटरों का कुछ फीसदी भी इधर से उधर हुआ तो बहुत ही आसानी से बाजी पलट सकती है।

ममता इस रणनीति पर चुनाव के शुरुआत से काम कर रही हैं, जिसे अब और ज्यादा धारदार बनाने की कोशिश में हैं। इस वजह से उन्होंने राज्य में इंडिया ब्लॉक से अलग अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया और लेफ्ट और कांग्रेस पर बीजेपी के लिए काम करने का आरोप लगाती रही हैं।

कांग्रेस आलाकमान को ममता बनर्जी की इस रणनीति का पूरा अंदाजा है। लेकिन, वह किसी भी सूरत में उन्हें नाराज नहीं करना चाहती या यूं कहें कि उस स्थिति में है भी नहीं। इसलिए, चार चरण के चुनाव बीत गए, लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने वहां चुनावी रैली के लिए फटकने तक की कोशिश नहीं की। पार्टी ने सिर्फ एक तरह से 'नूरा कुश्ती' के लिए अधीर रंजन चौधरी को छोड़ रखा है, जिन्हें शायद ही ममता कभी गंभीरता से लेती हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+