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Kashmir Lok Sabha Chunav: कश्मीर में बीजेपी किसी सीट से नहीं लड़ रही है चुनाव, फिर कैसे निभा रही अहम रोल?

Kashmir Lok Sabha Election: कश्मीर घाटी में लोकसभा की तीन सीटें हैं, लेकिन बीजेपी कहीं से भी चुनाव नहीं लड़ रही है। वह सिर्फ जम्मू डिविजन की दोनों सीटें और लद्दाख में चुनाव मैदान में है। लेकिन, घाटी की तीनों सीटों पर भाजपा नदारद रहकर भी बड़ी भूमिका निभाती नजर आ रही है।

श्रीनगर में पिछले चरण में ही चुनाव हो चुके हैं। पांचवें चरण में बारामूला लोकसभा सीट पर 20 मई को मतदान होना है। यहां वैसे तो कुल 23 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) के उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन के बीच बताया जा रही है।

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इंजीनियर राशिद की उम्मीदवारी से दिलचस्प हुआ बारामूला का मुकाबला
चुनाव मैदान में पूर्व राज्यसभा सांसद फैयाज मीर भी पीडीपी की ओर से चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन तिहाड़ जेल में बंद शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद की उम्मीदवारी ने लगता है कि उनके लिए तीसरे स्थान की भी जगह नहीं रहने दी है। राशिद अवामी इत्तेहाद पार्टी से चुनाव मैदान में हैं, जिनकी वजह से यह मुकाबला आखिरी समय तक जाकर त्रिकोणीय होने की संभावना जताई जा रही है।

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बीजेपी चुनाव नहीं लड़कर भी बन गई है मुद्दा
बीजेपी कश्मीर की तीनों सीटों पर चुनाव तो नहीं लड़ रही है, लेकिन प्रमुख दलों के लिए वही बड़ा मुद्दा बनी हुई है। मतलब, वह खुद तो चुनाव मैदान में नहीं है, लेकिन बिना किसी दल का सीधे नाम लिए उसके पक्ष में सक्रियता से चुनाव प्रचार करती बताई जा रही है। भाजपा की इस कथित रणनीति ने घाटी के चुनावी मुकाबले को काफी दिलचस्प बना दिया है।

बैकडोर से गोल करना चाहती है भाजपा?
बारामूला में अल्ताफ बुखारी की जम्मू और कश्मीर अपनी पार्टी भी चुनाव नहीं लड़ रही है, लेकिन उसने सज्जाद लोन को समर्थन दिया है। नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के नेताओं की ओर से लगातार दावा किया जा रहा है कि अपनी पार्टी और पीपुल्स कांफ्रेंस को भाजपा का समर्थन मिल रहा है। ये पार्टियां दोनों के बीजेपी की 'प्रॉक्सी' होने तक का दावा करती रही हैं।

बुधवार को लोन और उमर दोनों ने उरी और लंगेट में चुनावी रैलियां की हैं और दोनों ही ने एक-दूसरे पर भाजपा के करीबी होने का दावा किया है। उमर अब्दुल्ला जहां अपनी पार्टी से लोन के गठबंधन को लेकर निशाना साध रहे हैं। वे इस सीट पर इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार हैं। वहीं सज्जाद लोन उन्हें वंशवादी कहते हुए उनके अटल सरकार में मंत्री होने के जमाने की याद दिला रहे हैं।

अब्दुल्ला का दावा है कि पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता लोन ने अपनी पार्टी के बुखारी के घर पर भाजपा नेता तरुण चुग के साथ निजी बैठक की। वहीं लोन उन्हें अटल सरकार की याद दिलाते हुए कहते हैं, 'नेशनल कांफ्रेंस घाटी में बीजेपी की ऑरिजनल ए टीम है।'

लोन की चिंता बढ़ा रहे हैं इंजीनियर राशिद
स्थानीय होने की वजह से लोन को यहां एक अलग फायदा मिलने की उम्मीद है, वहीं अपनी पार्टी के समर्थन से उन्हें बांदीपुरा, गुलमर्ग और सुंबल में लाभ मिलने की संभावना है। लेकिन, इंजीनियर राशिद की मौजूदगी ने इस सीट की चुनावी लड़ाई को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। राशिद पिछले चुनाव में भी यहां उतरे थे और उन्हें एक लाख से ज्यादा वोट मिले थे।

स्थानीय राजनीति के जानकारों की मानें तो तिहाड़ में रहकर भी अगर इंजीनियर ने उतने भी वोट जुटा लिए तो इससे लोन की परेशानी बढ़ सकती है, क्योंकि उन्हें मिलने वाले ज्यादातर वोट उनकी गैर-मौजूदगी में लोन को मिलने की संभावना अधिक थी।

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बारामूला लोकसभा क्षेत्र में कुपवाड़ा, बारामूला, बांदीपोरा और बडगाम जिलों की 18 विधानसभा सीट आते हैं। परिसीमन से पहले 2019 के चुनाव में इस सीट पर 34.89% वोट पड़े थे, जो कि घाटी में सबसे ज्यादा थी। आर्टिकल 370 हटने के बाद जिस तरह से श्रीनगर में 26 साल का मतादान रिकॉर्ड टूटा है, उससे लगता है कि बारामूला में मतदान प्रतिशत इस बार 50% को पार कर सकता है।

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