Mamata ने किया इस्तीफ देने से मना, अब क्या करेंगे राज्यपाल? कितनी है ताकत और क्या हैं संवैधानिक नियम?
West Bengal Crisis: पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों के बाद सियासी माहौल गर्म है। Mamata Banerjee की पार्टी TMC को सिर्फ 80 सीटें मिली हैं, जबकि Bharatiya Janata Party (बीजेपी) ने 207 सीटों पर जीत हासिल की है। खुद ममता बनर्जी भी भबानीपुर सीट से चुनाव हार गईं। चुनाव के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी और चुनावी सिस्टम पर सवाल उठाए। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या राज्यपाल मुख्यमंत्री को हटा सकता है? और इसमें केंद्र सरकार की क्या भूमिका होती है? साथ ही, हमारे संविधान में ऐसी स्थिति को लेकर क्या नियम है?
राज्यपाल की भूमिका क्या होती है?
भारत के संविधान के मुताबिक, राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। यह पद केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है। संविधान का Article 153 कहता है कि हर राज्य में एक राज्यपाल होगा। वहीं Article 163 के तहत राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करना होता है, सिवाय कुछ विशेष परिस्थितियों के। मतलब साफ है, राज्यपाल सीधे सरकार नहीं चलाता, बल्कि एक संवैधानिक भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री कैसे बनता है और कब हट सकता है?
संविधान के Article 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है, लेकिन वह उसी व्यक्ति को CM बनाता है जिसके पास विधानसभा में बहुमत हो। अगर किसी मुख्यमंत्री के पास बहुमत नहीं रहता, तो उसे पद छोड़ना पड़ता है। यह साबित करने का सबसे बड़ा तरीका है फ्लोर टेस्ट (विधानसभा में विश्वास मत)।
क्या राज्यपाल मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर सकता है?
सीधा जवाब है, नहीं, राज्यपाल अपने मन से CM को नहीं हटा सकता। लेकिन कुछ परिस्थितियों में राज्यपाल कदम उठा सकता है, जैसे-
• अगर मुख्यमंत्री बहुमत खो दे
• अगर CM फ्लोर टेस्ट से बचने की कोशिश करे
• अगर सरकार संवैधानिक संकट पैदा करे
ऐसे मामलों में राज्यपाल मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत साबित करने को कह सकता है। अगर CM ऐसा नहीं कर पाता, तब ही उसे हटाया जा सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट भी कई बार साफ कर चुका है, खासकर S.R. Bommai vs Union of India केस में। इस फैसले में कहा गया था कि बहुमत का फैसला विधानसभा में ही होगा, न कि राजभवन में।
अगर CM इस्तीफा न दे तो क्या होगा?
अगर कोई मुख्यमंत्री चुनाव हार जाए लेकिन इस्तीफा न दे, तो भी अंतिम फैसला बहुमत पर ही निर्भर करता है।
• अगर उसके पास विधायक नहीं हैं, लिहाजा सरकार गिर जाएगी
• राज्यपाल फ्लोर टेस्ट करवा सकता है
• नई पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता दिया जा सकता है
इसलिए सिर्फ इस्तीफा न देने से कोई CM पद पर नहीं टिक सकता, अगर उसके पास नंबर नहीं हैं।
केंद्र सरकार क्या कर सकती है?
केंद्र सरकार सीधे मुख्यमंत्री को नहीं हटा सकती। लेकिन एक विकल्प है Article 356. अगर राज्य में संवैधानिक व्यवस्था पूरी तरह फेल हो जाए, तो राज्यपाल की रिपोर्ट पर राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी सख्त नियम बनाए हैं। बिना ठोस कारण के राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जा सकता।
राज्यपाल के पास असली ताकत क्या है?
राज्यपाल के पास कुछ महत्वपूर्ण अधिकार होते हैं-
• सरकार बनाने के लिए पार्टी को बुलाना
• फ्लोर टेस्ट का आदेश देना
• राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करना
• विधानसभा सत्र बुलाना या स्थगित करना
लेकिन ये सभी अधिकार संविधान के दायरे में होते हैं, न कि व्यक्तिगत फैसलों पर।
सिस्टम क्या कहता है?
पूरे मामले को समझें तो साफ है, भारत का संविधान किसी एक व्यक्ति को पूरी ताकत नहीं देता।
• राज्यपाल CM को सीधे नहीं हटा सकता
• केंद्र सरकार सीधे दखल नहीं दे सकती
• असली फैसला विधानसभा के बहुमत से होता है
यानी लोकतंत्र में अंतिम ताकत जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के पास होती है, न कि किसी एक पद के पास। इसलिए बंगाल जैसे हालात में भी आगे क्या होगा, यह तय करेगा बहुमत और संविधान, न कि सिर्फ बयान या राजनीतिक विवाद।
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