Nepal India Relation: दिल्ली आने वाले थे नेपाली विदेश मंत्री, फिर अचानक भारत ने क्यों टाला पूरा सम्मेलन?
Indo-Nepal Diplomatic Tension: नेपाल के विदेश मंत्री Shishir Khanal का भारत दौरा फिलहाल टल गया है। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे नई दिल्ली में होने वाले इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस समिट में शामिल होने आने वाले थे, लेकिन भारत सरकार ने सम्मेलन ही आगे बढ़ा दिया। ऐसे समय में यह दौरा काफी अहम माना जा रहा था क्योंकि हाल के महीनों में भारत और नेपाल के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
माना जा रहा था कि इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई बड़े मुद्दों पर बातचीत हो सकती थी। अब दौरा टलने के बाद काठमांडू और नई दिल्ली के रिश्तों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

Shishir Khanal India Visit: क्यों टला नेपाल के विदेश मंत्री का दौरा
International Big Cat Alliance का पहला शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में होना था, जिसमें कई अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होने वाले थे। लेकिन भारत सरकार ने इसे फिलहाल टाल दिया। भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला अफ्रीकी यूनियन से चर्चा के बाद लिया गया ताकि सभी सदस्य देशों की बेहतर भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। हालांकि नेपाली मीडिया में दावा किया गया कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों में फैले इबोला संकट को भी इसके पीछे की वजह माना जा रहा है।
भारत-नेपाल रिश्तों के लिए अहम था दौरा
Nepal और India के बीच हाल में कई मुद्दों को लेकर तनाव देखने को मिला था। ऐसे में विदेश मंत्री शिशिर खानाल का दौरा रिश्तों को बेहतर करने का मौका माना जा रहा था। बताया गया कि नेपाली पक्ष ने पीएम Narendra Modi, विदेश मंत्री S Jaishankar और वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal से मुलाकात की भी तैयारी की थी। इस दौरान कई अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होनी थी।
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लिपुलेख और कैलाश यात्रा से बढ़ी थी नाराजगी
नेपाल ने हाल ही में भारत और चीन दोनों को कूटनीतिक नोट भेजकर लिपुलेख रास्ते से कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू करने पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद भारत के विदेश सचिव Vikram Misri की नेपाल यात्रा भी टल गई। हालांकि दोनों देशों के अधिकारियों का कहना है कि बातचीत और संपर्क अलग-अलग स्तर पर जारी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि छोटे-छोटे विवादों की वजह से रिश्तों में असहजता बढ़ी है, लेकिन संवाद पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
रेलवे, पेट्रोल पाइपलाइन और QR पेमेंट पर चर्चा थी
अगर यह दौरा होता तो दोनों देशों के बीच कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर बातचीत हो सकती थी। इनमें जनकपुर-अयोध्या रेलवे लाइन, भारत की मदद से ईस्ट-वेस्ट रेलवे निर्माण और पोखरा-बैराहवा एयरपोर्ट के लिए नए एयर रूट की मांग शामिल थी। इसके अलावा पेट्रोल पाइपलाइन विस्तार, नेपाल को चीनी निर्यात पर लगी रोक हटाने और क्रॉस बॉर्डर QR पेमेंट सिस्टम जैसे मुद्दे भी एजेंडे में थे। ये सभी मुद्दे नेपाल की अर्थव्यवस्था और भारत के साथ कनेक्टिविटी के लिए अहम माने जाते हैं।
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क्या दोनों देशों में बढ़ रही दूरी?
नेपाल के पूर्व राजदूत Vijay Kant Karna का कहना है कि इस दौरे के टलने से दोनों देशों के बीच सीधे संवाद का एक बड़ा मौका हाथ से निकल गया। उन्होंने कहा कि रिश्ते पूरी तरह खराब नहीं हुए हैं, लेकिन भ्रम और असहजता जरूर बढ़ी है। उनका मानना है कि दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच सीधी बातचीत जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में भारत और नेपाल दोनों को रिश्तों में भरोसा बनाए रखने के लिए ज्यादा सक्रिय कूटनीति करनी होगी।












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