Waqf Bill: स्टालिन वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध क्यों कर रहे हैं? क्या कहता है राज्य का राजनीतिक समीकरण?
Waqf Bill: तमिलनाडु में मुस्लिम वोट बैंक और वक्फ संशोधन बिल पर एम.के. स्टालिन का विरोध
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 का जोरदार विरोध किया है। गुरुवार, 3 अप्रैल को इस बिल के खिलाफ राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया गया जिसे विपक्ष के भारी विरोध के बीच पास कर दिया गया।
सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि ये विधेयक मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता और उनके वक्फ संपत्तियों के अधिकारों पर सीधा हमला है।

Waqf Bill: स्टालिन क्यों कर रहें विरोध?
वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करके डीएमके वहां एक राजनीतिक दांव खेल रही है जिससे वह अल्पसंख्यक समुदाय के समर्थन को और मजबूत कर सके। स्टालिन का कहना है कि विधानसभा सर्वसम्मति से जोर देती है कि केंद्र सरकार को वक्फ अधिनियम 1995 के लिए वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को वापस लेना चाहिए।
- वक्फ विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि इस बिल से बोर्ड की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी।
- डीएमके का मानना है कि यह विधेयक गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने का प्रावधान करता है, जिससे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप हो सकता है।
- 'वक्फ बाय यूजर' प्रावधान को हटाता है, जिससे ऐतिहासिक वक्फ संपत्तियों की मान्यता पर खतरा मंडरा सकता है।
- संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन करता है, जो धार्मिक संस्थानों को स्वतंत्र रूप से संचालित करने का अधिकार देता है।
- स्टालिन का कहना है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को कमजोर करने और उनकी संपत्तियों को जब्त करने का प्रयास है।
Waqf Bill: राज्य में मुस्लिम आबादी कम, वोट बैंक पर प्रभाव ज्यादा
तमिलनाडु में 2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या करीब 5.86% है, लेकिन राजनीतिक रूप से इनका वोट काफी प्रभावशाली माना जाता है। इनका वोट डीएमके सहित सभी स्थानिय पार्टियों के लिए सॉलिड गेम प्लान है। अगले साल तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने को है ऐसे में डीएमके वक्फ विधेयक का विरोध करके मुस्लिम वोटों को सुरक्षित करने का काम कर रही है।
यहां के मुस्लिम वोटर आमतौर पर डीएमके और उसके सहयोगी दलों का समर्थन करते रहे हैं। यहां चेन्नई, वेल्लोर, तिरुचिरापल्ली, मदुरै, रामनाथपुरम, नागपट्टिनम और तंजावुर जैसे कई जिलों में मुस्लिम वोट चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं, खासकर 2021 के विधानसभा चुनाव में, डीएमके को मुस्लिम बहुल इलाकों में भारी समर्थन मिला था।
डीएमके हमेशा से अल्पसंख्यक समर्थक नीतियों की वकालत करती रही है, और वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध कर स्टालिन अपने मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति अपना रहे हैं। वहीं स्टालिन की सरकार राज्य में भाजपा के एजेंडे का विरोध करते आई है।
तमिलनाडु में भाजपा हिंदुत्व कार्ड खेलकर डीएमके के अल्पसंख्यक समर्थन को तोड़ने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, डीएमके और कांग्रेस गठबंधन मुस्लिम वोटों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।












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