WAC 2024: आयुर्वेदिक नुस्खों से तैयार भोजन, स्नैक्स से दूर होंगी बीमारियां, एक्सपर्ट्स ने किया दावा
तेजी से बदलते खानपान के ट्रेंड के बीच अब स्वास्थ्य की समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं। सभी आयु वर्ग को बच्चे, युवा और वृद्ध को आए दिन स्वास्थ्य की नई- नई समस्याएं आ रही हैं। इस बीच आयुर्वेद को एक बढावा देने और बीमारियों पर नियंत्रण के लिए उपाय तेजी से खोजे जा रहे हैं। कुपोषण, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को कम करने के लिए देशी नुस्खों का सहारा लिया जा रहा है। देहरादून में 10वें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के दौरान एक्सपर्ट्स ने पूरे देश के बाजार में प्रामाणिक आयुर्वेदिक नुस्खों के अनुसार तैयार किए गए खाद्य पदार्थों और स्नैक्स उत्पादों को उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।
देहरादून में विश्व आयुर्वेद कांग्रेस (WAC) में जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद डीम्ड विश्वविद्यालय (NIADU) की पूर्व कुलपति प्रो. मीता कोटेचा ने घोषणा की कि वे 700 व्यंजन और नुस्खे बनाने के लिए आयुर्वेदिक ग्रंथों का सख्ती से पालन करेंगे। इसके अलावा, ऐसे अन्य व्यंजन भी होंगे जिनमें सशर्त संशोधन की अनुमति होगी ताकि विविधता प्रदान की जा सके और मौजूदा मेगा फूड सेक्टर में प्रतिस्पर्धा की जा सके, जो खरबों डॉलर का कारोबार कर रहा है।

बता दें कि देहरादून में 10वें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस (WAC)की थीम इस बार 'आयुर्वेद आहार: भोजन औषधि है, लेकिन औषधि भोजन नहीं है' रखा गया। कांग्रेस के दौरान आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थों और स्नैक्स के उत्पादन और विपणन के लिए गठित एक उच्च-स्तरीय समिति के सदस्यों ने अपनी योजनाओं के बारे में जानकारी साझा की।
इस दौरान WAC की उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों में एनआईएडीयू की प्रो. मीता कोटेचा, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली की निदेशक प्रो. तनुजा नेसारी और राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के प्रो. अनुपम श्रीवास्तव शामिल हैं। यह समिति भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली की निदेशक प्रो. तनुजा नेसरी ने प्रस्तावित आयुर्वेदिक खाद्य खंड को बिना किसी सीमा के "अवसरों का सागर" बताया। इस क्षेत्र को नवीनतम खाद्य प्रौद्योगिकियों को नियोजित करने और पोषण विशेषज्ञों और आयुर्वेदिक विशेषज्ञों की विशेषज्ञता प्राप्त करने की अनुमति दी जाएगी। इसके तहत तैयार और विपणन किए जाने वाले भोजन और नाश्ते में सदियों पुरानी भारतीय परंपराओं के आवश्यक सिद्धांत बने रहेंगे। मार्केटिंग FMCG क्षेत्र में होने वाली प्रथाओं के समान होगी, जिसमें डोर डिलीवरी की पेशकश करने वाले खाद्य एग्रीगेटर्स का लाभ उठाया जाएगा। यह भी सुनिश्चित करेगा कि ये खाद्य किस्में स्टार होटलों सहित सभी भोजनालयों में उपलब्ध हों।
इस पहल का उद्देश्य भारत के पारंपरिक खाद्य पदार्थों बढ़ावा है। इसे आयुर्वेद आहार विनियम 2022 और कानून के तहत बनाए गए नियमों के तहत लॉन्च किया गया है, जो तैयारी के अंतिम चरण में हैं और जल्द ही लागू किए जाएंगे।
बाजार में उपलब्ध अधिकांश आयुर्वेदिक खाद्य उत्पाद हर पहलू में प्रामाणिकता के मानकों को पूरा करने में विफल रहते हैं, चाहे वह प्रक्रिया हो, गुणवत्ता हो या उपयोग की जाने वाली सामग्री की मात्रा हो। यह पहल विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सरकार की सहायता करेगी। यह भूख, कुपोषण और मोटापे से संबंधित मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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