VIDEO: जब अटल बिहारी वाजपेयी ने नरेंद्र मोदी को दी थी राजधर्म निभाने की नसीहत
नई दिल्ली। अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे प्रधानमंत्री रहे, जिनका हर कोई मुरीद रहा। पक्ष हो या विपक्ष हर किसी का उनसे उतना ही लगाव करता रहा। वो अपने सरल और प्रभावी व्यक्तित्व की वजह से हर किसी से पसंदीदा व्यक्तित्व और नेता बने रहे। वो न केवल एक अच्छे व्यक्तित्व, एक कुशल राजनीतिज्ञ, प्रशासक, भाषाविद, कवि, पत्रकार और लेखक रहे, बल्कि वो शब्दों को जादूगर थे, जो बड़ी-बड़ी बातों को आसानी से कह जाते थे।

बड़ी-बड़ी बातों को आसानी से कहने में माहिर
अटल जी ऐसे राजनीतिक थे जो अपने उसूलों का पालन करने से कभी पीछे नहीं हटे। उन्होंने राजनीति या सत्ता के लिए कभी भी कभी नीति के विरुद्ध काम नहीं किया। वो जो सोचते थे, उसे सबके सामने जाहिर करने में कभी गुरेज नहीं करते थे। उनके शब्द ऐसे होते थे, जो विरोधियों के साथ-साथ दोस्तों को भी सीख दे देती थी। वो मंद मुस्कान के साथ अपनी बातों से ऐसा सस्पेंस छोड़ जाते कि उसे समझने वालों को खासी मशक्कत करनी पड़ती।

मोदी को दी थी राजधर्म की सीख
2002 के गुजरात में गोधरा कांड के बाद हुए हिंदू-मुस्लिम दंगों में सैकड़ों लोगों की जान चली गई। देश में गुजरात सरकार, वहां के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा सभी आलोचनाओं में घिर गई थी। इस दंगों के बाद जब अटल जी अहमदाबाद पहुंचे तो उन्होंने एक शब्द से तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को पूरी राजनीति की सीख दे दी। अहमदाबाद में पत्रकारों ने अटल जी से पूछा कि क्या वे राज्य के मुख्यमंत्री को कोई सलाह देना चाहते हैं?इस सवाल के जवाब में उन्होंने एक शब्द का इस्तेमाल किया वो था 'राजधर्म'।

जब अटल जी ने दी मोदी को राजधर्म की सीख
पत्रकारों के सवाल के जवाब में अपने चिर परिचित अंदाज में कुछ थमकर अटल जी बोल, 'राजधर्म का पालन होना चाहिए। मुख्यमंत्री को राजधर्म का पालन करना चाहिए। जाति, वर्ण या संप्रदाय के आधार पर भेद नहीं होना चाहिए।' इस एक शब्द से उन्होंने नरेन्द्र मोदी को बड़ी सीख दे दी। हालांकि इसके ठीक बाद अटल जी बोले कि उन्हें विश्वास है कि नरेंद्र मोदी अपने राजधर्म का पालन कर रहे हैं। देखिए Video....












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