Video: ट्रेन में रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े गये टीटी
हम तो रोज़ खबरें लिखते हैं, आज हम आपको पढ़ायेंगे वो खबर जिसका सारा क्रेडिट एक आम भारतीय अंजनी शाही को जाता है, जिन्होंने चलती ट्रेन में रिश्वत लेने वाले टीटी का वीडियो बनाया और उसे रेल मंत्री सुरेश प्रभु तक भेजा। इन सबके बीच क्या-क्या हुआ, चलिये सुनते हैं अंजनी की जुबानी, और हां साथ में उस वीडियो को भी देखेंगे, जो अंजनी ने बनाया।
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अंजनी शाही ने कहा- 21 नवंबर 2015 की रात मैं पटना से दिल्ली जा रहा था। हाथरस रेलवे स्टेशन के पास मैं अपने कंपार्टमेंट से बाहर निकला मैंने देखा दो टीटीई एक गरीब यात्री को टॉयलेट के पास परेशान कर रहे हैं। उस गरीब के प्रति टीटी का व्यवहार ऐसा था, मानो वह कोई कत्ल करके आ रहा हो।
जनरल डिब्बे का टिकट लेकर रिजर्वेशन में चढ़ने पर कुल 330 रुपए का चालान कटता है। उस गरीब के पास 330 रुपए नहीं थे। तमाम खरी-खोटी सुनाने के बाद टीटी ने जब उसकी जेब टटोली तो मात्र 60 रुपए निकले। वह भी टीटी ने रख लिये। 60 रुपए लेने के बाद भी स्लिप नहीं दी।
वैसे मजेदार बात तो यह है कि मात्र 60 रुपए देख दोनों टिकट कलेक्टरों का मूड खराब हो गया। वे बोले, "इसके पास और है ही नहीं..."
इस मंजर का वीडियो मैंने बना लिया और तुरंत टीटी को बता दिया। जब मैंने कहा कि मैं आपकी कंप्लेन करूंगा तो टीटी के होश फाख्ता हो गये। वे बोले 50 हजार ले लो, लेकिन वीडियो डिलीट कर दो। मैंने उनसे साफ इंकार किया और अपनी बर्थ पर आकर लेट गया।
10 मिनट के भीतर चार पुलिस वालों के साथ वे टीटी फिर से आये और मुझसे बोले, "तुम ट्रेन के अंदर वीडियो नहीं बना सकते हो, वीडियो डिलीट करो या जुर्माना भरो।" मैंने कहा, कानून की कौन सी किताब में यह लिखा है। मुझे वह धारा बता दो, मैं वीडियो डिलीट कर दूंगा।
इससे कि चार पुलिसवाले और दो टीटीई मेरे ऊपर हावी होते, मेरे साथी यात्री मेरे साथ खड़े हो गये। टीटी ने मुझे धमकी दी और वहां से निकल गया।

मैं दिल्ली पहुंचा और रात को करीब 10 बजे वह वीडियो रेल मंत्री सुरेश प्रभु और रेलवे के जीएम को भेजा। मात्र 20 मिनट के भीतर जीएम ने मुझे जवाब दिया और कहा कि डीआरएम इलाहाबाद को कंप्लेन भेज दी गई है। मुझे बहुत खुशी हुई कि इतनी रात को भी आला अधिकारी इस प्रकार मुस्तैद हैं। और जिस तरह रेल मंत्री ने मेरे ट्वीट पर ऐक्शन लिया, उसे देख मुझे बहुत खुशी हुई।

2 दिन के बाद मेरे पास डीआरएम ऑफिस से कॉल आयी जिसमें मुझसे कुछ सवाल पूछे गये। और फिर 27 नवंबर को उत्तर केंद्रीय रेलवे के डीआरएम वीके त्रिपाठी ने मुझे सूचना दी कि सोहन सिंह और अविनाश कुमार नाम के दोनो टीटीई सस्पेंड कर दिये गये हैं।
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अंजनी ने जो किया, वह वाकई में काबिल-ए-तारीफ है। उनकी जगह कोई और होता, तो शायद टीटी से कुछ रुपए ऐंठ कर वीडियो डिलीट कर देता। हो सकता है पुलिस के दबाव में आकर अंजनी भी टूट जाते। लेकिन तब भ्रष्टाचार की जीत होती।
एक अपील आपसे- अंजनी की तरह आप भी आगे बढ़िये, मोबाइल आपके हाथ में है, इंटरनेट आपकी जेब में। आपके छोटे से प्रयास दुनिया बदल सकते हैं। बस एक कदम तो बढ़ाइये। और इस काम में वनइंडिया आपके साथ है... क्योंकि आप चलेंगे तो संग चलेगा वनइंडिया।












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