VGRC: वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में सेमीकंडक्‍टर टैलेंट इकोसिस्‍टम को मजबूत करने पर हुई चर्चा

Vibrant Gujarat Regional Conference: गुजरात के मेहसाणा में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (VGRC) के तहत सेमीकंडक्टर वर्कफोर्स डेवलपमेंट पर एक महत्वपूर्ण सत्र सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। 9 अक्‍टूबर 2025 को संपन्‍न हुए इस सत्र के दौरान गुजरात ने सेमीकंडक्टर वर्कफोर्स को गति देने के लिए 'विजन से वेलोसिटी की ओर' थीम का अनावरण किया। यह कार्यक्रम गणपत विश्वविद्यालय, मेहसाणा में हुआ।

गुरुवार को हुए इस सत्र का मुख्य फोकस गुजरात के उभरते सेमीकंडक्टर उद्योग का समर्थन करना और राज्य के टैलेंट इकोसिस्टम को मजबूत करना था। यह इस बात पर जोर देता है कि गुजरात सेमीकंडक्टर निर्माण और डिजाइन के लिए एक वैश्विक केंद्र बनने को तैयार है।

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इस सत्र में कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। ग्रिट की सीईओ एस. अपर्णा ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने गुजरात की सेमीकंडक्टर प्रतिभा के लिए बेहतर शिक्षा पद्धतियों पर भी जोर दिया।

पहले दिन हुए इस वर्कफोर्स डेवलपमेंट सेशन की थीम 'दृष्टि से वेग की ओर सेमीकंडक्टर चिप के लिए कार्यबल विकास' थी। इसका लक्ष्य गुजरात के उभरते सेमीकंडक्टर उद्योग को सहायता देना और राज्य के टैलेंट इकोसिस्टम को मजबूत करना था।

यह कॉन्फ्रेंस सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और डिज़ाइन के वैश्विक हब के रूप में गुजरात की स्थिति को दर्शाती है। ग्रिट की सीईओ एस. अपर्णा ने सत्र में उपस्थित होकर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में गुजरात की अग्रणी भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने गुजरात की सेमीकंडक्टर प्रतिभा को निखारने के लिए बेहतरीन शिक्षा पद्धति पर भी बल दिया।

गौरतलब है कि भारत के रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने मुख्य कार्यक्रम में कुशल टैलेंट की राष्ट्रीय आवश्यकता पर प्रकाश डाला था। इसके अतिरिक्त, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव श्रीमती पी. भारती, गुजरात राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन की निदेशक श्रीमती नेहा कुमारी, भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के निदेशक श्री मनीष हुडा, और गतिशक्ति यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. डॉ. मनोज चौधरी ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।

शिक्षा और उद्योग के बीच समन्वय को बढ़ावा देने के लिए दो पैनल चर्चाएं हुईं। पहली पैनल "गुजरात की सेमीकंडक्टर टैलेंट पाइपलाइन का निर्माण", का संचालन नीलेश राणपुरा, निदेशक ASIC, einfochips ने किया। इसमें अग्रणी संस्थानों और कंपनियों के विशेषज्ञों ने गुजरात के सेमीकंडक्टर टैलेंट इकोसिस्टम को मजबूत करने की रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने उद्योगों की अपेक्षाओं, कौशल अंतर, पाठ्यक्रम आधुनिकीकरण और अत्याधुनिक उत्पाद कौशल जैसे विषयों पर विचार प्रस्तुत किए।

इस पैनल चर्चा में पीडीईयू के डीजी डॉ. एस. मनोहरन, आईआईटी-गांधीनगर के प्रो. निहार मापात्रा, माइक्रॉन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया के हेड टीए श्री शहबाज सैयद, नैमटेक के सहायक प्रोफेसर डॉ. राजगोपालन पांडे, और एससीएल के महानिदेशक डॉ. कमलजीत सिंह शामिल हुए।

इस महत्वपूर्ण सत्र में आईआईटी-गांधीनगर के निदेशक प्रो. रजत मूना ने अपने वक्तव्य के बाद एमओयू का आदान-प्रदान किया। इन एमओयू में गुजरात सरकार के समर्थ प्रोजेक्ट के लिए आईआईटी-गांधीनगर के साथ दिगंतरा की नई सुविधा, गतिशक्ति यूनिवर्सिटी और बैंक आदि के साथ भागीदारी शामिल थी। साथ ही, कार्यबल विकास के लिए मॉन्क9 और निरमा विश्वविद्यालय के बीच भागीदारी भी हुई।

दूसरे सत्र में, पीडीईयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुराग कांड्या द्वारा संचालित अंतिम कार्यक्रम, 'कोलोबरेशन फॉर इनोवेशन' में शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग को सरल बनाने पर प्रस्तुति दी गई। पैनलिस्टों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास, अत्याधुनिक पैकेज कौशल और फैब वर्कफोर्स के लिए विभिन्न पहलों पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा की।

इस सत्र में एक इंटरेक्टिव प्रश्नोत्तरी सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें मात्सुओ-सान, जीआईसीए; मार्मिक भट्ट, सीईओ, मॉन्क9; मोंटू माकडिया, सीनियर एडवाइजर, सफल; डॉ. वसीउद्दीन, आर एंड डी हेड, केन्स; शीतल मेहता, निदेशक, सुधी सेमीकॉन; और प्रो. अमिताभ जैन, प्रैक्टिस के प्रोफेसर (टीईपीएल) ने भाग लिया।

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