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कौन हैं वो 5 पायलट्स जिन्‍होंने बालाकोट में गिराए थे जैश के ठिकाने पर बम और अब सम्‍मानित होंगे वायुसेना मेडल से

नई दिल्‍ली। भारत सरकार की तरफ से इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के उन पायलट्स को वायु सेना मेडल देने का ऐलान किया है जिन्‍होंने पाकिस्‍तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्‍मद के ठिकानों पर बम गिराए थे। इन पायलट्स के अलावा विंग कमांडर अभिंनदन वर्तमान को भी सरकार की तरफ से वीर चक्र देने की घोषणा की गई है। 26 फरवरी को इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) ने पाकिस्‍तान के बालाकोट में जो एयर स्‍ट्राइक की थी, उसमें आतंकियों के कैंप्‍स को तबाह करने में बस 90 सेकेंड्स का समय लगा था। यानी सिर्फ डेढ़ मिनट में ही जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकियों का काम तमाम हो गया था। 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के जवाब में आईएएफ ने एयरस्‍ट्राइक की थी। इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

क्‍या है वायुसेना मेडल

क्‍या है वायुसेना मेडल

आईएएफ के विंग कमांडर अमित रंजन, स्क्‍वाड्रन लीडर राहुल बसोया, पंकज भुजदे, बीकेएन रेड्डी और शशांक रेड्डी को वायुसेना मेडल से सम्‍मानित किया जाएगा। इन सभी ऑफिसर्स ने पाकिस्‍तान के बालाकोट में मिराज-2000 फाइटर जेट से बम बरसाए थे।वायुसेना मेडल, इंडियन मिलिट्री की ओर से दिया जाने वाला वह सर्वोच्‍च सम्‍मान है जो शांतिकाल के दौरान तब दिया जाता है जब किसी संकट के समय किसी ऑपरेशन को बेहतरी से अंजाम दिया जाता है। हालांकि इसे युद्ध की स्थिति में कई बार अदम्‍य साहस का परिचय करने पर भी दिया गया है। लेकिन वीर चक्र की तुलना में वायुसेना मेडल की संख्‍या कम है।

सिर्फ 90 सेकेंड्स में पूरा हुआ ऑपरेशन

सिर्फ 90 सेकेंड्स में पूरा हुआ ऑपरेशन

आईएएफ के 12 मिराज2000 फाइटर जेट्स 48 वर्षों में पहली बार पाकिस्‍तान के एयरस्‍पेस में दाखिल हुए थे। कुछ दिनों पहले एक पायलट ने बताया, 'सिर्फ 90 सेकेंड्स लगे, हमने बम ड्रॉप किए और वापस आ गए।' पायलट ने आगे कहा, 'किसी को भी इस स्‍ट्राइक यहां तक कि हमारे परिवारवालों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। अगले दिन जब सुबह खबरें आनी शुरू हुईं तो मेरी पत्‍नी ने मुझसे पूछा कि क्‍या मैं भी इस एयर स्‍ट्राइक का हिस्‍सा था। मैं चुप रहा और सोने चला गया।' किसी को भी बालाकोट ऑपरेशन के बारे में पता न चले इसके लिए सीनियर आईएएफ ऑफिशियल्‍स ने भी अपना डेली रूटीन बिल्‍कुल भी नहीं बदला था।

दो दिन पहले मिला इशारा

दो दिन पहले मिला इशारा

एक दूसरे पायलट ने इस ऑपरेशन के बारे में और ज्‍यादा जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि आईएएफ ने एलओसी पर भारी संख्‍या में कॉम्‍बेट एयर पैट्रोल्‍स यानी कैप को अंजाम दिया। इस गश्‍त की वजह से पाकिस्‍तान के किसी भी हवाई हमले को नाकाम करने में भारत सफल रहा। इस पायलट की मानें तो बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के बारे में हमले से दो दिन पहले संकेत किया गया था। पायलट्स को मालूम था कि कुछ होने वाला है लेकिन किसी को भी यह नहीं पता था कि आखिर क्‍या होगा। पायलट्स की सॉर्टीज कई गुना बढ़ गई थीं और कई बार तो एक-एक पायलट को कई-कई बार फ्लाइंग करनी पड़ रही थी।

25 फरवरी को मिराज बमों से हुए लैस

25 फरवरी को मिराज बमों से हुए लैस

25 फरवरी को शाम चार बजे मिराज 2000 को स्‍पाइस बमों से लैस किया गया। रात दो बजे पायलट्स ने हमले के लिए टेक ऑफ किया था। पायलट्स की मानें तो उन्‍होंने जानबूझकर लंबा रास्‍ता हमले के लिए चुना और देश के पूर्वी हिस्‍से से होते हुए कश्‍मीर पहुंचे। जैसे ही कश्‍मीर में मिराज2000 जेट्स दाखिल हुए पायलट्स रेडियो साइलेंस में चले गए यानी कि किसी भी तरह की फ्रिक्‍वेंसी या कैसा भी शोर नहीं था। पाकिस्‍तान एयरस्‍पेस में दाखिल होते हुए उनके आसपास दुश्‍मन का एक भी फाइटर जेट नहीं था। आईएएफ के इन जाबांज पायलट्स की मानें तो मिशन सफल था और हथियारों का निशाना बिल्‍कुल नहीं चूका था।

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