Vande Mataram Debate: सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह मेहदी कौन? क्यों कहा- 'हम वंदे मातरम् नहीं बोल सकते'
Vande Mataram Lok Sabha debate: राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद में हुई विशेष चर्चा के दौरान बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। प्रधानमंत्री मोदी सहित सभी दलों के नेताओं ने अपना पक्ष रखा, लेकिन इसी बीच सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह मेहदी के बयान ने माहौल गरमा दिया।
उन्होंने लोकसभा में कहा कि, 'हम वंदे मातरम् नहीं कह सकते', जिसके बाद हंगामा मच गया और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छिड़ गई। लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर यह बयान देने वाले सांसद कौन हैं और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है। इस रिपोर्ट में इन्हीं सवालों के जवाब जानेंगे।

Vande mataram 150 years: सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने क्या कहा?
सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने लोकसभा में कहा कि, "वंदे मातरम् आप बोलिए, हमें दिक्कत नहीं, हम उसका सम्मान करते हैं। लेकिन गा नहीं सकते, हमें आप जबरदस्ती गाने पर मजबूर नहीं कर सकते हैं।" उन्होंने यह कहकर धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का बचाव किया और राष्ट्रीय गीत को अनिवार्य बनाने के प्रयास का पुरजोर विरोध किया।
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Who is syed aga ruhullah mehdi: कौन हैं सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह मेहदी?
सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह मेहदी जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) पार्टी के नेता और सांसद हैं और वर्तमान में श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने 2024 के आम चुनाव में इस सीट से जीत दर्ज कर संसद में प्रवेश किया। वह JKNC के भीतर एक मुखर नेता माने जाते हैं, जो अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का कड़ा विरोध करते हैं। वह जम्मू और कश्मीर में समावेशी, गैर-सांप्रदायिक राजनीति की वकालत के लिए जाने जाते हैं।
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ओवैसी ने 'वंदे मातरम्' को धार्मिक मुद्दा बनाने पर उठाया सवाल
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में 'वंदे मातरम्' पर हो रही चर्चा के दौरान तीखा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि, "हम अपनी मां की इबादत नहीं करते, हम कुरान की भी इबादत नहीं करते और इस्लाम में अल्लाह के सिवा कोई खुदा नहीं।" ओवैसी ने सरकार पर वतन-परस्ती (देशभक्ति) को मजहब (धर्म) में बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि "वतन मेरा है और हम इसे छोड़कर नहीं जाएंगे," और वफादारी का सर्टिफिकेट न मांगने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि जबरदस्ती करना संविधान के खिलाफ होगा और भारत में आजादी इसलिए है क्योंकि हमने मुल्क और मजहब को एक नहीं बनाया।












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