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UP Lok Sabha Chunav Result: गांधी परिवार से जुड़ी Hot Seats पर किनकी निकल रही गर्मी! कौन बना रहा रिकॉर्ड?

Uttar Pradesh Lok Sabha Election result 2024: यूपी में लोकसभा की चार सीटें ऐसी हैं, जिनका किसी न किसी तरह से अभी भी गांधी-नेहरू परिवार से नाता जुड़ा हुआ है। ये सीटें हैं- अमेठी, रायबरेली, पीलीभीत और सुल्तानपुर। इस बार भी गांधी-नेहरू परिवार के दो सदस्य इनमें से दो जगहों से चुनाव लड़ रहे हैं।

बाकी दो सीटें वे हैं, जहां पिछली बार तक गांधी परिवार का ही दो सदस्य उम्मीदवार था। इनमें से एक चुनाव जीतकर 17वीं लोकसभा में पहुंचा, लेकिन इस बार उसे चुनाव लड़ने का मौका ही नहीं मिला। दूसरे को मजबूरी में अपनी सीट बदलनी पड़ गई, लेकिन उसने अपनी परिवार की विरासत वाली ही दूसरी सीट से ही ताल ठोकने का फैसला किया।

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गांधी परिवार से जुड़ी सीटों पर क्या हैं संकेत?
अमेठी, रायबरेली, पीलीभीत और सुल्तानपुर लोकसभा सीटों पर मतदान संपन्न हो चुका है और हमारी कोशिश ये है कि वहां के समीकरणों के आधार पर यह जानने की कोशिश करें कि इन चारों सीटों पर इस बार मतदाताओं की ओर से किस तरह के फैसले की संभावना नजर आ रही है।

पीलीभीत सीट पर बीजेपी की दाल गलेगी?
पीलीभीत लोकसभा सीट यूपी की उन सीटों में शामिल है, जहां पिछली बार से इस बार मतदान प्रतिशत गिरा है। 2019 में कुल 67.37% वोटिंग हुई थी। लेकिन, इस बार ईवीएम में 63.11% डाले गए हैं। लेकिन, वोट डालने वाले कुल मतदाताओं की संख्या में 30,672 (सिर्फ ईवीएम में पड़े वोट) की बढ़ोतरी हुई है।

भारतीय जनता पार्टी ने यहां इस बार मौजूदा सांसद वरुण गांधी को बिठाकर यूपी के मंत्री जितिन प्रसाद पर दांव लगाकर बड़ा जोखिम लिया है। वरुण से पहले उनकी मां मेनका गांधी यहां का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। समाजवादी पार्टी ने यहां ओबीसी भगवंत सरण गंगवार पर दांव लगाकर बीजेपी की दाल नहीं गलने देने की ठानी है। लेकिन, बसपा के अनिस अहमद खान उर्फ फूल बाबू जितने भी वोट काट चुके हैं, उससे भाजपा के इस किले के उतने ही सुरक्षित होने के आसार लग रहे हैं।

क्योंकि, पीलीभीत का समीकरण बहुत ही सीधा सा है। पिछली बार वरुण गांधी सपा-बसपा के संयुक्त उम्मीदवार से करीब 21% मतों से आगे थे। ऐसे में बसपा के मुस्लिम प्रत्याशी होने के बावजूद समाजवादी पार्टी उम्मीदवार के लिए इतना बड़ा फासला पाटना मुश्किल लग रहा है।

सुल्तानपुर में 'रिकॉर्ड' बनाने की ओर मेनका!
सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर इस बार जब मतदान के कुल आंकड़े आ जाएंगे तो भी लगता है कि यह कमोवेश पिछली बार के 56% से कुछ ज्यादा ही रहेंगे। भाजपा प्रत्याशी मेनका संजय गांधी यहां से दूसरा चुनाव लड़ रही हैं। वैसे यह उनका 9वां चुनाव है और मौजूदा लोकसभा में ही सबसे वरिष्ठ सांसद मेनका के लिए इस चुनाव में जीत एक तरह से उनके लिए नया रिकॉर्ड बना सकता है।

अलबत्ता 2019 में मेनका के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले सपा-बसपा के संयुक्त उम्मीदवार सिर्फ करीब 1.5% वोटों से ही पिछड़े थे। लेकिन, इस बार समाजवादी पार्टी के राम भुवाल निषाद और बीएसपी के उदय राज वर्मा की अलग-अलग दावेदारी ने उनकी राह को और भी आसान किया है।

बीजेपी के लिए यहां अच्छा संकेत ये है कि मेनका की लोकप्रियता विपक्षी उम्मीदवारों के समर्थकों में भी महसूस की गई है। उन्होंने अपने काम के दम पर ऐसी छवि बनाई है, जिसमें वो जाति और धर्म का भेद काफी हद तक मिटाने में सफल रही हैं। इन परिस्थितियों में मेनका वहां रेस में हर तरह से काफी आगे नजर आ रही हैं।

अमेठी का दाग रायबरेली में धो पाएंगे राहुल?
यूपी की रायबरेली लोकसभा सीट इस बार प्रदेश की सबसे चर्चित सीटों में शामिल है। इस सीट का चुनाव परिणाम देश की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। क्योंकि, कांग्रेस नेता राहुल गांधी पड़ोस में अपने परिवार के गढ़ अमेठी से हार जाने की वजह से यहां पर चुनाव मैदान में हैं, जिसे उनकी मां सोनिया गांधी ने राज्यसभा में पहुंचकर खाली की है।

2019 के लोकसभा चुनाव में यहां महज 56.31% वोटिंग हुई थी। लेकिन, इस बार वहां 58.12% वोटिंग हुई और बैलेट पेपर वाले मतों की संख्या जुड़ने के बाद इसमें और बढ़ोतरी होनी तय है। पिछली बार के मुकाबले इस बार यहां ईवीएम में वोट डालने वाले कुल मतदाताओं की संख्या में भी 78,441 (इसमें बैलेट मत्रों की संख्या शामिल नहीं) का इजाफा हुआ है।

बीजेपी ने इस बार जिन पूर्व कांग्रेसी दिनेश प्रताप सिंह को टिकट दिया है, वही पिछली बार सोनिया के खिलाफ भी मैदान में थे और तब वे उनसे 18% वोटों से कम वोटों के अंतर से पीछे रह गए थे। लेकिन, बीजेपी रायबरेली में पिछले कुछ चुनावों से लगातार जिस तरह से अपनी हार का अंतर कम करती गई है, वह अबकी बार कांग्रेस के लिए किसी बड़े खतरे के संकेत से कम नहीं है।

बीजेपी ने रायबरेली के चुनाव में इस बार कांग्रेस को समर्थन देने वाले तमाम स्थानीय दिग्गज नेताओं को अपने पक्ष में करने में सफलता पाई है, जिनमें से कुछ की अपनी-अपनी जातियों के वोट बैंक पर जबर्दस्त पकड़ है। ऊपर से बीएसपी ने ठाकुर प्रसाद यादव को उतारकर मुकाबले को राहुल गांधी के लिए बहुत आसान नहीं रहने दिया है।

4 जून को जब रायबरेली लोकसभा चुनाव की वोटों की गिनती होगी तो ठाकुर प्रसाद यादव को मिला हर एक वोट राहुल की राह में कांटे बिछाता नजर आ सकता है। क्योंकि, इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता कि पिछली बार सपा के साथ-साथ बसपा ने भी सोनिया के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था।

यही नहीं रायबरेली के करीब 18 लाख मतदाताओं में करीब 34% दलित हैं। बीजेपी ने इस वोट बैंक में सेंध लगाने के इरादे से पिछले साल ही बुद्धिलाल पासी (दलित) को यहां अपना जिलाध्यक्ष नियुक्त किया था। कांग्रेस ने राहुल गांधी की उम्मीदवारी नामांकन के वक्त में आकर तय की थी।

लेकिन, इससे काफी पहले ही पासी ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मैं पासी समाज से आता हूं और मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि अकेले इसी समुदाय का वोट भाजपा को यहां जीत दिलाने के लिए काफी है।'

अमेठी में अबकी बार क्या?
रायबरेली की तरह अमेठी भी गांधी परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण सीट है, लेकिन इस बार परिवार ने यहां का मैदान छोड़ दिया है। अलबत्ता प्रियंका गांधी वाड्रा ने खुद इस सीट पर पार्टी की जीत सुनिश्चित करने की कमान संभाली है। यहां इस बार किस तरह के चुनाव परिणाम आने के संकेत हैं, उसके लिए अगली लिंक पर क्लिक करके हर संभावनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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