UP Lok Sabha Chunav: अबकी बार किसे आजमाएगा आजमगढ़? यादव मतदाताओं के हाथ में चाबी!
Uttar Pradesh Lok Sabha Election: यूपी की आजमगढ़ लोकसभा सीट के मतदाताओं को 25 मई, 2024 को पांच साल में दूसरी बार मताधिकार का मौका मिलने वाला है। 2019 के आम चुनावों में यहां से सपा जीती थी। जून, 2022 के उपचुनाव में यहां से दूसरी बार बीजेपी को 'कमल' खिलाने का अवसर था।
उपचुनाव से पहले बीजेपी 2009 में भी आजमगढ़ से जीती थी। लेकिन, यह पूर्वी यूपी में सपा का ही गढ़ ही माना जाता रहा है। बुधवार को चुनाव प्रचार के लिए आए पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे समाजवादी पार्टी का 'असली गढ़' यूं ही नहीं कहा है, जिसे वापस पाने के लिए अबकी बार मुलायम सिंह यादव का पूरा कुनबा उतर चुका है।

आजमगढ़ में 5 साल में तीसरी बार चुनाव
2019 में यहां से खुद अखिलेश यादव 60% वोट लेकर सांसद चुने गए थे। तब सपा-बसपा गठबंधन में थी। विधानसभा के सदस्य चुने जाने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी और उपचुनाव में भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' को बीजेपी के टिकट पर 34.4% वोट लाने पर भी जीत मिल गई। उपचुनाव में भी उनके मुकाबले में सपा के मौजूदा उम्मीदवार और अखिलेश के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव ही मैदान में थे।
आजमगढ़ में उपचुनाव के बाद बदल गया समीकरण
पिछली बार सपा के हाथों से यह सीट भले ही निकल गई थी, लेकिन इस बार वह अपने किले पर फिर से कब्जे का दावा कर रही है। इसकी वजह ये है कि इस बार यहां का चुनावी समीकरण बदला हुआ नजर आ रहा है। उपचुनाव में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले गुड्डू जमाली अब सपा के विधान पार्षद हैं।
उपचुनाव में सिर्फ 8,679 वोटों से जीते थे बीजेपी उम्मीदवार
सपा के दो वोट बैंक रहे हैं- यादव और मुसलमान। आजमगढ़ में इन दोनों का करीब 40% वोट है। इनमें करीब 12% मुसलमान हैं। जमाली स्थानीय हैं, इसलिए उनकी पकड़ मुस्लिम वोटरों पर अच्छी है। उपचुनाव में उन्हें 2,66,210 मिले थे और यही निरहुआ से 8,679 वोटों से भी कम अंतर से धर्मेंद्र यादव के हारने का कारण बना था।
बसपा से उतारा 'कमजोर' उम्मीदवार!
इस बार बीएसपी ने यहां से मशहूद आलम को उतारा है, जो इलाके में ज्यादा जाने-पहचाने चेहरे नहीं माने जाते। ईटी से हबीब नाम के एक वोटर ने कहा, 'जून 2022 के उपचुनावों से अलग इस बार परिस्थितियां बदल गई हैं और सपा मुसलमानों में अपने जनाधार को जोड़े रखने के लिए बहुत कोशिश कर रही है।' उनका यह भी कहना है, 'लोकसभा चुनावों में पार्टी अच्छा कर रही है।'
पिछली गलतियों से सीख लेते हुए समाजवादी पार्टी की फर्स्ट फैमिली ने भी इस बार यहां अपने सारे घोड़े छोड़ दिए हैं। मुलायम परिवार के सारे दिग्गज यहां एक तरह से कैंप कर चुके हैं। लेकिन, आजमगढ़ में 18.6 लाख वोटरों में से 24% दलित भी हैं; और बसपा को मुसलमानों से भी समर्थन की उम्मीद है। इस दम पर वह मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के लिए जुटी रही है।
आजमगढ़ में भाजपा को यादव मतदाताओं से भी है उम्मीद
इन सबके बावजूद बीजेपी ने उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं। उसे 26% सामान्य मतदाताओं के अलावा 38% ओबीसी वोटरों में चौहान, राजभर और निषाद जाति के मतदाताओं के अलावा दलित वोटरों से भी पूरी आस है। लेकिन, सबसे दिलचस्प बात ये है कि बीजेपी ने यादव वोटरों से भी उम्मीद नहीं छोड़ी है।
आजमगढ़ में पार्टी के उपाध्यक्ष ब्रिजेश यादव का कहना है, 'मुलायम के पूरे परिवार की मौजूदगी के बावजूद बीजेपी यहां जून 2022 के उपचुनाव वाला प्रदर्शन दोहराएगी।' मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव करीब तीन महीने पहले भी यहां पार्टी कार्यकर्ताओं से चर्चा करके जा चुके हैं और गुरुवार को भी उन्होंने भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में रोडशो किया है।
यही नहीं, बीजेपी को पिछले दो वर्षों में यहां हुए विकास कार्यों पर भी पूरा भरोसा है। एक नई यूनिवर्सिटी, फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी, अटल आवासीय विद्यालय, म्यूजिक कॉलेज और गोरखपुर से आजमगढ़ की रेल कमेक्टिविटी भी पार्टी के अभियान का हिस्सा रही है।
ओबीसी वोट बैंक को और मजबूत करने के लिए निरहुआ के पक्ष में यूपी के मंत्री दारा सिंह चौहान, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओपी राजभर भी कई बार आजमगढ़ में माहौल बनाकर जा चुके हैं।
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