Lok Sabha Chunav: वोट डालने वाले कुल मतदाताओं की संख्या क्यों घटी? केरल में 60% सीटों पर असर
Lok Sabha Election: पांच चरणों के चुनाव के बाद जुटाए गए आंकड़ों के विश्लेषण से कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। जिन सीटों पर चुनाव हो चुके हैं, उनमें से 409 सीटों पर मतदान के आकड़ों को 2019 में उन्हीं सीटों पर पड़े वोटों से तुलना करने पर की दिलचस्प जानकारी सामने आ रही है।
पता चलता है कि जिन 409 सीटों के आंकड़े उपलब्ध हो पा रहे हैं, उनमें से करीब दो-तिहाई या 258 सीटों मतदान का प्रतिशत गिरा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में यह समस्या बार-बार देखी जा रही है। पांचवें चरण में तो यह और भी ज्यादा गंभीर दिखी है।

88 सीटों पर वोट डालने वाले कुल मतदाताओं की संख्या कम हुई
इन सीटों पर हुई वोटिंग के आंकड़ों के विश्लेषण में सबसे चौंकाने वाली जानकारी ये सामने आई है कि करीब हर पांचवीं सीट या इनमें से 88 सीटों पर उतने भी वोट नहीं पड़े हैं, जितने कि 2019 के लोकसभा चुनावों में पड़े थे। मतलब, इन सीटों पर मतदान का प्रतिशत तो पिछली बार से कम हुआ ही है, उतने भी लोग वोट डालने नहीं पहुंचे, जितने 2019 में आए थे।
हालांकि, ये आंकड़े सिर्फ ईवीएम में पड़े मतों पर आधारित हैं, बैलेट मतपत्रों के माध्यम से वोटिंग के आंकड़े इसमें शामिल नहीं है।
एब्सोल्यूट वोट और मतदान प्रतिशत में अंतर क्या है?
यहां यह साफ कर देना जरूरी है कि मतदान प्रतिशत संबंधित सीट पर कुल मतदाताओं में से वोटिंग करने वाले वोटरों की गिनती के आधार पर निर्धारित किया होता है। हो सकता है कि 2019 के मुकाबले किसी सीट पर रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या इस बार बढ़ गई हो। इसलिए, मतदान प्रतिशत इस बार के कुल रजिस्टर्ड वोटरों से तय होगा।
लेकिन, जब हम एब्सोल्यूट वोट या वोट डालने वाले कुल वोटरों की बात कर रहे हैं तो इसका मतलब उन मतदाताओं की संख्या से तुलना करना है, जितना कि संबंधित सीटों पर पिछली बार वोट पड़े थे।
केरल में 12 सीटों पर वोट डालने वाले कुल वोटरों की संख्या कम रही
सबसे हैरानी वाली बात ये है कि मतदान प्रतिशत और पिछली बार से कम वोट पड़ने वाले सीटों के मामले में केरल सबसे आगे है। यहां लोकसभा की 20 सीटों में से सभी पर मतदान का प्रतिशत (percentage turnout) तो गिरा ही है, डाले गए कुल वोटों की संख्या (absolute vote) भी 2019 के मुकाबले आधी से ज्यादा सीटों यानी 12 सीटों पर कम हो गई है।
केरल-तमिलनाडु में कांग्रेस का शानदार रहा था प्रदर्शन
इसी तरह तमिलनाडु में लोकसभा की 39 सीटों में से 34 पर इस बार मतदान प्रतिशत गिरा है। लेकिन, 18 सीटों पर पिछले चुनाव में पड़े कुल वोट से भी कम वोट पड़े हैं। यहां बताना जरूरी है कि दक्षिण के इन दोनों राज्यों में केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी ने पिछली बार एक भी सीट नहीं जीती थी।
केरल में तो वह अबतक कभी जीत ही नहीं सकी है। इसके ठीक उलट कांग्रेस को जो कुल 52 सीटें मिली थीं, उनमें से 23 इन्हीं दोनों राज्यों में आई थी।
यूपी में 17 सीटों पर डाले गए कुल वोटों की संख्या घटी
हालांकि, डाले गए कुल वोटों की कमी से उत्तर प्रदेश भी अछूता नहीं है। यहां जिन सीटों पर चुनाव हुए हैं, उनमें से जिन 53 सीटों के आंकड़े उपलब्ध हैं, उनमें से 40 पर मतदान प्रतिशत गिरा है। लेकिन, 2019 से कम वोटिंग वाली सीटें 17 हैं।
राजस्थान में 25 में से 12 सीटों डाले गए कुल वोटों की संख्या कम रही
अलबत्ता राजस्थान में जहां पिछले साल नवंबर में ही बीजेपी विधानसभा चुनाव जीती है, वहां की 25 सीटों में से 22 पर वोटिंग पर्सेंटेज कम रहा है और इनमें से 12 पर पिछली बार जितने भी वोट नहीं पड़े हैं।
इन राज्यों में भी डाले गए वोटों की संख्या कम हुई
भाजपा शासित उत्तराखंड में लोकसभा की 5 सीटें हैं और हर जगह मतदान का प्रतिशत कम रहा है। इनमें से 3 सीटों पर उतने वोट नहीं पड़े हैं, जितने कि पिछली बार पड़े थे।
इसी तरह से मध्य प्रदेश की 29 में से 9 सीटों (23 पर मतदान प्रतिशित गिरा) पर पड़ने वाले वोटों की संख्या घट गई है। इसी तरह गुजरात में 25 (26 सीटों में से सूरत में भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित) में से 6 (24 पर मतदान प्रतिशित गिरा), महाराष्ट्र में 48 में से 6 (20 पर मतदान प्रतिशित गिरा), बिहार में 24 में से 1 (21 पर मतदान प्रतिशित गिरा) पर पिछली बार से संख्या में कम वोट पड़े हैं।
इन राज्यों में पड़ने वाले वोटों की संख्या नहीं घटी
हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक झारखंड, कर्नाटक, ओडिशा, तेलंगाना, पश्चिम बोगाल, छत्तीसगढ़ में जहां चुनाव हो चुके हैं, वहां हर सीट पर 2019 के मुकाबले पड़ने वाले वोटों की संख्या ज्यादा रही है। हालांकि, मतदान प्रतिशत छत्तीसगढ़ को छोड़कर अन्य राज्यों में कुछ न कुछ सीटों पर कम रहा है।












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