UP Lok Sabha Chunav: बलिया में नारद राय की नाराजगी क्यों सपा को पड़ सकती है भारी?
Uttar Pradesh Lok Sabha Election: 1 जून यानी शनिवार को वाराणसी समेत पूर्वांचल की कुल 13 सीटों पर चुनाव होना है। लेकिन, उससे पहले प्रदेश में इंडिया ब्लॉक की प्रमुख पार्टी सपा को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के पूर्व विधायक और मंत्री नारद राय ने समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है।
विरोध भी करता हूं तो ताल ठोक कर करता हूं-नारद राय
नारद राय ने बलिया में सपा प्रत्याशी सनातन पांडे के समर्थन में आयोजित रैली में अखिलेश यादव की ओर से उनका नाम नहीं लिए जाने से नाराज होकर बगावत का झंडा बुलंद किया है। उन्होंने अपने समर्थकों की एक सभा में ऐलान किया, 'मैं लड़ता हूं तो ताल ठोक कर लड़ता हूं। मदद करता हूं तो ताल ठोक कर करता हूं; और विरोध भी करता हूं तो ताल ठोक कर करता हूं।'

पूर्वांचल में सपा के लिए बुरी खबर
नारद राय ने चुनाव से ठीक पहले सपा कुनबे से अपने चार दशकों का नाता ही नहीं तोड़ा है, उन्होंने भाजपा खेमे में जाने की तैयारी भी की है,जो सपा के लिए किसी बड़ झटके से कम नहीं है। नारद राय पूर्वांचल इलाके में सपा के एक कद्दावर भूमिहार चेहरा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल के जिन जिलों में भूमिहार जाति की अच्छी-खासी जनसंख्या मानी जाती है, उनमें बलिया ही नहीं, पड़ोस की गाजीपुर, मऊ, वाराणसी, जौनपुर, देवरिया, मिर्जापुर, भदोही, चंदौली, गोरखपुर, महाराजगंज और संत कबीर नगर जैसे जिले शामिल हैं।
नारद राय ने वाराणसी में अमित शाह से की मुलाकात
नारद राय की भाजपा के साथ जाने की बात तब पूरे पूर्वांचल में जंगल की आग की तरह फैली, जब सोमवार रात को उनकी वाराणसी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात वाली तस्वीरें वायरल हुईं। इस बैठक में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर भी मौजूद थे।
बलिया में बीजेपी से नीरज शेखर लड़ रहे हैं चुनाव
हालांकि, ब्राह्मण बहुल सीट मानी जाने वाली बलिया से पिछले दोनों ही चुनावों से बीजेपी जीत रही है। लेकिन दोनों ही बार यहां से पार्टी के ठाकुर (राजपूत) उम्मीदवारों को जीत मिली है। इस बार पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को उतारा है।
बलिया का जातीय समीकरण
जबकि, सपा ने पिछली बार वाले अपने ब्राह्मण प्रत्याशी सनातन पांडे पर ही दांव लगाया है। इसकी वजह ये है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस सीट पर 15.5% ब्राह्मण वोटर हैं। उसके बाद 15.3% ओबीसी, 13.8% राजपूत और 8.9% भूमिहार मतदाता हैं। जबकि, 6.59% मुसलमान वोटर हैं।
इस बार के लिए कहा जा रहा था कि बलिया में ब्राह्मण वोटर सनातन पांडे के पक्ष में जोर लगा रहे हैं। ऐसे में नारद राय के आने से बीजेपी उम्मीदवार का आधार ज्यादा मजबूत होने की संभावना है।
सिर्फ बलिया ही नहीं नारद राय का प्रभाव जिन-जिन चुनाव क्षेत्रों में है और मुलायम के जमाने से समाजवादी पार्टी की राजनीति करने की वजह से उनका पार्टी के आम कार्यकर्ताओं पर भी एक पकड़ है। यह स्थिति सपा के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं।
सातवें चरण में यूपी की 13 सीटों पर वोटिंग
अंतिम चरण में यूपी की जिन 13 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है, उनमें वाराणसी की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट के अलावा बलिया, गाजीपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, चंदौली, मिर्जापुर, रॉबर्ट्सगंज, गोरखपुर और महाराजगंज शामिल हैं।












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