नरेंद्र मोदी से मुलाकात को बेकरार चीन और अमेरिका

रविवार को एक तरफ जहां चीन के विदेश मंत्री वांग याई अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली पहुंच रहे हैं तो वहीं अमेरिका की वरिष्ठ अधिकारी विदेश विभाग की सहायक सचिव निशा बिस्वाल भी नई दिल्ली में मोदी और उनके वरिष्ठ मंत्रियों से मुलाकात कर सकती हैं।
मतभेद सुलझाने आए चीन के विदेश मंत्री
दोनों ही प्रतिनिधिमंडल भारत के साथ ही साथ मोदी सरकार के लिए भी काफी अहमियत रखते हैं। चीन ने साफ कर दिया है कि मतभेदों से अलग दोनों पक्षों को अब बेहतर रणनीतियों पर जोर देना होगा।
वांग के मुताबिक वह भारत और चीन के रिश्तों को लेकर काफी आशावान हैं और उन्हें लगता है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार दोनों देशों के बीच जारी सीमा विवाद को सुलझा सकती है।
द हिंदू को दिए अपने एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में वांग ने कहा है कि दोनों पक्षों को यह तय करना होगा कि सीमा विवाद चीन और भारत के संबंधों को विकसित करने में असर डालेगा। मोदी की सरकार बनने के बाद वांग चीन की ओर से आने वाले पहले ऐसे नेता हैं जिन्हें चीन ने नरेंद्र मोदी सरकार के साथ उच्च स्तरीय संबंध स्थापित करने के लिए भेजा है।
वांग ने द हिंदू को लिखे अपने जवाब में बताया है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें बतौर 'विशेष दूत' बनाकर व्यक्तिगत तौर पर भारत जाने का निर्देश दिया था। यह निर्देश उन्हें मोदी के प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद ही दिया गया था।
वांग ने इस बात की जानकारी भी दी कि चीन के राष्ट्रपति भी इस वर्ष भारत आएंगे। इसके साथ ही वह जुलाई में होने वाली ब्रिक्स देशों की समिट में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
अमेरिका ने भेजा अपना दूत
वहीं दूसरी ओर नरेंद्र मोदी के बतौर प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के सिर्फ 15 दिनों के अंदर अमेरिका ने भी निशा बिस्वाल अपना एक विशेष दूत भारत भेजा है। निशा शनिवार को दिल्ली पहुंच गईं और वह यहां पर नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक विशेष मुलाकात करेंगी।
बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से यह अमेरिका के किसी वरिष्ठ अधिकारी की पहली भारत यात्रा है। बिस्वाल के भारत दौरे के साथ ही भारत में अमेरिका की अंतरिम राजदूत कैथलीन स्टीफेंस भी भारत पहुंचेंगी। बिस्वाल मार्च में आखिरी बार दिल्ली आईं थीं जब भारत और अमेरिका देवयानी खोबरागड़े के विवाद का सामना कर रहे थे।
कैथलीन और निशा दोनों ही अगले दो दिनों के दौरान विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात करेंगी। अमेरिकी सूत्रों की ओर से गई जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने पूर्व अमेरिकी राजदूत नैंसी पावेल की फरवरी में नरेंद्र मोदी के साथ हुई मुलाकात से पहले ही मोदी के साथ संबंध बेहतर करने की मुहिम तेज कर दी थीं।
अमेरिका अब भारत के साथ अपने रिश्तों को सुधारना चाहता है और इसके लिए ही उसने बिस्वाल को भारत भेजा है। बिस्वाल जून के तीसरे हफ्ते में फिर से भारत आएंगी। बिस्वाल का वह भारत दौर भारत-अमेरिकी-जापान त्रिपक्षीय वार्ता के तहत होगा।












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