सोनभद्र में सोने के साथ युरेनियम का भी है भंडार, जानें भारत को क्या होगा फायदा
Along with gold, there is also a stock of uranium in Sonbhadra, know what will benefit India by thisz? सोनभद्र में सोने के साथ युरेनियम का भी है भंडार, जानें इससे भारत को क्या होगा फायदा
बेंगलुरु। सोनभद्र जिले की सोन पहाड़ी पर सोने का भंडार के साथ-साथ पहाड़ी के नीचे यूरेनियम का भी बड़ा भंडार भी हैं। ये खबर भारत के लिए सोने पे सुहागा जैसी है। बता दें साल 2012 से भंडार के बारे में पुख्ता जानकारी जुटाने की प्रक्रिया चल रही थी। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के सर्वे में सोनभद्र की पहाड़ियों में गोल्ड के अलावा अन्य खनिज के भी भारी मात्रा में दबे होने की संभावना व्यक्त की गई है। सोनभद्र में 3 हजार टन सोने भंडार के साथ ही यूरेनियम के भंडार भी हैं।

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बता दें जिले में यूरेनियम की खोज कर रही परमाणु ऊर्जा विभाग हैदराबाद की टीम ने जनपद के म्योरपुर ब्लाक के कुदरी गांव में भारी मात्रा में यूरेनियम होने की संभावना जताई है। 2012 में जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा सोने की खोज के बाद अब परमाणु ऊर्जा विभाग हैदराबाद की टीम भी पिछले डेढ़ माह से म्योरपुर हवाई पट्टी से हेलीकाप्टर द्वारा एरो जेनेटिक सिस्टम के माध्यम से सबसे महंगी धातु यूरेनियम की खोज कर रही है। बताया जा रहा हैं कि म्योरपुर ब्लॉक के कुदरी लीलासी के बीच यूरेनियम का भंडार है। इसके लिए जीएसआई के वैज्ञानिकों ने तीन स्थानों पर खुदाई भी की है।

तीन किलोमीटर तक यूरेनियम होने की है संभावना
इसमें म्योरपुर के आसपास की पहाड़ियों में तीन किलोमीटर तक क्षेत्र में यूरेनियम को लेकर बात सामने आयी है। सब कुछ ठीक रहा तो अगले वर्ष यहां भी खुदाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। आइए जानते हैं इतनी अधिक मात्रा में युरेनियम मिलने से भारत को क्या फायदा होने वाला हैं ?

दुनिया की सबसे मंहगी धातु हैं युरेनियम
यूरेनियम दुनिया की सबसे मंहगी धातु हैं। यह ऐसी धातु अगर इसे खुले में रखेगे तो इसमें खुद-बखुद आग लग जाएगी। देखने में बहुत ही सुंदर सफेद और चमकदार युरेनियम हवा के संपर्क पर स्वयं ही जल उठता है। खतरनाक होने के बावजूद मेटल ऑफ होप के नाम से से जानी जाने वाली और धरती के अंदर पायी जाने वो युरेनियम का भंडार मिलना भारत को और मलामाल कर देगा।

बिजली उत्पादन में किया जाता है इसका उपयोग
वैज्ञानिको के अनुसार यह बहुत ही सक्रिय तत्व है यह किसी भी पदार्थ के लिए साथ बहुत जल्दी ही क्रिया कर लेता हैं। परामाणु ऊर्जा में इसका उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। वर्तमान समय में धरती पर यूरेनियम का सबसे अधिक उपयोग परमाणु ऊर्जा में किया जाता है। सभी परमाणु ऊर्जा क्षेत्रों में विशाल बहुमत में समृद्ध यूरेनियम ईंधन की आवश्यकता होती है

परमाणु ऊर्जा बनाने में किया जाता है इसका प्रयोग
यूरेनियम तत्व का प्रयोग परमाणु हथियारों और परमाणु युग के कार्यो में किया जाता है। हथियारों की दौड़ से परमाणु हथियारों में संचित समृद्ध यूरेनियम को दुनिया के परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह बेहद ताकतवर भी है, यूरेनियम ईंधन की एक 7 ग्राम गोली 3.5 बैरल तेल और 807 किलोग्राम (1,77 9 पाउंड) कोयले के रूप से ज्यादा ऊर्जा बनाती है।1 किलोग्राम यूरेनियम235, 80टेराज़ोन जितनी एनर्जी पैदा करता है। यूरेनियम के उपयोग की बात करें तो परमाणु ऊर्जा में इसका उपयोग बिजली बनाने के लिए किया जाता है। 1 किलोग्राम यूरेनियम से 24 हजार मेगावॉट जितनी बिजली उत्पन्न होती है। यूरेनियम के नाइट्रेट और एसिटेट का उपयोग फोटोग्राफी में भी होता है।

हिरोशिमा, नागासाकी में इस खतरनाक धातु से मचायी थी तबाही
बता दें दुनिया में कुछ खतरनाक सब्सटेंस है। जिनमें सबसे खतरनाक है'यूरेनियम हैं। दूसरे विश्व युद्ध के अंत में जब हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमला हुआ था तब 64 किलोग्राम यूरेनियम का उपयोग किया गया था। जिसमें सिर्फ 0.002 जितनी ही परमाणु ऊर्जा ही उत्सर्जित हो पायी थी। उसमें से अगर 20 किलोग्राम जितनी भी ऊर्जा कनवर्ट हो जाती तो दुनिया तबाह हो जाती और आज हम ज़िन्दा नहीं होते। इससे आप अन्दाजा लगा सकते हैं कि यूरेनियम का एक छोटा सा कण भी कितना खतरनाक होता है।

यूरेनियम सबसे ज्यादा ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है
यूरेनियम-235 एक खतरनाक और चमकीली सफेद रंग की घातु हैं। इसका परमाणु क्रम 92 है। यूरेनियम सबसे ज्यादा ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। जिसके पास पूरी दुनिया का 29% यानि 17लाख टन यूरेनियम है। दूसरे नंबर पर कजाकिस्तान है जिसके पास 6.2 लाख टन यूरेनियम उपलब्ध है। तीसरे नम्बर पर 5 लाख टन यूरेनियम के साथ रशिया का नाम आता है। भारत के झारखंड में भी यूरेनियम भंडार है लेकिन वो यूरेनियम बहुत ही खराब क्वालिटी का है। ये धरती की भूमि और समुद्री खदानों से मिलता है। शुरुआत में ये हमें अशुद्ध रूप में मिलता है। बाद में इसके अयस्क को खदानों से निकलकर, केमिकल प्रक्रिया से शुद्ध यूरेनियम को अलग किया जाता है।

अथाह खजानों से भरा है सोन पहाड़ी, जहां मिला सोने का भंडार
महुली के दुद्धी तहसील क्षेत्र में स्थित महुली के पोलवा तथा डेवढ़ी गांव में स्थित सोन पहाड़ी का इतिहास सदियों पुराना है। यहां पर कभी राजा बरियार शाह का किला हुआ करता था। किला के दोनों तरफ शिव पहाड़ी तथा सोन पहाड़ी स्थित है, जहाँ पर कहा जाता है कि राजा के किले से लेकर दोनों पहाड़ियों में अकूत सोना चांदी समेत अन्य अष्ट धातु के खजाने छिपे हुए हैं। मान्यता है की झारखंड राज्य के नगर ऊंटारी में 32 मन सोने की बंशीधर की मूर्ति भी इसी सोन पहाड़ी से निकली हुई है। महुली के पास पोलवा तथा डेवढ़ी गांव में स्थित राजा बरियार शाह के खंडहर व खेतों में तब्दील हो चुके भूमि पर महुली निवासी एक किसान को लगभग दस वर्ष पहले हल चलाने के दौरान सोना, चांदी तथा अष्ट धातु के करोड़ों का खजाना मिला था। विंण्ढमगंज पुलिस और तहसील प्रशासन ने किसान से खजाना ले लिया था।












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