Interview: बहन ने ट्यूशन पढ़ाकर भाई को बनाया IAS, सौरभ ने पहले ही प्रयास में UPSC में लहराया परचम

नई दिल्ली। UPSC 2021 की नतीजे सामने आने के साथ ही कई प्रेरणादायक कहानियां सामने आई है। इनके संघर्ष की कहानी लाखों युवाओं में जोश भर देती है, जो अपनी जिंदगी को कठिन मानने लग जाते हैं उन्हें इसकी कहानियां जरूर पढ़नी चाहिए। आज ऐसे ही एक ऐसे आईएएस अधिकारी से हम आपकी मुलाकात करवाने जा रही है, जिन्होंने अभावों के सामने घुटने नहीं टेके। मुश्किल में भी जीत का जज्बा नहीं छोड़ा। यूपीएससी 2021 की परीक्षा में 357 वीं रैकिंग हासिल कर पहले ही प्रयास में सिविल सर्विस की परीक्षा पास करने वाले पलामू के कुमार सौरभ की कहानी संघर्ष और प्ररणा से भरी है।

 UPSC Success Story of IAS Kumar Saurabh rank 357: Father who run shop died, Sister made her brother IAS by teaching tuition

अभावों के सामने नहीं मानी हार

सौरभ के पिता दिलीप पांडेय दिल्ली की एक दुकान में काम करते थे, लेकिन साल 2011 में उनकी मौत हो गई। पिता की मौत के बाद परिवार में कमाने वाला कोई नहीं था। मां, बहन के साथ सौरभ वापस अपने गांव पलामू, झारखंड के पांडू जिले के पांडू गांव चले गए। बहन ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया, ताकि भाई की पढ़ाई जारी रहे। घर की खेती और बहन के ट्यूशन से जो थोड़ी बहुत कमाई होती थी, उससे ही पूरा घर चलता था। मैट्रिक और इंटर की पढाई गांव से करने के बाद सौरभ ग्रेजुएशन करने के लिए दिल्ली पहुंच गए।

पूर्व राष्ट्रपति कलाम की एक लाइन ने बदल दी जिंदगी

सौरभ ने वनइंडिया के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि उन्होंने एक सेमिनार में हिस्सा लिया था, जहां पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के कोट का जिक्र किया गया। उन्होंने कहा कि अभावों में जीने वाले अब्दुल कमाल अजाद को जब कोई राष्ट्रपति बनने से नहीं रोक सकता तो फिर मैं कैसे रुक सकता था। उनकी प्रेरणा ने मेरे लिए बूस्टर डोज का काम किया और उन्होंने स्नातक की पढ़ाई के साथ-साथ ही UPSC की तैयारी शुरू कर दी।

दिल्ली की चकाचौंध में नहीं हुए गुम

सौरभ ने बताया कि गांव से दिल्ली आने के बाद शुरुआत में वो भी महानगर के चौकाचौध में गुम हो गए, लेकिन वक्त रहते ही उन्हें अपने लक्ष्य की याद आ गई और फिर बिना रूके वो लगातार पढ़ते रहे। अपनी गलतियों को सुधारा, अपनी कमियों को दूर किया। बहन ने कभी पैसे की दिक्कत नहीं होने दी। गांव में बहन ट्यूशन पढ़ाती रही, ताकि सौरभ को पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं हो, उसे पैसों की तंगी का सामना नहीं करना पड़ा। वहीं सौऱभ भी अपनी बहन के इस त्याग का सम्मान करते हैं। सौरभ की बहन साक्षी पांडेय ने कोई कसर नहीं छोड़ी और उनके त्याग और सौरभ की मेहनत ने उन्हें पहले ही प्रयास में सफलता दिला दी। सौरभ पहले ही प्रयास में UPSC क्रैक कर गए और 357वीं रैंकिंग हासिल की। 24 साल की छोटी उम्र में ही सौरभ भारतीय राजस्व विभाग में अधिकारी बनेंगे।

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