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UPSC Result: 5 साल की उम्र में गंवाया हाथ, फिर भी नहीं मानी हार, जज्बे के दम पर पास की सिविल सेवा परीक्षा

UPSC Result: अखिला ने महज 5 साल की उम्र में अपना दायां हाथ गंवा दिया था, इसके बाद भी उन्होंने इसे अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया और सिविल सेवा में सफलता हासिल करके एक कीर्तिमान स्थापित किया।

akhila


UPSC Result: यूपीएससी का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया गया है। इस बार के नतीजों में भी कई उम्मीदवारों ने विषम परिस्थितोयं के बावजूद देश की सर्वोच्च परीक्षा में बड़ी सफलता हासिल की है। सिविल सेवा की परीक्षा में 760वीं रैंक पाने वाली अखिला बीएस की सफलता की कहानी काफी प्रेरक है।

दरअसल अखिला जब महज 5 साल की थीं तो उनका बस से एक्सिडेंट हो गया था। इस हादसे में अखिला का दांया हाथ कट गया था। लेकिन बावजूद इसके अखिला ने इसे अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया और देश की सबसे प्रतिष्ठित और मुश्किल परीक्षा में सफलता हासिल की है।

अखिला के पिता के बुहारी कॉल हिल गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल के पूर्व हेडमास्टर हैं। अखिला के पिता के बुहारी और मां सजीना बीवी का 11 सितंबर 2000 में एक्सिडेंट हो गया था। इस दौरान अखिला का दांया हाथ कंधे से नीचे आ गया था, जिसके बाद डॉक्टर ने जर्मनी के डॉक्टरों से सलाह लेने को कहा था। भारत में जर्मनी की मेडिकल टीम ने अखिला का परीक्षण किया, लेकिन इसके बाद भी उनके हाथ को ठीक नहीं किया जा सका।

इस घटना के बाद अखिला ने अपने रोजमर्रा के काम बाएं हाथ से करने लगी और बाएं हाथ से ही उन्होंने लिखा सीखा। उन्होंने बोर्ड की परीक्षा में सर्वोच्च अंक हासिल किए। इसके बाद आईआईटी मद्रास में एमए की पढ़ाई की और सिविल परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

अखिला ने तीसरे प्रयास में सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल की है। अपने पहले दो प्रयासों में अखिला ने प्राथमिक परीक्षा में सफलता हासिल की थी। अपने अनुभव को साझा करते हुए अखिला कहती हैं कि वह बहुत खुश हैं और ईश्वर की शुक्रगुजार हैं।

अखिला ने बताया कि मेरी एक टीचर ने मुझे कलेक्टर के पेशे के बारे में बताया, जिसे सुनकर मैं प्रेरित हुई थी और यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी शुरू की। 2019 में ग्रेजुएशन के बाद ही सिविल की तैयारी शुरी कर दी। मैंने 2020, 2021, 2022 में परीक्षा दी। तीनों बार प्री में मुझे सफलता मिली, पहली बार मैं फाइनल में सफल हुई हूं।

मैंने हर टॉपर को फॉलो किया, उनसे सीखने की कोशिश की। मैंने बेंगलुरू में एक साल कोचिंग की थी। इसके बाद मैं वापस केरल आ गई और तिरुवनंतपुरम के एक इंस्टिट्यूट से मदद ली। मेरी इस यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन मैंने हमेशा इसके लिए कड़ी मेहनत की।

हर रोज 4-5 घंटे बैठकर पढ़ना मेरे लिए काफी मुश्किल था। बायां हाथ इस्तेमाल करते हुए लगातार बैठना दर्दभरा अनुभव था। मेरे लिए 3-4 घंटे लगातार लिखना भी चुनौतीभरा था। मैं थक जाती थी। मुख्य परीक्षा के लिए मुझे लगातार तीन दिन लिखना था। यह बहुत चुनौतीपूर्ण था।

बता दें कि लगातार दूसरी बार आईएएस में शीर्ष 5 में से 4 सफल उम्मीदवार महिलाएं हैं। कुल 933 उम्मीदवार इस परीक्षा में सफल हुए हैं जिसमे से 613 पुरुष और 320 महिलाएं हैं।

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