यूनिवर्सिटी ने गोल्ड मेडल रोक दिया तो किया सिविल सर्विस का रुख, UPSC क्रैक कर लिया अपमान का बदला

यूपीएससी परीक्षा 2022 का रिजल्ट घोषित हो गया। इसमें एक ऐसा लड़का भी उत्तीर्ण हुआ है जिसने अपमान का बदला लेने के लिए सिविल सेवा चुनी।

Sarjeet Kajla

UPSC SCE 2022, Inspirational Story of Sarjeet Kajla: मेहनत से किये गए किसी भी काम का कोई शॉर्ट कट नहीं होता। इसके साथ अगर आत्मविश्वास भी मिल जाए, तो बड़े से बड़ा काम किया जा सकता है। ऐसा ही कर दिखाया है राजस्थान के झुंझुनू जिले के छोटे से गांव लोयल के रहने वाले सरजीत काजला ने। काजला ने आज जारी हुए UPSC 2022 परीक्षा के रिजल्ट में 455वीं रैंक हासिल कर बाजी मार ली।

यहां उनकी रैंक और गांव अहम नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण है वह कहानी जिसकी आग ने उनमें सिविल सर्विस में जाने की ललक पैदा की। सरजीत काजला का पोस्ट ग्रेजुएशन में कथित तौर पर एक साजिश के तहत गोल्ड मेडल रोक दिया गया था। यह साल 2013 की बात है, जब वह सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ राजस्थान में (एमए) मीडिया स्टडीज की पढ़ाई कर रहे थे।

गोल्ड मेडल नहीं दिए जाने पर छोड़ दी डिग्री

सरजीत काजला पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान क्लास टॉपर थे। वह हर किसी की नज़र में गोल्ड मेडलिस्ट बनने वाले थे, तभी अचानक कथित तौर पर एक साजिश के तहत उनका रिजल्ट रोक दिया जाता है और मेडल किसी और को दे दिया जाता है। काजला ने प्रयास भी किया लेकिन कहीं से उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उनको गहरा धक्का लगा और उन्होंने डिग्री छोड़ कुछ और करने का निर्णय लिया लेकिन यह तो अस्थायी था।

डॉक्यूमेंट्री फिल्मों में किया डायरेक्शन का काम

डिग्री छोड़ने के बाद सरजीत ने डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के डायरेक्शन का काम किया। उन्होंने दिल्ली के कुछ फिल्म प्रोडक्शन हाउस के साथ काम किया। हर चीज की उम्दा समझ रखने वाले काजला ने डायरेक्शन में भी शानदार कार्य किया और कुछ नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्मों में वह डायरेक्शन टीम में थे लेकिन दिल में अभी भी एक अलग टीस थी। उनका दिल और दिमाग कहीं और था, उनका गोल कुछ और था। सही समय का इंतजार भी था।

अपमान का बदला लेने के लिए 30+ उम्र में की UPSC क्रैक

सरजीत काजला को हर दिन अपने गोल्ड मेडल की कहानी याद आती थी, उनका दिल और दिमाग इस अपमान की आग में जल रहे थे। उन्होंने कोरोना वायरस के बाद के समय को UPSC की तैयारी के लिए चुना। इस समय सिविल सर्वेंट अपनी नौकरी का आधा दशक पूरा कर चुके होते हैं, तब (29) साल में काजला ने तैयारी करते हुए परीक्षा दी और प्रीलिम्स क्लियर किया। इसके बाद उन्होंने मेंस दिया और इंटरव्यू तक पहुँच गए तथा अंततः 455वीं रैंक के साथ उस अपमान की आग को शांत कर दिया, जो लम्बे समय से उनके अंदर धधक रही थी।

किसान परिवार से आते हैं काजला

सरजीत एक किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने घर पर रहकर ही तैयारी करते हुए यह मुकाम हासिल किया है। लोयल गांव के अन्य लोगों के लिए वह आज एक प्रेरणा बन गए हैं। उन्होंने यह भी दर्शा दिया कि सफलता के लिए कोई पैमाना नहीं होता है, उसके लिए बस मेहनत की आवश्यकता होती है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया ग्रेजुएशन

काजला ने 12वीं तक की पढ़ाई झुंझुनू में ही की और बाद में दिल्ली यूनिवर्सिटी के किरोड़ीमल कॉलेज में दाखिला लेने के लिए फॉर्म भरा और 12वीं में अच्छे अंक होने के कारण उनका एडमिशन हो गया। वहां से ग्रेजुएशन करने के बाद वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी में जाने के लिए उन्होंने राजस्थान की सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मीडिया विभाग में एडमिशन लिया था लेकिन होना कुछ और ही था। हालांकि वह एक अच्छे फोटोग्राफर अब भी हैं, हर तरह का कैमरा चलाने का हुनर भी काजला में है।

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