UP Lok Sabha Election 2024: सीट-शेयरिंग के कितने करीब पहुंची सपा-कांग्रेस, बसपा फैक्टर बनी मजबूरी?
उत्तर प्रदेश में इंडिया ब्लॉक के दोनों ही बड़े दलों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में सीटों के बंटवारे पर तीसरे दौर की बातचीत हो चुकी है। अभी तक जो कुछ निकलकर आ रहा है, उससे यही संकेत मिल रहे हैं कि डील में बहुत दिक्कत नहीं होने वाली। क्योंकि. दोनों ही पक्ष गठबंधन की मजबूरी समझ रहे हैं।
अभी तक जो कुछ बात निकलकर आई है, उसके अनुसार यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस 20 सीटों पर दावेदारी जता रही है और समाजवादी पार्टी भी अपने लिए कम से कम 60 सीटें चाहती है।

कांग्रेस 20 और सपा 60 सीटें चाहती है!
सीटों के बंटवारे पर दोनों दलों की बातचीत की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं जाहिर होने की गुजारिश करते हुए ईटी से कहा है, 'कांग्रेस ने 20 सीटें मांगी हैं। सीटों की लिस्ट पर भी चर्चा हुई है। दोनों पार्टियों ने फिर से मिलने और एक-एक सीट पर बातचीत करने का फैसला किया है।'
कांग्रेस को अभी भी बसपा से आस!
दोनों को पता है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपी में अकेले चुनाव लड़ने का एलान करके इनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ समय में बसपा के प्रति सपा की ओर से सुरों में नरमी दिखाई पड़ने लगी थी। वहीं कांग्रेस ने अभी भी उम्मीदों का दामन नहीं छोड़ा है।
क्योंकि, उसे लगता है कि बहुजन समाज पार्टी को प्रदेश में इंडिया ब्लॉक का हिस्सा बनाए बिना बीजेपी से मुकाबला करना आसान नहीं होगा। बुधवार को सपा के साथ सीटों के बंटवारे पर बातचीत करने पहुंचे कांग्रेस के नेशनल अलायंस कमेटी के हिस्सा रहे सलमान खुर्शीद ने इसी तरफ इशारा किया है।
दोनों दल डील फाइनल करन के करीब!
इधर जानकारी के मुताबिक समाजवादी पार्टी प्रदेश में 60 सीटों पर खुद लड़ना चाहती है और 20 सीटों में से ही कांग्रेस, आरएलएडी और अपना दल (कमेरावादी) के लिए छोड़ना चाहती है।
पता चला है कि आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी पश्चिमी यूपी के जाट-बहुल 5 से 7 सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारना चाहते हैं और इसकी मांग वह सपा प्रमुख अखिलेश से कर भी चुके हैं। जहां तक अपना दल (कमेरावादी) की बात है तो उसके लिए सपा 1 सीट छोड़ सकती है।
इस तरह से कांग्रेस के लिए 15 के आसपास सीटें बच जाती हैं, जो कि उसकी सियासी जमीन के हिसाब से कम नहीं कही जा सकती।
20 सीटों की दावेदारी चुनिंदा सीटों पर दबाव बनाने की रणनीति!
जहां तक कांग्रेस की ओर से 20 सीटों के दावे का सवाल है तो उसे भी पता है कि यह मांग सिर्फ समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए हो सकती है। इसे चुनिंदा सीटें लेने के लिए दबाव बनाए रखने के नजरिए से भी देखा जा सकता है।
सपा ने भी जाहिर कर दी अपनी रणनीति
तथ्य तो ये है कि पिछली बार वह अमेठी सीट भी नहीं बचा पाई थी। जबकि, रायबरेली और अमेठी में गांधी परिवार के उम्मीदवारों के खिलाफ सपा-बसपा वैसे भी उम्मीदवार देने से परहेज ही करते आए हैं।
लिए सूत्रों ने बताया भी है कि सपा की ओर से यह भी कहा गया है कि वैसे तो उन्होंने 78 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रखी है। मतलब, अमेठी और रायबरेली सीट तो वे यूं भी कांग्रेस के लिए छोड़ ही देंगे।
2019 में यूपी चुनाव में दलगत प्रदर्शन
दरअसल, यूपी में सपा और कांग्रेस दोनों को ही जमीनी हकीकत का अंदाजा है। 2019 के लोकसभा चुनावों में सपा-बसपा का गठबंधन हुआ था। तब भी बीएसपी को 19.26% और समाजवादी पार्टी को 17.96% मिले थे। कांग्रेस को 6.31% वोट ही मिले थे और बीजेपी 49.56% लाई थी।
2022 में यूपी चुनाव में दलगत प्रदर्शन
2022 के विधानसभा चुनावों में राज्य में हुए कुल मतदान में सपा का वोट शेयर 32% रहा था, बीएसपी को करीब 13% वोट मिले थे। कांग्रेस 403 सीटों में से 399 पर लड़कर भी लगभग 2% ही वोट ले सकी थी। वहीं भाजपा को 41% वोट मिले थे।
यही वजह है कि सीटों के इस बंटवारे का हिस्सा रहे कांग्रेस और सपा दोनों दलों के नेताओं ने बातचीत को सकारात्मक ही बताया है। शायद, जमीनी हालात को देखने के बाद ज्यादा अड़ियल रवैए के लिए गुंजाइश ही नहीं बच रही है।












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