UP Caste Census: यूपी में पहली बार होने होगी जातिगत जनगणना, घर-घर पहुंचेंगे अधिकारी, ऐप से जुटेगा पूरा डेटा
UP Caste Census 2027: उत्तर प्रदेश में पहली बार जातिगत जनगणना को लेकर तैयारी तेज हो गई है। लंबे समय से जिस मुद्दे पर राजनीतिक बहस चल रही थी, अब वह प्रशासनिक प्रक्रिया की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है। राज्य में होने वाली अगली जनगणना सिर्फ जनसंख्या गिनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें लोगों की जाति, घर की स्थिति, सुविधाएं और सामाजिक ढांचे से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी शामिल होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी और डेटा मोबाइल ऐप के जरिए दर्ज किया जाएगा।
जनगणना निदेशालय के मुताबिक, इस बार की प्रक्रिया पारंपरिक कागजी फॉर्म से अलग होगी। अधिकारी सीधे घर-घर पहुंचेंगे और तय सवालों के आधार पर जानकारी जुटाएंगे। यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि प्रशासनिक तौर पर भी बड़ा माना जा रहा है।

▶️दो चरणों में बंटा है जनगणना का पूरा सफर (Two-Phase Census Strategy)
यूपी में जनगणना की इस भारी-भरकम कवायद को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। पहले चरण में 'हाउस होल्ड लेवल' पर फोकस रहेगा, यानी प्रगणक आपके घर पहुंचकर मकान की बनावट, सुविधाओं और परिवार की बुनियादी जानकारी जुटाएंगे। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा।
इसी फेज में 'व्यक्तिगत डेटा' लिया जाएगा, जिसमें लोगों से उनकी जाति पूछी जाएगी। केंद्र सरकार की नई नीति के तहत जातिगत आंकड़ों को इस बार मुख्य धारा की जनगणना का हिस्सा बनाया गया है, जो राज्य के भविष्य के लिए बेहद अहम आंकड़े साबित होंगे।

▶️आज से आपके घर आएंगे प्रगणक, पूछे जाएंगे ये 34 सवाल
आज से जनगणना का काम जमीन पर शुरू हो चुका है। जब प्रगणक आपके दरवाजे पर आएंगे, तो वे आपसे कुल 34 सवाल पूछेंगे। इसमें आपको कोई भारी-भरकम कागजात दिखाने की जरूरत नहीं होगी, बस सही जानकारी देनी होगी। सवालों की सूची काफी डिटेल है, जिसमें शामिल हैं:
🔹मकान की बनावट: घर का फर्श, दीवारें और छत किस सामग्री (मिट्टी, सीमेंट, पत्थर या कंक्रीट) से बनी हैं।
🔹बुनियादी सुविधाएं: पेयजल का स्रोत (नल, हैंडपंप या कुआं), परिसर में शौचालय की स्थिति और बिजली का कनेक्शन।
🔹रसोई और ईंधन: घर में खाना पकाने के लिए एलपीजी/पीएनजी है या जलाऊ लकड़ी और उपले का इस्तेमाल होता है।
🔹डिजिटल संपत्ति: आपके पास रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, लैपटॉप या स्मार्टफोन जैसी संपत्तियां हैं या नहीं।
🔹वाहन और अनाज: परिवार के पास साइकिल, स्कूटर या कार है और खाने में मुख्य रूप से किस अनाज (गेहूं, चावल, बाजरा) का उपयोग होता है।
▶️जातिगत डेटा क्यों है अहम? (Why Caste Data Matters)
जातिगत जनगणना सिर्फ आंकड़ों का मामला नहीं है। इसका असर राजनीति, सरकारी योजनाओं और सामाजिक नीतियों पर पड़ सकता है। अभी तक सरकारी योजनाएं अनुमानित जनसंख्या डेटा के आधार पर बनाई जाती थीं। लेकिन जातिगत जानकारी मिलने के बाद संसाधनों का वितरण ज्यादा सटीक तरीके से हो सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे यह पता चल सकेगा कि किस समुदाय की वास्तविक आबादी कितनी है और किन वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ कम पहुंच रहा है।
▶️डिजिटल जनगणना का नया मॉडल (Digital Census Model)
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल मोड पर आधारित होगी। मोबाइल ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि जानकारी तुरंत केंद्रीय सिस्टम तक पहुंचेगी और बाद में सुधार करना आसान होगा।
पहले जनगणना में फॉर्म भरने और डेटा अपलोड करने में काफी समय लगता था। लेकिन अब तकनीक के इस्तेमाल से प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।
▶️फरवरी 2027 में शुरू होगा दूसरा चरण (Second Phase From February 2027)
पहले चरण में मकानों और परिवारों की जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद फरवरी 2027 में दूसरा चरण शुरू होगा। इसी दौरान व्यक्तिगत डेटा और जातिगत जानकारी दर्ज की जाएगी।
राज्य प्रशासन ने इसके लिए बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। करीब 5.25 लाख कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इसमें मंडल आयुक्त, जिलाधिकारी, चार्ज अधिकारी, मास्टर ट्रेनर और लाखों प्रगणक शामिल होंगे।
▶️SOP अभी तैयार होना बाकी (SOP Yet To Be Finalised)
हालांकि जातिगत जनगणना की तैयारी शुरू हो चुकी है, लेकिन इसकी प्रक्रिया को लेकर अंतिम SOP यानी Standard Operating Procedure अभी तय नहीं हुई है।
सरकार और प्रशासनिक विभाग यह तय कर रहे हैं कि जातिगत जानकारी कैसे दर्ज होगी, कौन से नियम लागू होंगे और डेटा की गोपनीयता कैसे सुरक्षित रखी जाएगी।
▶️प्राइवेसी पर रहेगा खास ध्यान
व्यक्तिगत जानकारी जुटाने के दौरान डेटा सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की निजी जानकारी सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा। डेटा सिर्फ सरकारी उपयोग के लिए रहेगा और इसे तय नियमों के तहत ही इस्तेमाल किया जाएगा।
▶️5.25 लाख कर्मियों की बड़ी फौज और प्राइवेसी का पूरा ध्यान
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में इस कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों की एक बड़ी फौज तैनात की है। करीब 5.25 लाख कर्मियों को इस मिशन में लगाया गया है, जिसमें 75 जिलाधिकारी, 18 मंडल आयुक्त और हजारों मास्टर ट्रेनर शामिल हैं। शीतल वर्मा ने भरोसा दिलाया है कि व्यक्तिगत डेटा जुटाते समय लोगों की प्राइवेसी (निजता) का पूरा ख्याल रखा जाएगा। हालांकि, जातिगत जनगणना के लिए अभी विस्तृत एसओपी (SOP) तैयार की जा रही है, लेकिन प्रशासन का दावा है कि मोबाइल ऐप के जरिए यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सटीक होगी।
यह जनगणना न केवल आबादी के सही आंकड़े पेश करेगी, बल्कि आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश के पास अपनी हर जाति का स्पष्ट और प्रमाणित डेटा उपलब्ध होगा। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे प्रगणकों का सहयोग करें और सही जानकारी दर्ज कराएं।














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