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उद्धव-फडणवीस की मुलाकात से Nitish Kumar की बढ़ रही टेंशन! BJP साध रही मुंबई से पटना तक सारे समीकरण

BJP News: महाराष्ट्र की राजनीति में इस वक्त अटकलों का दौर फिर तेज हो गया है। इस बार मुंबई में हुई एक मुलाकात ने बिहार की सियासत को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मुंबई में उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात हुई और इसके बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि एक बार फिर शिवसेना (UBT) और बीजेपी साथ आ सकते हैं। महाराष्ट्र के एक नेता गिरीश महाजन ने तो दावा भी कर दिया है कि एनडीए (NDA) का संख्या बल मानसून सत्र में बढ़ सकता है।

उद्धव ठाकरे और बीजेपी ने पिछले 4 सालों में एक दूसरे के खिलाफ जमकर बयानबाजी की है, लेकिन सियासत में ऐसी कटुताएं भुलाकर दोस्ती बहुत आम है। दूसरी ओर लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी को बहुमत नहीं मिला और एनडीए में उनकी निर्भरता जेडीयू और टीडीपी पर है। हालांकि, अब तक दोनों ही दल अपनी निष्ठा गठबंधन के लिए जाहिर करते रहे हैं। इसके बाद भी एनडीए की संख्या बल बढ़ाने की बीजेपी की कोशिशों की खबरों को नकारा नहीं जा सकता है।

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उद्धव ठाकरे को साथ लाकर BJP साधेगी नीतीश कुमार को

उद्धव ठाकरे के सामने इस वक्त अपना राजनीतिक करियर और पार्टी का अस्तित्व बचाने की चुनौती है। ऐसी खबरें हैं कि ठाकरे की पार्टी के 7 सांसद इस वक्त एनडीए के संपर्क में हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार मिली और वह सिर्फ 20 सीटों तक सिमट गई थी। ऐसे में उद्धव अपने बेटे और पार्टी के भविष्य को देखते हुए एनडीए में जा सकते हैं। उद्धव ठाकरे की पार्टी के 9 सांसद हैं और एनडीए में अगर वह शामिल होते हैं, तो बीजेपी की निर्भरता नीतीश कुमार पर कम हो जाएगी। बिहार में होने वाले चुनाव में बीजेपी इस समीकरण के आधार पर नीतीश पर दबाव बना सकती है।

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नीतीश कुमार के पलटी मारने की आदत को देखते हुए बीजेपी अब फूंक-फूंककर कदम रख रही है। एनडीए में जेडीयू के सांसदों की संख्या 12 है और संख्या बल के लिहाज से यह अहम आंकड़ा है। हालांकि, अगर नीतीश पलटी भी मारते हैं, तो केंद्र सरकार के पास उद्धव ठाकरे का समर्थन रहा तो सरकार पर कोई आंच नहीं आएगी। टीडीपी, एलजेपी (आर) जैसे दल बिना शर्त समर्थन दे रहे हैं।

इस वक्त क्या है लोकसभा में स्थिति

बीजेपी: 240
जेडीयू: 12
शिवसेना (UBT): 9

BJP अब नीतीश कुमार के अलावा सभी विकल्प रखना चाहती तैयार

ऐसे में नीतीश कुमार के समर्थन वापस लेने की स्थिति में भी बीजेपी को संख्या बल के लिए परेशान नहीं होना होगा। दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य को लेकर भी खबरें आती रहती हैं कि वह पहले की तरह सक्रिय नहीं हैं। कुल मिलाकर बीजेपी अपने लिए सभी विकल्प मजबूत बनाकर रखना चाहती है। साफ है कि इस एक मुलाकात ने मुंबई से लेकर पटना तक के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

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उद्धव को साथ लाकर एकनाथ शिंदे पर भी बना सकती है दबाव

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के बाद से ही ऐसी खबरें आ रही हैं कि एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के बीच तनातनी चल रही है। शिंदे खुद को दबाव में महसूस करते हैं और उन्हें मनचाहे मंत्रालय नहीं मिले, जिसकी वजह से भी उन्हें गठबंधन में सहजता महसूस नहीं हो रही है। उद्धव ठाकरे के पास 20 विधायक हैं, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) के 57 विधायक हैं। इसके बावजूद बीजेपी के लिए सरकार बनाना कोई मुश्किल नहीं है क्योंकि खुद बीजेपी के अपने 132 विधायक हैं और अजित पवार बिना किसी शर्त के गठबंधन में हैं। लगातार कहते रहे हैं कि वह डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी से संतुष्ट हैं।

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महाराष्ट्र की सियासत में जैसे समीकरण बन रहे हैं उसमें अब एकनाथ शिंदे की जरूरत बीजेपी को नहीं है। शिंदे के पास एनडीए में रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हालांकि, अभी तक सारी संभावनाएं और संभावित समीकरणों कयासों के दौर में ही है। किसी भी पक्ष ने खुलकर इस मुद्दे पर कुछ कहा नहीं है।

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