Twisha Sharma Case 2nd Autopsy: दूसरे पोस्टमॉर्टम पर AIIMS डॉक्टरों ने क्या कहा? पहली रिपोर्ट से कितनी अलग?
Twisha Sharma Case 2nd Autopsy Report Update: भोपाल में 12 मई 2026 को हुई पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा (33 वर्ष) की संदिग्ध मौत का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। कटारा हिल्स स्थित ससुराल में फंदे से लटकी अवस्था में मिली ट्विशा की मौत को लेकर परिवार दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा रहा है, जबकि ससुराल पक्ष नशे की लत का हवाला दे रहा है। इस विवादास्पद मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर AIIMS दिल्ली की विशेष टीम ने रविवार, 24 मई को दूसरा पोस्टमॉर्टम पूरा किया।
उसके बाद, डेडबॉडी परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंपी गई। शाम 5 बजे के आसपास भोपाल के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। अब सवाल यह है कि दूसरी रिपोर्ट क्या कहेगी और पहले पोस्टमॉर्टम में क्या खामियां थीं? आइए विस्तार से जानते हैं...

Twisha Sharma Death Case: क्या हुआ 12 मई को?
ट्विशा शर्मा नोएडा की रहने वाली थीं। दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से उनकी शादी हुई थी। मात्र पांच महीने बाद 12 मई की रात को उन्हें उनके ससुराल के ऊपरी कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया। परिवार का आरोप है कि मौत से पहले ट्विशा ने अपनी मां को फोन पर परेशानी बताई थी। कुछ ही देर बाद फोन कट गया और फिर सूचना मिली कि ट्विशा सांस नहीं ले रही हैं।
पुलिस ने शुरुआत में आत्महत्या का मामला माना, लेकिन ट्विशा के परिवार ने दहेज उत्पीड़न, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई। इसमें पति समर्थ सिंह और सास (पूर्व जिला न्यायाधीश) गिरिबाला सिंह(Giribala Singh) मुख्य आरोपी हैं। समर्थ सिंह 10 दिन फरार रहने के बाद गिरफ्तार हुए और फिलहाल 7 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं।
Twisha Sharma First Postmortem Report: पहले पोस्टमॉर्टम की प्रमुख खामियां क्या?
ट्विशा की मौत के बाद AIIMS भोपाल में पहला पोस्टमॉर्टम हुआ। परिवार और उनके वकीलों ने इसमें कई गंभीर कमियां बताईं। इन खामियों ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया...
- 1. चोटों की अनदेखी और अपर्याप्त जांच: ट्विशा की बाईं बांह और कलाई पर चोट के निशान थे। परिवार का दावा है कि इन चोटों की गहराई, समयसीमा, और कारण पता लगाने के लिए विस्तृत डिसेक्शन (चीर-फाड़) नहीं की गई।
- 2. गर्दन और सर्वाइकल क्षेत्र की रेडियोलॉजिकल जांच का अभाव: फांसी में गर्दन की हड्डियों, हाइॉइड बोन और अन्य संरचनाओं की X-ray या CT स्कैन जैसी जांच जरूरी होती है, लेकिन यह नहीं हुई।
- 3. लिगेचर मटेरियल (फंदे) और चोटों का मिलान: इस्तेमाल किए गए फंदे और गर्दन पर पड़े निशानों के बीच संबंध स्थापित करने की कोशिश अपर्याप्त रही।
- 4. विसरा और टॉक्सिकोलॉजी: संरक्षित विसरा सैंपल्स का उचित विष विज्ञान परीक्षण पर जोर नहीं दिया गया।
- 5. अन्य बेसिक गलतियां: ऊंचाई, कपड़ों का रंग जैसी बेसिक जानकारी में भी विसंगतियां बताई गईं। परिवार पर शव को जल्दी जलाने का दबाव बनाने का आरोप भी लगा।
इन खामियों के चलते परिवार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें बहु-विषयक फोरेंसिक, पैथोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल जांच की मांग की गई।
AIIMS Delhi Team Second Postmortem: AIIMS दिल्ली की टीम और दूसरा पोस्टमॉर्टम
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 22 मई के आदेश पर AIIMS दिल्ली ने फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता के नेतृत्व में चार सदस्यीय विशेष मेडिकल बोर्ड गठित किया। टीम शनिवार शाम भोपाल पहुंची और रविवार सुबह AIIMS भोपाल के मॉर्चरी में पोस्टमॉर्टम शुरू किया।
टीम ने क्या किया?
- शव की विस्तृत बाहरी और आंतरिक जांच।
- चोटों (खासकर बांह, कलाई और गर्दन) का डिटेल्ड डिसेक्शन।
- हिस्टोपैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और अन्य जरूरी टेस्ट के सैंपल लिए।
- घटनास्थल (कटारा हिल्स घर) का दौरा किया।
- फोटो, वीडियो और लिखित नोट्स तैयार किए।
डॉ. सुधीर गुप्ता के अनुसार, रिपोर्ट तैयार होने में कुछ समय लगेगा क्योंकि हिस्टोपैथोलॉजी, विसरा का टॉक्सिकोलॉजी परीक्षण और अन्य लैब जांच जरूरी हैं। टीम सोमवार, 25 मई को दिल्ली वापस लौट रही है।
फॉरेंसिक साइंस में दूसरा पोस्टमॉर्टम क्यों महत्वपूर्ण?
फॉरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक:
- समय अंतर: पहला पोस्टमॉर्टम मौत के तुरंत बाद हुआ, दूसरा करीब 12 दिन बाद। कुछ चोटें या निशान समय के साथ बेहतर दिख सकते हैं या नए टेस्ट से पुष्टि हो सकती है।
- उन्नत उपकरण: AIIMS दिल्ली की टीम के पास एडवांस्ड रेडियोलॉजी, माइक्रोस्कोपिक जांच और बेहतर प्रोटोकॉल हैं।
- निष्पक्षता: स्वतंत्र संस्थान की टीम होने से पक्षपात के आरोप कम हो सकते हैं।
- मृत्यु का सटीक कारण: क्या मौत एंटीमॉर्टम हैंगिंग (जिंदा रहते फांसी) से हुई? क्या कोई स्ट्रगल के निशान हैं? क्या दम घुटने, गला घोंटने या अन्य कारण संभव हैं? चेहरे, आंखों और फेफड़ों के निष्कर्ष इन सवालों का जवाब दे सकते हैं।
परिवार की मांग और बड़े सवाल
ट्विशा के पिता और वकील अंकुर पांडे ने मेडिकल बोर्ड को विस्तृत अभ्यावेदन सौंपा था। उन्होंने पूछा:
- चोटें आत्महत्या से पहले की हैं या बाद की?
- क्या नशे के कोई प्रमाण मिलते हैं?
- फंदा और चोटों में मैचिंग है या नहीं?
- क्या मौत हत्या का परिणाम हो सकती है?
परिवार का कहना है कि ट्विशा पढ़ी-लिखी, करियर ओरिएंटेड महिला थीं। वे मॉडलिंग और अभिनय से जुड़ी रहीं। इतनी जल्दी आत्महत्या करना उनके स्वभाव के विपरीत था।
केस के अन्य पहलू
- पुलिस कार्रवाई: FIR में IPC की धाराएं दहेज, क्रूरता और आत्महत्या उकसाने की लगाई गई हैं। SIT जांच कर रही है।
- सुप्रीम कोर्ट: मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया है। 25 मई को सुनवाई होनी है।
- NCW: महिला आयोग ने भी रिपोर्ट मांगी है।
- ससुराल पक्ष: गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल चुकी है। वे ट्विशा की मानसिक स्थिति और नशे का दावा कर रही हैं, जिसकी पुलिस जांच में पुष्टि नहीं हुई है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार क्यों जरूरी?
दूसरी रिपोर्ट आने तक कई बातें अनुमान पर आधारित हैं। अगर रिपोर्ट में अतिरिक्त चोटें, स्ट्रगल के निशान या विषाक्त पदार्थ मिलते हैं तो मामला हत्या की दिशा में जा सकता है। अगर पहले रिपोर्ट की पुष्टि होती है तो आत्महत्या का पक्ष मजबूत होगा।
भारत में दहेज और घरेलू हिंसा की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण रूप से आम हैं। यह केस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें प्रभावशाली परिवार (पूर्व जज) शामिल है और जांच में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
यह रिपोर्ट उपलब्ध तथ्यों, पुलिस बयानों, हाई कोर्ट आदेश और AIIMS अधिकारियों के कथनों पर आधारित है। अंतिम रिपोर्ट आने तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। जांच जारी है।













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