शाहकोट उपचुनाव 2018: आप के मैदान में आने से शाहकोट में इस बार है त्रिकोणीय मुकाबला
शाहकोट। पंजाब के जिला जालंधर के तहत आने वाले विधानसभा चुनाव क्षेत्र में इस माह के अंत में 28 मई को होने जा रहे उपचुनावों को लेकर चुनावी महौल गरमा गया है। सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के लिये अहम इस सीट पर अकाली दल भी पूरा दमखम दिखा रहा है। वहीं आम आदमी पार्टी ने अपना प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतार कर दोनों दलों की नींद हराम कर दी है। शाहकोट साधन संपन्न इलाका है। यहां के लोग बड़ी तादाद में विदेश में जाकर अपनी रोजी रोटी कमा रहे हैं। यही वजह है कि पंजाब ही नहीं विदेशों में बसे एनआरआई पंजाबियों की इस चुनाव पर नजर है।

उपचुनाव के मद्देनजर जालंधर जिले में तुरंत प्रभाव से चुनाव आचार संहिता लागू है। जिससे कुछ हद तक यहां शोरगुल अभी कम है। चुनाव आयोग ने शाहकोट उपचुनाव के लिये नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 10 मई निर्धारित की है। लेकिन यहां अभी से जोर आजमाईश शुरू हो गई है। नामांकन पत्रों की पड़ताल की तिथि 11 मई होगी, जबकि नामाकंन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि 14 मई निश्चित की गई है। 28 मई को मतदान होगा और वोटों की गिनती और नतीजे का ऐलान 31 मई को किया जाएगा।

शाहकोट आकली दल की परंपरागत सीट रही है। पिछले चुनावों में भी यहां से अकाली दल के प्रत्याशी अजित सिंह कोहाड़ चुनाव जीते थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी हरदेव सिंह लाडी शेरेवालिया को हराया था। लेकिन चार फरवरी को कोहाड़ को दिल का दौरा पड़ा व उनका निधन हो गया। सीट खाली होने की वजह से यहां उपचुनाव की नौबत आन पड़ी। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्दर सिंह की प्रतिष्ठा सवाल बने शाहकोट में कांग्रेस पार्टी ने कैप्टन की पंसद के प्रत्याशी हरदेव सिंह लाडी शेरेवालिया को ही दोबारा चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस पार्टी प्रत्याशी अपना नामांकन भरने से पहले ही नये झमेले में फंस गये हैं। उन पर दो दिन पहले थाना महिलापुर में अवैध खनन,खान एवं खनन अधिनियम 1957 की धारा 379 के तहत मामला दरज किया जा चुका है। दरअसल कुछ दिन पहले सोशल मिडिया में एक विडियो वायरल हुआ था, जिसमें हरदेव सिंह लाडी शेरेवालिया ण्क सरपंच से रेत खनन मामले में बातचीत कर रहे थे। हालांकि उन्होंने इसे विरोधियों की बदनाम करने की चाल बताया था।

मामला जब गरमाया तो शाहकोट के मेहतपुर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर परमिंदर पाल सिंह बाजवा ने भठ्ठा मजदूर यूनियन के प्रधान मोहन सिंह के बयान के आधार पर शेरेवालिया के खिलाफ मामला दरज कर लिया। उसके बाद मामला इस कदर गरमाया कि राज्य सरकार व पुलिस प्रशासन के दवाब के चलते थाना प्रभारी बाजवा ने अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि उनका इस्तीफा अभी मंजूर नहीं हुआ है। लेकिन मामले ने राजनैतिक रंगत ले ली है।

खुद एसएचओ बाजवा कहते हैं कि एस.एच.ओ. के पास कोड ऑफ कंडक्ट के दौरान कई पॉवर होती हैं। अगर कोई गलत काम करेगा तो उसे रोकने के लिए अगर हम एफ.आई.आर. रजिस्टर्ड नहीं करेंगे तो क्या करेंगे। क्या आंख बंद करके देखते रहेंगे। हालांकि यह पहली बार नहीं है कि लाडी के खिलाफ शिकायत आई है। इसे पहले भी आई है। बस कुछ लोगों ने उस पर केस दर्ज नहीं होने दिया। अब केस दर्ज हुआ है तो उन्हें सीनियर कांग्रेसी नेता भी जान से मारने तक की धमकियां दे रहे हैं।
अकाली दल की तरफ से स्वर्गीय कैबिनेट मंत्री अजीत सिंह कोहाड़ के बेटे नायब सिंह कोहाड़ को उम्मीदवार घोषित किया गया है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि चुनावों में उनकी जीत तय है। इसका मुख्य कारण यह है कि लोगों का अकाली दल पर अभी भी विश्वास कायम है तथा लोग कांग्रेस की नीतियों से तंग आ गए हैं। कोहाड़ ने कहा की लाडी शेरोवालिया के साथ उनका कोई मुकाबला नहीं है, क्योंकि उनकी जीत यकीनी है। आम आदमी पार्टी ने रत्न सिंह कक्कडक़लां को उम्मीदवार घोषित किया है।
2017 के विधानसभा चुनाव में आप की टिकट पर चुनाव लडऩे वाले डा अमरजीत सिंह थिंड ने 42 हजार वोटें हासिल की थीं। अब वह अकाली दल में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में पार्टी को उपचुनाव के लिए योग्य उम्मीदवार ढूंढने में मुश्किल आ रही थी। जिसके चलते अब पार्टी ने रत्न सिंह कक्कडक़लां पर दांव लगाया है। जो एनआरआई हैं।












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