रोगियों के किसी समूह में रेमडेसिवीर दवा का कोई लाभ नहीं दिखाः आईसीएमआर
नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन के तत्वावधान में शुक्रवार को कोरोना वायरस नियंत्रण के रूप में चर्चित दवाएं क्रमशः रेमडिसवर, इंटरफेरॉन, बी1ए, लोपिनविर/रितोनविर और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर सॉलिडैरिटी थैरेप्यूटिक्स परीक्षण आयोजित किया गया। परीक्षण में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) भी सक्रिय भागीदार है। अंतरिम विश्लेषण में पाया गया कि कोरोना संक्रमित रोगियों के किसी समूह में रेमडेसिवीर दवा का कोई लाभ नहीं दिखाया।
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गौरतलब है हाइड्रोक्लोरोक्वीन और रेमडेसिवीर को कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में रामबाण बताया गया था, लेकिन संजीवनी करार दिए गए एक-एक करके सभी दवाएं बेअसर साबित हुईं। इनमें हाइड्रोक्लोरोक्वीन, रेमडेसिवीर और डेक्सामेथासोन का नाम लिया जा सकता है। मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्लोरोक्वीन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों को कौन भूल सकता है।

इसी तरह प्लाजा थैरेपी को गेमचेंजर कहा गया और 100 फीसदी इलाज का दावा किया, लेकिन प्लाज़्मा थैरेपी भी कोरोना के इलाज में बेअसर साबित हुआ। प्लाज्मा थैरेपी में कोरोना से ठीक हो चुके एक व्यक्ति के शरीर से निकाले गए खून से अन्य चार अन्य लोगों का इलाज किया जाता है, जो उबर चुके मरीजोंं के खून में विकसित एंटीबॉडीज को संक्रमित व्यक्ति के शरीर में चढ़ाया जाता है। सच्चाई यह है कि आज भी कोरोना से बचाव में सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क ज्यादा प्रभावी कदम बने हुए हैं।












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