रामपाल की गिरफ्तारी के लिए अदा की गई कीमत 6 लाशें और 54 करोड़ रुपये
हिसार। 18 दिनों की छुप्पम-छुपाई, छह जाने और लगभग तीन सौ से ज्यादा जख्मी लोगों की कीमत अदा करने के बाद आखिरकार हरियाणा पुलिस ने बुधवार की रात 'बवाली बाबा' संत रामपाल को उसके बिल में घुस कर गिरफ्तार करने में कामयाब रही। जी हां हरियाणा पुलिस का सबसे बड़ा ऑपरेशन सफल हुआ। रात लगभग 9 बजकर 21 मिनट पर रामपाल अंधेरे का फायदा उठाकर चेहरा छिपाकर आश्रम से भागने की फिराक में था कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस उसे गिरफ्तार कर चंडीगढ ले गई है जहां 21 नवंबर को उसे अदालत में पेश किया जायेगा।
इस पूरे मामले में जो सबसे हैरान करने वाली बात है वो ये है कि एक पाखंडी और हत्यारे बाबा के बवंडर को शांत करने के लिए लगभग 54 करोड़ रुपये खर्च कर दिये गये। अब आप सोच रहे होंगे कि राज्य के सबसे बड़े अदालत का हुक्म, हुक्म की तामील के लिए तीस हजार से भी ज्यादा पैरामिलिट्री फोर्स और हरियाणा पुलिस के जवान। इतना ही नहीं जिसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाना है उसका पूरा अड्डा भी पुलिसिया घेरे में फिर भी 54 करोड़ का खर्चा।
तो आईए हम आपको बताते हैं। चुकि हरियाणा हाईकोर्ट के बेंच ने रामपाल की पेशी कराने को लेकर तमाम इंतजामों पर हुए खर्च का ब्योरा केंद्र, पंजाब, हरियाणा सरकार व चंडीगढ़ प्रशासन से मांगा है। यह सुनवाई के दिन कोर्ट को बताना है। संत रामपाल को डाराकर उसे बिल से बाहर निकालने के लिए रोज 6 करोड़ रुपये खर्च हुए। पिछले 9 दिनों से ये जानलेवा ड्रामा अपने हाई वोल्टेज पर रहा। जिला प्रशासन एक शीर्ष अधिकारी के अनुमान के मुताबिक जवानों के प्रतिदिन के मूवमेंट पर करीब 6 करोड़ रुपए खर्च हो रहे है (6 करोड़ एक दिन तो 9 दिन के 54 करोड़)। इनमें जवानों के खर्चे से लेकर वाहनों और अन्य विभागों की गतिविधियां भी शामिल है। आपको बता दें कि रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद 10 नवंबर को हिसार में पैरा मिलिट्री फोर्स और हरियाणा पुलिस की कंपनियां आना शुरू हो गईं थी। इसके बाद फोर्स की संख्या लगातार बढ़ती गई।
आंकडों में 54 करोड़ खर्चा का हिसाब
- पैरा मिलिट्री और हरियाणा पुलिस के कुल जवान 30,000
- प्रति जवान खर्चा- 1 हजार रुपए (प्रतिदिन)
- कुल खर्चा- 3 करोड़ रुपए
- करीब 100 आईपीएस और एचपीएस के अधिकारी
- प्रति अधिकारी खर्चा- 2 हजार रुपए (प्रतिदिन)
- कुल खर्चा- 2 लाख रुपए
- रामपाल प्रकरण को लेकर प्रदेश के विभिन्न डिपो से रोडवेज की करीब 300 बसें पुलिस डयूटी में लगी हुई हैं। इनमें रोडवेज के करीब 600 कर्मचारी भी तैनात हैं। रोडवेज अधिकारियों के अनुसार एक रोडवेज बस के प्रतिदिन परिचालक के हिसाब से करीब 15 हजार रुपये कमाई करती है।
- पुलिस और प्रशासन ने रोडवेज बसों के अलावा करीब 700 वाहन अभियान में लगा रखे हैं। इनमें पुलिस की 400 बसें, 100 वज्र वाहन, 40 बुलेट प्रूफ वाहन, 40 एंबुलेंस, 30 जेसीबी, 20 क्रेन, 20 पीसीआर, 25 ट्रैक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के करीब 30 वाहन शामिल है। इन वाहनों के परिचालन पर भी रोज बड़ी रकम खर्च हो रही है।













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