'आज वाजपेयी का सबसे बड़ा डर सच हो गया...', महुआ मोइत्रा ने क्यों किया पूर्व पीएम अटल का जिक्र
महुआ मोइत्रा ने लोकसभा में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सबसे बड़ा डर, उनकी अपनी ही पार्टी की सरकार में सच हो गया है।
नई दिल्ली, 23 मार्च: अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वालीं टीएमसी की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के ऊपर तीखा हमला बोला है। महुआ मोइत्रा ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सबसे बड़ा डर, उनकी अपनी ही पार्टी की सरकार में सच हो गया है। टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने संसद को रोम का कोलोसियम बना दिया है, जहां प्रधानमंत्री एक ग्लेडिएटर की तरह संसद में प्रवेश करते हैं और चारों तरफ 'मोदी-मोदी' के नारे लगते हैं।

महुआ मोइत्रा ने किया वाजपेयी के भाषण का जिक्र
1972 में संसद के अंदर दिए गए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण का जिक्र करते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा, 'मैं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का वो भाषण याद दिलाना चाहूंगी, जिसमें उन्होंने 1972 में संसद के अंदर कहा था- इन दिनों नई दिल्ली का मौहाल दम घोंटने वाले माहौल जैसा हो गया है। यहां आजादी से सांस ले पाना आसान नहीं है। ऑल इंडिया रेडियो पर सुबह से लेकर रात तक बस प्रधानमंत्री के नाम का जाप और सिनेमा स्क्रीन पर भरपूर प्रोपेगेंडा... विपक्ष में बैठे लोग इससे कैसे लड़ सकते हैं।'

रिकॉर्ड से हटाए गए महुआ मोइत्रा के भाषण के कुछ हिस्से
महुआ मोइत्रा ने आगे कहा, 'ये शायद भारत की सबसे बड़ी त्रासदी है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के तौर पर जिस पार्टी का नेतृत्व किया, आज उसी पार्टी की सरकार ने संसद को रोम के कोलोसियम में बदलकर रख दिया है।' दरअसल हाल ही में यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब संसद के बजट सत्र में पहुंचे तो पार्टी के सांसदों ने मोदी-मोदी के नारे लगाकर उनका स्वागत किया। महुआ मोइत्रा ने इसी मामले को लेकर संसद में भाजपा पर निशाना साधा। हालांकि बाद में महुआ मोइत्रा के भाषण के कुछ अंश सदन के रिकॉर्ड से हटा दिए गए।

पूर्व पीएम वाजपेयी ने कहा क्या था?
1972 में संसद के अंदर भाषण देते हुए पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था, 'चुनाव परिणामों ने प्रधानमंत्री के हाथों में असाधारण शक्ति और अधिकार दे दिए हैं। इस वक्त सारी शक्ति नई दिल्ली में केंद्रित है। केंद्र के मंत्रियों को दिल्ली दरबार के दरबारियों में बदल दिया गया है। प्रधानमंत्री का सचिवालय कैबिनेट के समानांतर बन गया है। प्रधानमंत्री शिखर पर खड़े हैं और उनके सहयोगी उनके चरणों में लेटे हुए हैं।'

'विपक्ष में बैठे लोग इससे कैसे लड़ सकते हैं?'
अपने भाषण में वाजपेयी ने आगे कहा, 'क्या यह स्थिति एक व्यक्ति के तानाशाह के रूप में स्थापित होने की खतरनाक आशंका से भरी हुई नहीं है? इन दिनों नई दिल्ली का मौहाल दम घोंटने वाले माहौल जैसा हो गया है। यहां आजादी से सांस ले पाना आसान नहीं है। सरकार के विरोध की आवाज को एक विद्रोह के रूप में देखा जाता है। ऑल इंडिया रेडियो पर सुबह से लेकर रात तक बस प्रधानमंत्री के नाम का जाप और सिनेमा स्क्रीन पर भरपूर प्रोपेगेंडा... विपक्ष में बैठे लोग इससे कैसे लड़ सकते हैं।'
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