कर्नाटक में टीपू सुल्तान बीजेपी के चुनाव प्रचारक?
'मैसूर के 18वीं सदी के शासक टीपू सुल्तान कर्नाटक विधानसभा चुनाव जीतने के लिए बीजेपी के 21वीं सदी के चुनाव अभियान में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.'
यह बात शायद आपको सुनने में अजीब लग सकती है.
लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस को हराने के लिए टीपू सुल्तान को मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल कर रही है. यहां तक कि बीजेपी टीपू सुल्तान विरोधी इस अभियान को दिल्ली में भी दोहरा रही है.
बीजेपी ने दिल्ली विधानसभा में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने का विरोध किया है. गणतंत्र दिवस पर स्वतंत्रता सेनानियों और भारत निर्माण में योगदान देने वाली 70 शख्सियतों की तस्वीरें दिल्ली विधानसभा में लगाई गई हैं. इसमें टीपू सुल्तान की तस्वीर भी शामिल है और बीजेपी ने इसका विरोध किया है.
निशाने पर टीपू सुल्तान
बीजेपी की सांसद और राज्य में पार्टी महासचिव शोभा करंदलाजे ने बीबीसी से कहा, ''निश्चित तौर पर यह एक चुनावी मुद्दा है. सिद्धारमैया सरकार के आने से पहले तक टीपू इतिहास थे. लेकिन, टीपू जयंती के आयोजन से कांग्रेस सरकार ने समाज को बांटने की कोशिश की है. यह पूरी तरह गैरज़रूरी था.''
अगस्त के अंत से ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कौशल विकास राज्य मंत्री अनंत हेगड़े से लेकर सबसे निचले पायदान तक के नेताओं के निशाने पर टीपू सुल्तान हैं.
येदुरप्पा और जगदीश शेट्टार की तस्वीरें
जब अमित शाह चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने के लिए पार्टी के सदस्यों से पहली बार मिलने बैंग्लुरू आए थे, तब से टीपू सुल्तान तुष्टीकरण का प्रतीक बन गए थे.
बीजेपी के तमाम मंचों से ये आरोप लगने लगे कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार टीपू जयंती को मनाकर तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है.
हेगड़े ने तुरंत इसी राह पर चलते हुए सरकार को टीपू जयंती के लिए उन्हें न बुलाने के लिए कहा, क्योंकि वह टीपू सुल्तान को एक बर्बर हत्यारा, सनकी और बलात्कारी मानते हैं.
हेगड़े के ये कठोर शब्द पार्टी सदस्यों के बीच काफी मायने रखते थे, क्योंकि उनके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदुरप्पा ने साल 2008-2011 के बीच सत्ता में रहते हुए टीपू सुल्तान की याद में हुए कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था.
कांग्रेस ने बीजेपी को जवाब देने के लिए येदुरप्पा और उनके बाद मुख्यमंत्री रहे जगदीश शेट्टार की टीपू सुल्तान की टोपी पहने हुए तस्वीरें जारी की थीं.
यह मुद्दा लगभग तब खत्म हो गया था, जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ''मैसूर रॉकेट के विकास और युद्ध में उसके इस्तेमाल में टीपू सुल्तान का अहम योगदान'' बताया था. कोविंद ने कहा था, ''ये तकनीक बाद में यूरोप के लोगों ने अपनाई थी.'' इसने बीजेपी में गुस्सा भर दिया था.
लेकिन, जल्द ही पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को परिवर्तन यात्रा के लिए बुलाया. आदित्यनाथ ने कहा कि बीजेपी को सत्ता में वापस लाकर कर्नाटक के लोग फिर से ''हनुमान, संतों और आध्यात्मिक नेताओं की पूजा करना शुरू कर पाएंगे न कि टीपू सुल्तान की.''
शृंगेरी मंदिर का पुनरुद्धार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बीजेपी के नेताओं का मानना है कि टीपू सुल्तान के पिता हैदर अली ख़ान ने ''मैसूर राज्य को हड़पा था.''
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में आरएसएस संयोजक वी नागराज ने कहा, ''हैदर अली ख़ान के बेटे टीपू सुल्तान कट्टरपंथी थे जिन्होंने हजारों हिंदुओं को मारा और उनका धर्म परिवर्तन कराया. कोड़वा (या कुर्गी) उनके ख़िलाफ़ थे क्योंकि टीपू सुल्तान ने उनके साथ भयंकर अत्याचार किया था, जो दक्षिण कन्नड़ जिले में हैं.''
शृंगेरी मठ पर मौजूद रिकॉर्ड्स और इतिहासकार कहते हैं कि टीपू सुल्तान ने मराठाओं के शृंगेरी मंदिर को नुकसान पहुंचाने के बाद मंदिर का पुनरुद्धार कराया था और वहां जेवर दिए थे.
नागराज कहते हैं, ''यह हिंदुओं को संतुष्ट करने के लिए किया गया था. उन्होंने शृंगेरी मठ को दान दिया. यह एक राजनीतिक चाल थी. उन्होंने अपने राज्य को बचाने के लिए अंग्रेजों से लड़ाई की. हमारा विरोध इसलिए नहीं है कि वह एक मुसलमान थे बल्कि इस बात से है कि उन्होंने बहुत अत्याचार किया था.''
टीपू सुल्तान को लेकर आरएसएस के अदंदा करियप्पा ने कहा, ''कोई उसे धर्मनिरपेक्ष नहीं बोल सकता. एक धर्मनिरपेक्ष शख्स एक तरफ शृंगेरी में किसी मंदिर को बचाएगा तो दूसरी तरफ केरल के एक मंदिर को लूटेगा नहीं.''
राजनीतिक विश्लेषक और जैन विश्वविद्यालय में प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर संदीप शास्त्री ने कहा, ''बीजेपी इसे एक मुद्दा बनाएगी और वोटों के ध्रुवीकरण के लिए कुछ इलाकों में इस्तेमाल करेगी.''
टीपू सुल्तान ने 1783-1799 तक वर्तमान के कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों पर शासन किया था. उन्होंने बहादुरी के साथ अंग्रेजों से लड़ते हुए अपनी जान दे दी थी.
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