भारत की रक्षा करते हुए लद्दाख में तिब्बती इंडियन आर्मी ऑफिसर ने कुर्बान कर दी जिंदगी
नई दिल्ली। भारत और तिब्बत यूं तो पिछले पांच दशक से एक साथ हैं लेकिन भारत की सीमाओं की रक्षा में तिब्बत के निवासी अपना सब-कुछ झोंक रहे हैं। 51 साल के इंडियन आर्मी ऑफिसर न्याइमा तेनजिन ने देश प्रेम और ड्यूटी के लिए समर्पण की जो मिसाल पेश की है, वह कई सदियों तक याद रखी जाएगी। कंपनी लीडर की रैंक पर तेनजिन ने उस समय भारत की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए जब 30 अगस्त को पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों ने लद्दाख के चुशुल में घुसपैठ की थी।
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सैनिक तेनजिन के गर्दन में लगी गोली
तिब्बत के अखबार तिब्बत सन ने इस घटना के बारे में जानकारी दी है। अखबार ने कुछ पुष्ट खबरों के हवाले से बताया है कि जिस समय कंपनी लीडर तेनजिन गश्त पर थे, उसी समय चीनी सेना की कार्रवाई में वह शहीद हो गए। उनके जूनियर जो तिब्बत के ही निवासी हैं, वोभी इस घटना में घायल हुए हैं। तिब्बत सन ने लिखा है कि कंपनी लीडर की गर्दन में गोली लगी और उन्होंने तुरंत ही दम तोड़ दिया। उनके 24 साल के जवान भी इस घटना में घायल हैं। अखबार ने लिखा है,, 'तेनजिन, तिब्बती अवस्थान (सेटलमेंट) चोग्लामसार के रहने वाले थे। यह जगह लद्दाख की राजधानी लेह के करीब है। घायल जवान 24 साल के तेनजिन लोदेन हैं।' अखबार के मुताबिक यह घटना शनिवार रात हुई है।

7 विकास के साथ थे तैनात
अखबार ने बताया है कि दोनों सैनिक स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) की 7 विकास बटालियन के साथ तैनात थे। इसे टू-टू के नाम से भी जाना जाता है। इस यूनिट का गठन तिब्बत के निर्वासित नागरिकों को शामिल करके किया गया है। शुरुआत में यह इंटेलीजेंस एजेंसी रॉ का हिस्सा था लेकिन अब भारतीय सेना का अंग है। 29 और 30 अगस्त को भारत ने चीन के उस प्रयास को विफल कर दिया है जिसमें पैंगोंग झील के दक्षिणी हिस्से पर कब्जे करने के मकसद से घुसपैठ की गई थी। तिब्बत के सैनिक उस समय थाकुंग पोस्ट के करीब थे और उन्होंने पीएलए के सैनिकों के निर्माण कार्य को रोक दिया था।

चुशुल में 7 विकास कर रही रक्षा
सेना का कहना है कि इस झड़प में हिंसा नहीं हुई है लेकिन सूत्रों की मानें तो इस बार तनाव 15 जून से कहीं ज्यादा था। 29 और 30 अगस्त की रात चीन को भारतीय सेना की उस रेजीमेंट ने मुंहतोड़ जवाब दिया है जिसमें तिब्बती नागरिक बतौर जवान तैनात थे। खबरें यहां तक हैं कि29 अगस्त को जो हरकत चीन की तरफ से की गई उसके बाद हैंड-टू-हैंड बैटल हुई है। सेना की तरफ से इस बारे में कुछ नहीं बताया गया है कि किस प्रकार का टकराव लद्दाख की पैंगोंग झील पर हुआ है। 7 विकास एसएसएफ के पास चुशुल की सुरक्षा की जिम्मेदारी है और इसमें ज्यादातर तिब्बत के ही मूल निवासी होते हैं।

सेना ने हिंसा पर नहीं दी कोई जानकारी
अखबार ने दावा किया है कि शनिवार को थाकुंग पोस्ट पर हिंसा भी हुई है जिसमें कई दर्जन चीनी सैनिक घायल हुए हैं। इस जगह पर गोली चलने की कोई घटना नहीं हुई है। हालांकि अभी तक भारतीय सेना की तरफ से हिंसा की बात से इनकार कर दिया गया है। 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद 29 और 30 अगस्त को हुई घटना के बाद पांच मई से जारी टकराव में नया मोड़ आ गया है। गलवान घाटी में भारतीय सेना के 20 सैनिक शहीद हो गए थे। वहीं पीएलए के 43 जवानों के मारे जाने की खबरें आई थीं। हालांकि अभी तक चीन की तरफ से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।












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