इस बार खेलिए गोबर से बने गुलाल की होली, औषधीय गुणों से है भरपूर!

रायपुर, 16 मार्च। होली के त्यौहार में रंगो से खेलने की परम्परा बेहद पुरानी है। पुराने ज़माने में फूलों के रंग का इस्तेमाल होली खेलने में होता था,लेकिन वक़्त बदला और कैमिकल से बने रंगो ने अपनी जगह बना ली। कैमिकल से बने रंगो की वजह से होने वाले नुकसान से बचने के लिए एक बार फिर लोग ईको फ्रेंडली रंगो की तरफ रूचि दिखाने लगे हैं। होली के बाजार में आपको कई हर्बल गुलाल मिल जायेंगे, इस बार अगर कोई आपको फूलों से बने हर्बल गुलाल की जगह गोबर से बने गुलाल से रंग लगाए तो चौकना नहीं, क्योंकि छत्तीसगढ़ में इस बार गोबर से बने गुलाल से होली खेली जाएगी।

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गोबर से गुलाल बनाने का यह अनूठा प्रयोग

छत्तीसगढ़ में इस बार गोबर के बने गुलाल से होली खेली जाएगी होगी। देश में गोबर से गुलाल बनाने का यह अनूठा प्रयोग पहली बार किया गया है।छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचल दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले की सांई बाबा स्व सहायता समूह की महिलाओं ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों साथ मिलकर गोबर का गुलाल तैयार किया हैं। इन महिलाओं ने इसे पहले महिलाओं ने फूल, सब्जियों से गुलाल भी तैयार किया था। छत्तीसगढ़ की चर्चित गौधन न्याय योजना से प्रेरित होकर महिलाओं ने गोबर से हर्बल गुलाल तैयार किया हैै, जिसका नाम 'गोमय हर्बल गुलाल' रखा गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय किसान मेला के दौरान गोमय गुलाल लांच किया था ।

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ऑनलाइन भी की जा सकती है खरीदी

गोमय गुलाल को छतीसगढ़ के सभी जिलों में बिक्री के लिए भेजा जा रहा है। इसके अलावा इसकी इसकी खरीदी ऑनलाइन भी की जा सकती है। कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ नारायण साहूके मुताबिक कि गोमय हर्बल गुलाल गोबर , वर्मी कम्पोस्ट और हल्दी, चंदन, चुकन्दर, कत्था, अरारोट, अपराजिता, सिंदूरी, मेंहदी और प्राकृतिक पदार्थों से बना हुआ है,इसी कारण इसमें औषधीय गुणों की भरमार है।

पूरी तरह इकोफ्रेंडली और हयूमन फ्रेंडली है गुलाल

यह गुलाल एंटी रेडिएशन, एंटी बैक्टेरियल गुणों से युक्त होने के साथ सुगंधित भी है। .साथ ही त्वचा को ठंडकता देने के साथ बालों और त्वचा की धुलाई, सफाई भी करता है।बताया जा रहा है कि गोबर से बना यह गुलाल पूरी तरह इकोफ्रेंडली और हयूमन फ्रेंडली है। इसे महिलाओं की आय सृजन के लिए कम लागत में गोठानों के जरिये शुद्ध गोबर से बनाया गया है। इसके निर्माण में सांई बाबा स्वसहायता समूह की 20 महिलाओं ने काफी मेहनत की है।

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यह भी जानना जरुरी है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने सुराजी गांव योजना के तहत प्रदेशभर में हजारों गौठान बनाकर उसमे आवारा मवेशी के तौर पर घूमने वाली गायों को रखा है। इन्ही गौठानों के माध्यम से गौधन न्याय योजना के तहत ग्रामीणों से गोबर खरीदी की जा जाती है, सरकार गोबर के एवज में ग्रामीण पशुपालकों को पैसों का भुगतान करती है।गोबर से गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट खाद का उत्पादन एवं विक्रय किया जाता है। सुराजी गांव योजना के माध्यम से निर्मित गौठान और गोधन न्याय योजना से ग्रामीणों को फायदा पहुंच रहा है।

वही सरकार का दावा है कि गोबर से बनने वाली खाद के कारण प्रदेश में जैविक खाद का इस्तेमाल बढ़ रहा है और प्रदेश पूर्व जैविक खेती करने वाले ऑर्गनिक फार्मिंग स्टेट के तौर पर पहचान बना रहा है। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनने से भी अर्थव्यवस्था सुधरी है।

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